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Ambala News: चोरी के मामले में दो आरोपी बरी, सीसीटीवी में नहीं मिला पुख्ता सुबूत
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नारायणगढ़। अदालत ने घर में घुसकर चोरी करने और नकदी उड़ाने के मामले में दो आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी डॉ. जितेंद्र कुमार की अदालत ने सुनाया। राहुल और रवि के खिलाफ मौके पर मौजूदगी या बरामदगी का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला, इसलिए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। हालांकि इस मामले के मुख्य आरोपी सोनू को पहले ही उसकी स्वीकारोक्ति के आधार पर सजा सुनाई जा चुकी है।
शिकायतकर्ता राम रतन उर्फ रामू, निवासी पंजरेहरी ने 30 सितंबर 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। 27 सितंबर को उन्होंने मजदूरी भुगतान के लिए 50 हजार रुपये घर में रखे थे। 29 सितंबर को जब उनका पूरा परिवार कुरुक्षेत्र दवा लेने गया था। तब पीछे से अज्ञात चोरों ने ताला तोड़कर 50 हजार रुपये नकद, चांदी की पाजेब और सोने के गहने चोरी कर लिए।
पुलिस जांच में भी छूटी कई कमियां
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि राहुल और रवि को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। जांच अधिकारी ने अदालत में स्वीकार किया कि सीसीटीवी फुटेज में केवल मुख्य आरोपी सोनू ही नजर आ रहा है, जबकि राहुल और रवि फुटेज में कहीं नहीं दिखे। मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता राम रतन ने जिरह के दौरान स्वीकार किया कि उसने आरोपियों को चोरी करते हुए नहीं देखा था और न ही कोई शिनाख्त परेड कराई गई थी। पुलिस द्वारा की गई कथित बरामदगी के मेमो पर किसी भी स्वतंत्र गवाह के हस्ताक्षर नहीं थे। अदालत ने पाया कि चोरी किया गया सामान (केस प्रॉपर्टी) न तो अदालत में पेश किया गया और न ही उसे चोरी का माल साबित किया जा सका।
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शिकायतकर्ता राम रतन उर्फ रामू, निवासी पंजरेहरी ने 30 सितंबर 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। 27 सितंबर को उन्होंने मजदूरी भुगतान के लिए 50 हजार रुपये घर में रखे थे। 29 सितंबर को जब उनका पूरा परिवार कुरुक्षेत्र दवा लेने गया था। तब पीछे से अज्ञात चोरों ने ताला तोड़कर 50 हजार रुपये नकद, चांदी की पाजेब और सोने के गहने चोरी कर लिए।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि राहुल और रवि को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। जांच अधिकारी ने अदालत में स्वीकार किया कि सीसीटीवी फुटेज में केवल मुख्य आरोपी सोनू ही नजर आ रहा है, जबकि राहुल और रवि फुटेज में कहीं नहीं दिखे। मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता राम रतन ने जिरह के दौरान स्वीकार किया कि उसने आरोपियों को चोरी करते हुए नहीं देखा था और न ही कोई शिनाख्त परेड कराई गई थी। पुलिस द्वारा की गई कथित बरामदगी के मेमो पर किसी भी स्वतंत्र गवाह के हस्ताक्षर नहीं थे। अदालत ने पाया कि चोरी किया गया सामान (केस प्रॉपर्टी) न तो अदालत में पेश किया गया और न ही उसे चोरी का माल साबित किया जा सका।