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यूपी में चलती रहेगी प्रधानी: प्रधानों को प्रशासक बना भाजपा ने बिछाई चुनावी बिसात; सीएम योगी का मास्टर स्ट्रोक
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 26 May 2026 11:59 AM IST
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सार
उत्तर प्रदेश में प्रधानी चलती रहेगी। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाकर भाजपा ने चुनावी बिसात बिछाई है। 2027 के पहले योगी सरकार ने मास्टर स्ट्रोक खेला है। अफसरों की कारस्तानी समझ इस बार प्रधानों को जिम्मेदारी सौंप बड़ा दांव लगाया गया है।
UP Panchayat Election
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पंचायत चुनाव की लेटलतीफी के बीच भाजपा ने पहली बार प्रधानों को ही प्रशासक बनाकर चुनावी बिसात बिछा दी है। योगी सरकार के इस फैसले को चुनावी दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि सरकार का यह फैसला मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है क्योंकि इससे गांवों का विकास नहीं रुकेगा और धन का बंदरबांट भी थमेगा।
दरअसल, प्रदेश में पंचायत चुनाव समय में कराने में सरकार सफल नहीं हो पाई। इसके बाद से पंचायतों में प्रशासक की नियुक्ति की चर्चा चल रही थी। सरकार की ओर से पहले एडीओ पंचायत को प्रशासक के तौर पर नियुक्त करने की परंपरा रही थी। लेकिन वित्तीय वर्ष 2020-21 में सरकार ने एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया था पर सरकार के लिए अनुभव बेहद ही निराशाजनक रहा।
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दरअसल, प्रदेश में पंचायत चुनाव समय में कराने में सरकार सफल नहीं हो पाई। इसके बाद से पंचायतों में प्रशासक की नियुक्ति की चर्चा चल रही थी। सरकार की ओर से पहले एडीओ पंचायत को प्रशासक के तौर पर नियुक्त करने की परंपरा रही थी। लेकिन वित्तीय वर्ष 2020-21 में सरकार ने एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया था पर सरकार के लिए अनुभव बेहद ही निराशाजनक रहा।
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अफसरों की कारस्तानी को समझते हुए इस बार योगी सरकार ने छह माह के लिए गांव की जिम्मेदारी प्रधान को ही प्रशासक के रूप में सौंप दी। अब इस फैसले के राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार ने प्रधानों को साधकर बड़ा चुनावी दांव खेला है।
दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राजनीति विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं राजनीतिक विश्लेषक अमित मिश्रा कहते हैं, सरकार के इस फैसले का बहुत ही सकारात्मक असर गांवों में होगा। गांवों में चलने वाली योजनाओं की गति मिलेगी और बजट खर्च करने में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।
जनता में प्रधान की पकड़ सीधी होती है और वे जनता से ही चुनकर आते हैं इसलिए लोगों का भरोसा भी उन पर ज्यादा होता है। लिहाजा गांवों में सरकार के प्रति अगर कोई नाराजगी है तो वह भी दूर होगी।
भाजपा को मिल सकता है राजनीतिक लाभ
इसके उलट पिछली बार पर गौर करें तो बहुत सारी पंचायतों में धन का बंदरबांट हुआ और कई गांवों में आवंटित बजट खर्च ही नहीं हुआ। इससे नकारात्मक छवि बनी। लेकिन प्रशासक बने रहने के बाद प्रधान प्राथमिकता के तौर पर कार्यों को पूरा करा सकेंगे तो इसका सीधा राजनीतिक लाभ भाजपा को मिल सकता है।
इसके उलट पिछली बार पर गौर करें तो बहुत सारी पंचायतों में धन का बंदरबांट हुआ और कई गांवों में आवंटित बजट खर्च ही नहीं हुआ। इससे नकारात्मक छवि बनी। लेकिन प्रशासक बने रहने के बाद प्रधान प्राथमिकता के तौर पर कार्यों को पूरा करा सकेंगे तो इसका सीधा राजनीतिक लाभ भाजपा को मिल सकता है।
सत्यपाल सिंह, अध्यक्ष राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रधान से बेहतर काम कोई नहीं करा सकता
पंचायत चुनाव टलने की मूल वजह नौकरशाह हैं। पिछले चुनाव के पहले जब एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया गया था तो बड़े घोटाले हुए। गांव में प्रधान से बेहतर काम कोई नहीं करा सकता है। सरकार के फैसले से गांवों में सकारात्मक माहौल बनेगा। जो भी कमियां रह गई हैं उसे पूरा करने का मौका भी हमें मिलेगा।-सत्यपाल सिंह, अध्यक्ष राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन
पंचायत चुनाव टलने की मूल वजह नौकरशाह हैं। पिछले चुनाव के पहले जब एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया गया था तो बड़े घोटाले हुए। गांव में प्रधान से बेहतर काम कोई नहीं करा सकता है। सरकार के फैसले से गांवों में सकारात्मक माहौल बनेगा। जो भी कमियां रह गई हैं उसे पूरा करने का मौका भी हमें मिलेगा।-सत्यपाल सिंह, अध्यक्ष राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन
1294 ग्राम पंचायतों की कमान रहेगी प्रधान के ही हवाले
जिले में 1294 ग्राम पंचायतें हैं। इन पंचायतों में 26 मई को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद पंचायतों में चल रही विकास योजनाओं के प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा था। लेकिन सरकार के फैसले से प्रधान खुश हैं क्योंकि छह माह तक गांव की कमान उन्हीं के हाथों में रहेगी।
जिले में 1294 ग्राम पंचायतें हैं। इन पंचायतों में 26 मई को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद पंचायतों में चल रही विकास योजनाओं के प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा था। लेकिन सरकार के फैसले से प्रधान खुश हैं क्योंकि छह माह तक गांव की कमान उन्हीं के हाथों में रहेगी।
प्रमोद यादव, ग्राम प्रधान कल्याणपुर, विकास खंड भरोहिया
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बोले प्रधान
सरकार का यह फैसला जनकल्याणकारी है। इससे गांव के विकास कार्यों को और गति मिलेगी।अधूरे कार्य पूरे होंगे। आगे बजट की मांग की जा सकती है जिससे और भी योजनाओं को पूरा किया जा सकता है।-प्रमोद यादव, ग्राम प्रधान कल्याणपुर, विकास खंड भरोहिया
सरकार का यह फैसला जनकल्याणकारी है। इससे गांव के विकास कार्यों को और गति मिलेगी।अधूरे कार्य पूरे होंगे। आगे बजट की मांग की जा सकती है जिससे और भी योजनाओं को पूरा किया जा सकता है।-प्रमोद यादव, ग्राम प्रधान कल्याणपुर, विकास खंड भरोहिया
सिद्धू पासवान, ग्राम प्रधान गावां, विकास खंड भटहट
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मौजूदा सरकार में पंचायतों को सबसे अधिक धन आवंटित हुआ है और गांवों का विकास तेजी से हुआ है। गांव में अधूरे पड़े विकास कार्य पूरे किए जाएंगे। इससे पंचायतों को नई पहचान मिलेगी। सरकार के इस फैसले का स्वागत है।-सिद्धू पासवान, ग्राम प्रधान गावां, विकास खंड भटहट
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