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Gorakhpur News: चिड़ियाघर को कार्पस फंड में मिले 25 करोड़, होंगे विकास कार्य
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गोरखपुर। शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में विकास कार्यों के लिए शासन ने 25 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। यह धनराशि कार्पस फंड के तहत चिड़ियाघर सोसाइटी को मिलेगी। प्रशासन इस रकम की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) कराएगा। इससे मिलने वाले ब्याज से हर साल बाड़ों के निर्माण और वन्यजीवों के लिए जरूरी सुविधाओं पर खर्च किया जाएगा। जल्द ही धनराशि मिलने की उम्मीद है।
चिड़ियाघर की शुरुआत के समय कार्पस फंड के लिए 100 करोड़ रुपये मिलने थे। इसमें 50 करोड़ रुपये शासन और 50 करोड़ रुपये वन निगम को देने थे। शुरुआत में शासन की ओर से 25 करोड़ रुपये मिले थे जबकि वन निगम ने पांच करोड़ रुपये दिए थे। अब शासन ने दोबारा 25 करोड़ रुपये देने की स्वीकृति दी है। हालांकि, वन निगम की ओर से अभी 45 करोड़ रुपये मिलना बाकी है।
चिड़ियाघर की शुरुआत के समय यहां 387 वन्यजीव थे। अब इनकी संख्या बढ़कर करीब 450 हो गई है। वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के साथ उनके भोजन, देखभाल और रहने की व्यवस्था पर खर्च भी बढ़ा है। ऐसे में कार्पस फंड से मिलने वाला ब्याज विकास कार्यों के लिए नियमित आय का स्रोत बनेगा। चिड़ियाघर के उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि शासन से 25 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल गई है। धनराशि मिलने के बाद इसकी एफडी कराई जाएगी। ब्याज से चिड़ियाघर में बाड़ों के निर्माण और वन्यजीवों के लिए अन्य सुविधाएं विकसित करने जैसे काम कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि वन निगम से अभी 45 करोड़ रुपये मिलने बाकी हैं।
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चिड़ियाघर की शुरुआत के समय कार्पस फंड के लिए 100 करोड़ रुपये मिलने थे। इसमें 50 करोड़ रुपये शासन और 50 करोड़ रुपये वन निगम को देने थे। शुरुआत में शासन की ओर से 25 करोड़ रुपये मिले थे जबकि वन निगम ने पांच करोड़ रुपये दिए थे। अब शासन ने दोबारा 25 करोड़ रुपये देने की स्वीकृति दी है। हालांकि, वन निगम की ओर से अभी 45 करोड़ रुपये मिलना बाकी है।
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चिड़ियाघर की शुरुआत के समय यहां 387 वन्यजीव थे। अब इनकी संख्या बढ़कर करीब 450 हो गई है। वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के साथ उनके भोजन, देखभाल और रहने की व्यवस्था पर खर्च भी बढ़ा है। ऐसे में कार्पस फंड से मिलने वाला ब्याज विकास कार्यों के लिए नियमित आय का स्रोत बनेगा। चिड़ियाघर के उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि शासन से 25 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल गई है। धनराशि मिलने के बाद इसकी एफडी कराई जाएगी। ब्याज से चिड़ियाघर में बाड़ों के निर्माण और वन्यजीवों के लिए अन्य सुविधाएं विकसित करने जैसे काम कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि वन निगम से अभी 45 करोड़ रुपये मिलने बाकी हैं।
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