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Ambala News: बेटे की मौत के बाद कर्ज के बोझ तले दबा परिवार
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रिंकू सिंह। फाइल फोटो
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दुबई में हुए सड़क हादसे में मोहडी गांव के रिंकू सिंह की चली गई थी जान
संवाद न्यूज एजेंसी
जलबेड़ा। रोजगार की तलाश में सात समंदर पार दुबई गए मोदी गांव के 30 वर्षीय युवक रिंकू सिंह की सड़क हादसे में मौत हो गई। उनकी मौत की खबर के बाद से जहां गांव में मातम पसरा है, वहीं मृतक का परिवार कर्ज के बोझ तले दब गया है। 11 महीने पहले विदेश गए रिंकू का 5 दिन पूर्व ही गांव में अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने 7 लाख रुपये का कर्ज लेकर उन्हें विदेश भेजा था।
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, रिंकू सिंह दुबई में ट्रक चालक के रूप में कार्यरत थे। ड्यूटी के दौरान अचानक ट्रक का अगला टायर फटने से वाहन अनियंत्रित हो गया और मौके पर ही रिंकू की जान चली गई। मृतक के चचेरे भाई गुरमीत सिंह ने बताया कि रिंकू अपने माता-पिता का सहारा थे। घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए परिजनों ने 7 लाख रुपये का कर्ज लेकर उन्हें विदेश भेजा था।
प्रमाण पत्र के लिए लगा रहे चक्कर
बेटे की मौत ने बुजुर्ग माता-पिता को झकझोर कर रख दिया है। दुख की इस घड़ी में अब सरकारी कागजी कार्रवाई उनके लिए नई मुसीबत बन गई है। साथ लगते माजरी अस्पताल में उन्हें बताया गया कि उसका मृत्यु प्रमाणपत्र यहां नहीं बनेगा। प्रमाणपत्र के अभाव में बीमा क्लेम और अन्य सरकारी सहायता की प्रक्रिया रुकी हुई है। ग्रामीणों ने गरीब की मदद के लिए मन बना लिया है कि वह जल्द ही प्रशासन से मिलकर पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए जल्द से जल्द मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवाएंगे। ताकि उन्हें उचित मुआवजा दिलवाया जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जलबेड़ा। रोजगार की तलाश में सात समंदर पार दुबई गए मोदी गांव के 30 वर्षीय युवक रिंकू सिंह की सड़क हादसे में मौत हो गई। उनकी मौत की खबर के बाद से जहां गांव में मातम पसरा है, वहीं मृतक का परिवार कर्ज के बोझ तले दब गया है। 11 महीने पहले विदेश गए रिंकू का 5 दिन पूर्व ही गांव में अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने 7 लाख रुपये का कर्ज लेकर उन्हें विदेश भेजा था।
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, रिंकू सिंह दुबई में ट्रक चालक के रूप में कार्यरत थे। ड्यूटी के दौरान अचानक ट्रक का अगला टायर फटने से वाहन अनियंत्रित हो गया और मौके पर ही रिंकू की जान चली गई। मृतक के चचेरे भाई गुरमीत सिंह ने बताया कि रिंकू अपने माता-पिता का सहारा थे। घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए परिजनों ने 7 लाख रुपये का कर्ज लेकर उन्हें विदेश भेजा था।
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प्रमाण पत्र के लिए लगा रहे चक्कर
बेटे की मौत ने बुजुर्ग माता-पिता को झकझोर कर रख दिया है। दुख की इस घड़ी में अब सरकारी कागजी कार्रवाई उनके लिए नई मुसीबत बन गई है। साथ लगते माजरी अस्पताल में उन्हें बताया गया कि उसका मृत्यु प्रमाणपत्र यहां नहीं बनेगा। प्रमाणपत्र के अभाव में बीमा क्लेम और अन्य सरकारी सहायता की प्रक्रिया रुकी हुई है। ग्रामीणों ने गरीब की मदद के लिए मन बना लिया है कि वह जल्द ही प्रशासन से मिलकर पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए जल्द से जल्द मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवाएंगे। ताकि उन्हें उचित मुआवजा दिलवाया जाए।