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Ambala News: कागजों में उलझे ब्रेस्ट हेल्थ डिवाइस
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अंबाला सिटी। महिलाओं के स्तन की जांच के लिए ब्रेस्ट हेल्थ डिवाइस स्वास्थ्य खरीद में स्वास्थ्य विभाग फंस गया है। जिले में सात ब्रेस्ट हेल्थ डिवाइस के लिए राज्य सभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने करीब 93.52 लाख रुपये की ग्रांट जारी की थी। ग्रांट जारी होने के बाद एक महीना बीत गया है मगर स्वास्थ्य विभाग तय ही नहीं कर पा रहा है कि मशीनों की खरीद किस प्रकार करें। इन मशीनों के लिए पत्राचार में एक महीना बीत गया है।
क्या है पूरा मामला
सांसद कार्तिकेय ने महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जनवरी माह में 93.52 लाख रुपये की ग्रांट जारी की थी। इस राशि से सात आधुनिक ब्रेस्ट हेल्थ डिवाइस खरीदे जाने हैं। इनमें से प्रत्येक मशीन को 13.36 लाख रुपये में खरीदना है।
इस मशीन की मदद से महिलाओं में शुरुआती चरणों में ही स्तन कैंसर का सटीक पता लगाया जा सकेगा। वर्तमान में कैंसर की देरी से पहचान होना उपचार में सबसे बड़ी बाधा है। सांसद की पहल का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही यह स्क्रीनिंग सुविधा उपलब्ध कराना था।
खरीदारी में तकनीकी बाधा और अधिकार क्षेत्र का पेच
मशीनों की खरीद न हो पाने के पीछे मुख्य कारण विभाग की वित्तीय सीमाएं हैं। दिशा समिति की बैठक में सांसद वरुण चौधरी ने जब समीक्षा में सीएमओ से जवाब मांगा। इस पर कार्यवाहक सीएमओ रेनू बेरी ने बताया कि उनके पास स्थानीय स्तर पर केवल 1 लाख रुपये तक की खरीद का अधिकार है। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जैम पोर्टल) के माध्यम से खरीदारी करने की सीमा भी अधिकतम 5 लाख रुपये तक ही सीमित है। एक ब्रेस्ट हेल्थ डिवाइस की कीमत लगभग 13 लाख रुपये है। कुल प्रोजेक्ट 93 लाख से ऊपर का है, इसलिए स्थानीय विभाग इसे खरीदने में तकनीकी रूप से असमर्थ है।
फाइलों में दबी अपील
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है। सीएमओ के अनुसार खरीदारी के लिए अधिकार न होने के कारण महानिदेशक स्वास्थ्य को पत्र लिखकर मार्गदर्शन और अनुमति मांगी गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि एक माह के भीतर सीएमओ की ओर से दो बार पत्र लिखे जाने के बावजूद निदेशालय से अभी तक कोई ठोस जवाब या मंजूरी नहीं मिली है।
महिलाओं के स्वास्थ्य पर असर
सांसद निधि से मिलने वाली इन सात मशीनों से उन हजारों महिलाओं को लाभ मिलना था, जो महंगी जांचों के अभाव में अस्पतालों के चक्कर काटती रहती हैं। यदि समय रहते इन मशीनों की खरीद नहीं होती है, तो कैंसर स्क्रीनिंग का यह महत्वपूर्ण अभियान फाइलों में ही दम तोड़ देगा।
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क्या है पूरा मामला
सांसद कार्तिकेय ने महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जनवरी माह में 93.52 लाख रुपये की ग्रांट जारी की थी। इस राशि से सात आधुनिक ब्रेस्ट हेल्थ डिवाइस खरीदे जाने हैं। इनमें से प्रत्येक मशीन को 13.36 लाख रुपये में खरीदना है।
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इस मशीन की मदद से महिलाओं में शुरुआती चरणों में ही स्तन कैंसर का सटीक पता लगाया जा सकेगा। वर्तमान में कैंसर की देरी से पहचान होना उपचार में सबसे बड़ी बाधा है। सांसद की पहल का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही यह स्क्रीनिंग सुविधा उपलब्ध कराना था।
खरीदारी में तकनीकी बाधा और अधिकार क्षेत्र का पेच
मशीनों की खरीद न हो पाने के पीछे मुख्य कारण विभाग की वित्तीय सीमाएं हैं। दिशा समिति की बैठक में सांसद वरुण चौधरी ने जब समीक्षा में सीएमओ से जवाब मांगा। इस पर कार्यवाहक सीएमओ रेनू बेरी ने बताया कि उनके पास स्थानीय स्तर पर केवल 1 लाख रुपये तक की खरीद का अधिकार है। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जैम पोर्टल) के माध्यम से खरीदारी करने की सीमा भी अधिकतम 5 लाख रुपये तक ही सीमित है। एक ब्रेस्ट हेल्थ डिवाइस की कीमत लगभग 13 लाख रुपये है। कुल प्रोजेक्ट 93 लाख से ऊपर का है, इसलिए स्थानीय विभाग इसे खरीदने में तकनीकी रूप से असमर्थ है।
फाइलों में दबी अपील
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है। सीएमओ के अनुसार खरीदारी के लिए अधिकार न होने के कारण महानिदेशक स्वास्थ्य को पत्र लिखकर मार्गदर्शन और अनुमति मांगी गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि एक माह के भीतर सीएमओ की ओर से दो बार पत्र लिखे जाने के बावजूद निदेशालय से अभी तक कोई ठोस जवाब या मंजूरी नहीं मिली है।
महिलाओं के स्वास्थ्य पर असर
सांसद निधि से मिलने वाली इन सात मशीनों से उन हजारों महिलाओं को लाभ मिलना था, जो महंगी जांचों के अभाव में अस्पतालों के चक्कर काटती रहती हैं। यदि समय रहते इन मशीनों की खरीद नहीं होती है, तो कैंसर स्क्रीनिंग का यह महत्वपूर्ण अभियान फाइलों में ही दम तोड़ देगा।