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Ambala News: सेवानिवृत्ति की उम्र घटाने पर भड़के दिव्यांग
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अंबाला सिटी में नगराधीश को ज्ञापन सौंपते दिव्यांग। प्रवक्ता
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मुख्यमंत्री के नाम नगराधीश को सौंपा ज्ञापन, बोले- सरकार का यह कदम उनके अधिकारों का हनन
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। भारत सरकार की ओर से सिविल सेवा नियम 2016 के नियम 143 में किए गए संशोधन के खिलाफ दिव्यांगों ने रोष प्रकट किया। बुधवार को विकलांग संघ उमंग अंबाला के बैनर तले दिव्यांग कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपना था लेकिन किसी कारणवश उपायुक्त नहीं आए तो यह ज्ञापन नगराधीश अभिषेक गर्ग को सौंप दिया।
संघ के सदस्यों का कहना है कि सरकार की ओर से दिव्यांग कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष करना उनके अधिकारों का हनन है। दिव्यांग कर्मचारी पहले से शारीरिक और व्यावसायिक सीमाओं के बीच अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसे में उन्हें दी गई दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा आयु समान अवसर की संवैधानिक भावना के अनुरूप थी। इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि इससे दिव्यांगों को समाज में समानता का अधिकार मिलने में कठिनाई होगी। इस अवसर पर जसबीर सिंह, वीर सेन, वीर सिंह, श्यामलाल ने कहा कि यदि 58 के स्थान पर दोबारा 60 वर्ष की आयु निर्धारित नहीं की गई, तो वह अपने हक के लिए आगे तक जाएंगे।
सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा पर खतरा
ज्ञापन में बताया गया कि तीन फरवरी 2026 की गजट अधिसूचना के माध्यम से नियमों में जो बदलाव किए गए हैं। वह दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की मूल भावना के विपरीत हैं। सेवा आयु में अचानक कटौती से कर्मचारियों में असुरक्षा का भाव पैदा हुआ है। राज्य सरकार की स्थापित कल्याणकारी नीति से पीछे हटना सामाजिक न्याय के विरुद्ध है। आर्थिक अस्थिरता के कारण कर्मचारियों की कार्यक्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। भारत सरकार की ओर से सिविल सेवा नियम 2016 के नियम 143 में किए गए संशोधन के खिलाफ दिव्यांगों ने रोष प्रकट किया। बुधवार को विकलांग संघ उमंग अंबाला के बैनर तले दिव्यांग कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपना था लेकिन किसी कारणवश उपायुक्त नहीं आए तो यह ज्ञापन नगराधीश अभिषेक गर्ग को सौंप दिया।
संघ के सदस्यों का कहना है कि सरकार की ओर से दिव्यांग कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष करना उनके अधिकारों का हनन है। दिव्यांग कर्मचारी पहले से शारीरिक और व्यावसायिक सीमाओं के बीच अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसे में उन्हें दी गई दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा आयु समान अवसर की संवैधानिक भावना के अनुरूप थी। इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि इससे दिव्यांगों को समाज में समानता का अधिकार मिलने में कठिनाई होगी। इस अवसर पर जसबीर सिंह, वीर सेन, वीर सिंह, श्यामलाल ने कहा कि यदि 58 के स्थान पर दोबारा 60 वर्ष की आयु निर्धारित नहीं की गई, तो वह अपने हक के लिए आगे तक जाएंगे।
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सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा पर खतरा
ज्ञापन में बताया गया कि तीन फरवरी 2026 की गजट अधिसूचना के माध्यम से नियमों में जो बदलाव किए गए हैं। वह दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की मूल भावना के विपरीत हैं। सेवा आयु में अचानक कटौती से कर्मचारियों में असुरक्षा का भाव पैदा हुआ है। राज्य सरकार की स्थापित कल्याणकारी नीति से पीछे हटना सामाजिक न्याय के विरुद्ध है। आर्थिक अस्थिरता के कारण कर्मचारियों की कार्यक्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।