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Ambala News: निजी स्कूलों पर भारी झाड़ूमाजरा का सरकारी स्कूल, अधिकारी भी रह गईं दंग
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गांव झाडूूमाजरा के सरकारी स्कूल में फव्वारा देखतीं डीईईओ। स्कूल
- फोटो : nowshera news
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बराड़ा। सरकारी स्कूलों की छवि अक्सर जर्जर इमारतों और सुविधाओं के अभाव वाली होती है, लेकिन अंबाला के गांव झाड़ूमाजरा के सरकारी मिडल स्कूल ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। मुख्यमंत्री सौंदर्यीकरण योजना में जिला स्तर पर प्रथम स्थान पाने वाले इस स्कूल का गुरुवार को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ज्योति सभ्रवाल ने औचक निरीक्षण किया। स्कूल की व्यवस्थाएं देख वह इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने इसे प्रदेश के लिए एक मॉडल करार दिया।
उच्च विद्यालय की मान्यता पर दिया जोर
निरीक्षण के दौरान ज्योति सभ्रवाल ने स्कूल की इमारत, कंप्यूटर रूम, लाइब्रेरी और मिड-डे मील रसोई का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इस स्कूल का सौंदर्यीकरण और बच्चों को दी जा रही सुविधाएं काफी अच्छी हैं। यह स्कूल सिर्फ जिले का नहीं, बल्कि प्रदेश का गौरव है। उन्होंने स्कूल की मान्यता बढ़ाकर इसे उच्च विद्यालय बनाने की जरूरत पर भी बल दिया ताकि अधिक बच्चे लाभान्वित हो सकें।
कबाड़ से कमाल तक का सफर
हेडमास्टर प्रदीप कुमार ने बताया कि जब उनका तबादला यहां हुआ, तब स्कूल परिसर झाड़ियों से भरा और ऊबड़-खाबड़ था। उन्होंने स्टाफ और ग्रामीणों के सहयोग से कायाकल्प शुरू किया। आज स्कूल का प्रांगण किसी आलीशान प्राइवेट स्कूल जैसा दिखता है। यह स्कूल 2017 में जिला स्तर पर प्रथम, सक्षम योजना में प्रदेश में प्रथम और अब 2025-26 की सौंदर्यीकरण योजना में भी जिले में अव्वल रहा है।
थाली में परोसा जा रहा शुद्ध भोजन
स्कूल की सबसे बड़ी विशेषता यहां का किचन गार्डन है। हेडमास्टर के अनुसार स्कूल में केंचुआ खाद तैयार कर ब्रोकली, शिमला मिर्च, साग और मटर जैसी कई सब्जियां उगाई जा रही हैं। मिड-डे मील में बच्चों को यही कीटनाशक मुक्त सब्जियां परोसी जाती हैं। समाजसेवी गुरयाम सिंह ने भी ग्रामीणों से अपील की कि वे सरकारी स्कूलों की मदद के लिए आगे आएं।
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उच्च विद्यालय की मान्यता पर दिया जोर
निरीक्षण के दौरान ज्योति सभ्रवाल ने स्कूल की इमारत, कंप्यूटर रूम, लाइब्रेरी और मिड-डे मील रसोई का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इस स्कूल का सौंदर्यीकरण और बच्चों को दी जा रही सुविधाएं काफी अच्छी हैं। यह स्कूल सिर्फ जिले का नहीं, बल्कि प्रदेश का गौरव है। उन्होंने स्कूल की मान्यता बढ़ाकर इसे उच्च विद्यालय बनाने की जरूरत पर भी बल दिया ताकि अधिक बच्चे लाभान्वित हो सकें।
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कबाड़ से कमाल तक का सफर
हेडमास्टर प्रदीप कुमार ने बताया कि जब उनका तबादला यहां हुआ, तब स्कूल परिसर झाड़ियों से भरा और ऊबड़-खाबड़ था। उन्होंने स्टाफ और ग्रामीणों के सहयोग से कायाकल्प शुरू किया। आज स्कूल का प्रांगण किसी आलीशान प्राइवेट स्कूल जैसा दिखता है। यह स्कूल 2017 में जिला स्तर पर प्रथम, सक्षम योजना में प्रदेश में प्रथम और अब 2025-26 की सौंदर्यीकरण योजना में भी जिले में अव्वल रहा है।
थाली में परोसा जा रहा शुद्ध भोजन
स्कूल की सबसे बड़ी विशेषता यहां का किचन गार्डन है। हेडमास्टर के अनुसार स्कूल में केंचुआ खाद तैयार कर ब्रोकली, शिमला मिर्च, साग और मटर जैसी कई सब्जियां उगाई जा रही हैं। मिड-डे मील में बच्चों को यही कीटनाशक मुक्त सब्जियां परोसी जाती हैं। समाजसेवी गुरयाम सिंह ने भी ग्रामीणों से अपील की कि वे सरकारी स्कूलों की मदद के लिए आगे आएं।