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Gorakhpur News: कोलकाता से चार लाख रुपये प्रतिमाह ठगों को मिलता था खर्च

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jan 2026 02:12 AM IST
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The thugs used to get Rs 4 lakh per month from Kolkata.
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गोरखपुर। 1400 विदेशी नागरिकों से ऑनलाइन ठगी का मामले में एक और पर्दाफाश हुआ है। कोलकाता में बैठा शातिर गोरखपुर में खोली गई ठगी की शाखा को संचालन के लिए चार लाख रुपये प्रतिमाह देता था। उन रुपये से आरोपी अभिषेक कार्यालय का खर्च उठाने के साथ ही रूम रेंट से लेकर कॉलरों का वेतन देता था। ये रुपये अभिषेक के खाते में आते थे। पुलिस अभिषेक के खातों को डिटेल हासिल करने के लिए एचडीएफसी बैंक से पत्राचार किया है। इससे यह पता चल सके कि अब तक कितने रुपये अभिषेक के खाते में आए हैं। इधर, सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच ईडी को भी सौंपी जा सकती है।
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अमेरिका, कनाडा, शिकागो, कैलिफोर्निया, हांगकांग, ब्रिटेन और लेबनान के नागरिकों से स्वास्थ्य बीमा, टैक्स रिफंड और यूएस की सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर ठगने गिरोह के छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया था। इसमें पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रूपेश सिंह, कोलकाता के अभिषेक पांडेय, तिवारीपुर के हर्ष आर्या, बलरामपुर के सूरज कुमार तिवारी, शंकरपुर देहात कोतवाली के अश्वनी कुमार मौर्या मौर्या और लखनऊ की शलोनी यादव आदि शामिल थी।
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पुलिस ने मौके से 28 लैपटॉप, 37 हेडफोन, दो राउटर, कई मोबाइल फोन, कालिंग स्क्रिप्ट, ई-मेल डाटा और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए थे। पुलिस मामले की जांच आए बढ़ाई तो पता चला कि कोलकाता में बैठा शख्स गोरखपुर में खोले गए कॉल सेंटर का संचालन करने के लिए अभिषेक के खाते में प्रतिमाह चार लाख रुपये देता था। इसमें से कॉल सेंटर में काम करने वाले 10 लोगों को वेतन दिया जाता था। इसके अलावा साइबर ठग अपनी अय्याशी में खर्च करते थे।


काॅलरों ने दर्ज कराया बयान, पुलिस ने सभी को बनाया गवाह
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने जब दबिश दी तो मकान में प्रथम तल पर 9 युवक और एक युवती लैपटॉप व हेडफोन के जरिये से विदेशी नागरिकों से अंग्रेजी में बात करते मिले थे। कॉलरों में रामगढ़ताल थाना क्षेत्र निवासी प्रशांत त्रिपाठी, धीरज कुमार त्रिपाठी, गुलरिहा निवासी सतीश गुप्ता, महाराजगंज निवासी मिथलेश प्रजापति, अंश विश्वकर्मा, कैंपियरगंज निवासी मुस्कान, संतकबीरनगर निवासी प्रवीण मिश्रा, बस्ती निवासी आकाश पांडेय, देवरिया निवासी मो. इरफान रजा और पिपराइच निवासी चंद्र प्रताप शामिल थे। पुलिस ने सभी कॉलरों के बयान दर्ज करने के साथ ही उन्हें गवाह के रूप में भी शामिल किया है। इसके जरिये पुलिस आरोपियों को सजा दिलाएगी।


मास्टर लैपटॉप और स्क्रिप्ट पेपर के जरिये दी जाती थी ट्रेनिंग
अभिषेक पांडेय ने पुलिस को बताया था कि मास्टर लैपटॉप और स्क्रिप्ट पेपर के माध्यम से कॉलरों को ट्रेनिंग दी जाती थी। विदेशी ग्राहकों का डाटा स्टीव मेलामाइन की ईमेल आईडी से प्राप्त किया जाता था। इसके बाद कालर ग्राहकों को इंश्योरेंस सब्सिडी और निवेश योजनाओं का झांसा देते थे। ग्राहक जब रुचि दिखाते थे, तब उनकी कॉल यूएस की दो कंपनियों को फॉरवर्ड की जाती थी। इस प्रक्रिया के जरिये अमेरिकी ग्राहकों से पैसे हड़प लिए जाते थे। ठगी के रुपयों में कमीशन के तौर पर अमेरिका में बैठा मास्टरमाइंड कोलकाता में भेजा था। जिसके बाद उनका कमीशन अभिषेक पांडेय के एचडीएफसी बैंक अकाउंट में आते थे। इसके बाद सभी कॉलरों को सैलरी दी जाती थी। कॉलरों ने पुलिस को बताया कि उन्हें केवल नौकरी के लिए रखा गया था और वे अपने काम के अलावा किसी अन्य गतिविधि से अवगत नहीं थे।
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