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Gorakhpur News: एम्स में 22 वर्षीय युवती की सफल क्लेफ्ट लिप रिवीजन सर्जरी
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गोरखपुर। एम्स के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने बुधवार को 22 वर्षीय युवती की क्लेफ्ट लिप रिवीजन सर्जरी की है। ऑपरेशन सफल रहा और होंठ की विकृति को काफी हद तक ठीक कर दिया गया। दो दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
बता दें कि युवती की करीब ढाई वर्ष की आयु में क्लेफ्ट लिप सर्जरी हुई थी, लेकिन प्रारंभिक उपचार पूरी तरह सफल नहीं रहा था। उम्र बढ़ने के साथ होंठ की विकृति अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगी, जिससे उसके आत्मविश्वास पर भी प्रभाव पड़ रहा था। विस्तृत जांच के बाद चिकित्सकों ने सुधारात्मक रिवीजन सर्जरी की।
डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि क्लेफ्ट लिप की सर्जरी आमतौर पर बच्चे के तीन से छह माह की आयु में की जाती है, जबकि क्लेफ्ट पैलेट की मरम्मत नौ से 18 माह के बीच की जाती है। समय पर सर्जरी से बच्चे को भोजन निगलने में आसानी होती है और चेहरे की बनावट बेहतर होती है। साथ ही भविष्य में बोलने की क्षमता भी सामान्य रूप से विकसित हो सकती है।
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इस सर्जरी से जन्मजात कटे होंठ और कटे तालू जैसी विकृतियां ठीक की जा सकती हैं। शुरुआती उम्र में सर्जरी कराने से न केवल बच्चे की मुस्कान और चेहरे की बनावट सामान्य हो सकती है, बल्कि बोलने, खाने के विकास में मदद मिलती है।
बता दें कि युवती की करीब ढाई वर्ष की आयु में क्लेफ्ट लिप सर्जरी हुई थी, लेकिन प्रारंभिक उपचार पूरी तरह सफल नहीं रहा था। उम्र बढ़ने के साथ होंठ की विकृति अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगी, जिससे उसके आत्मविश्वास पर भी प्रभाव पड़ रहा था। विस्तृत जांच के बाद चिकित्सकों ने सुधारात्मक रिवीजन सर्जरी की।
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डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि क्लेफ्ट लिप की सर्जरी आमतौर पर बच्चे के तीन से छह माह की आयु में की जाती है, जबकि क्लेफ्ट पैलेट की मरम्मत नौ से 18 माह के बीच की जाती है। समय पर सर्जरी से बच्चे को भोजन निगलने में आसानी होती है और चेहरे की बनावट बेहतर होती है। साथ ही भविष्य में बोलने की क्षमता भी सामान्य रूप से विकसित हो सकती है।
इस सर्जरी से जन्मजात कटे होंठ और कटे तालू जैसी विकृतियां ठीक की जा सकती हैं। शुरुआती उम्र में सर्जरी कराने से न केवल बच्चे की मुस्कान और चेहरे की बनावट सामान्य हो सकती है, बल्कि बोलने, खाने के विकास में मदद मिलती है।