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Ambala News: अधिवक्ताओं की हड़ताल से 2300 से अधिक मामले लंबित
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अंबाला सिटी में बार के परिसर में भूख हड़ताल पर बैठे अधिवक्ता।संवाद
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आज भी जारी रहेगी भूख हड़ताल, हाईकोर्ट में बैठक पर रहेगी नजर
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के विरोध में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के वकीलों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। वकीलों की भूख हड़ताल बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रही जिसका व्यापक असर अंबाला शहर बार एसोसिएशन में देखने को मिला। यहां अधिवक्ताओं ने नई व्यवस्था के खिलाफ जमकर रोष जताया और भूख हड़ताल जारी रखी।
इस हड़ताल के कारण 2300 से अधिक मामले 26 कोर्ट में लंबित हो गए हैं। कुछ अधिवक्ता कम समय चैंबरों में दिख रहे हैं। इसके साथ ही न्यायिक परिसर में टाइपराइटरों के लिए रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बुधवार को अधिवक्ता अखिल गुप्ता, राजेंद्र कुमार, बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अरबिंद गोयल, कविता आहलूवालिया और अभिलाष सांकेतिक भूख हड़ताल पर बैठे।
वकीलों का कहना है कि नई व्यवस्था से न केवल कानून और न्याय प्रणाली में अनियमिताएं बढ़ रही हैं बल्कि युवा और आम वकीलों का कामकाज भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। वकीलों ने साफ किया कि वे मुफ्त कानूनी सहायता के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन नई व्यवस्था में जिस तरह चुनिंदा सरकारी वकील नियुक्त किए जा रहे हैं, वह प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी नहीं है।
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जेलों पर भी बढ़ रहा दबाव
न्यायिक कार्य बंद होने के कारण जमानत के कार्य भी रुक गए हैं। ऐसे में जेलों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। लोगों को जमानत कराने के लिए वकील नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में लोगों अब न्यायालय के चक्कर काटना भी कम कर दिया है। बुधवार को कोर्ट परिसर में कम ही लोग दिखाई दिए।
अधिवक्ता बोले-
स्वतंत्र वकालत ही न्याय प्रणाली की नींव है। यदि शिकायतकर्ता, पुलिस और बचाव पक्ष तीनों स्तरों पर सरकार की ही भूमिका होगी, तो पीड़ित को निष्पक्ष न्याय मिलना असंभव है। इसके अलावा बिना शर्त दी जा रही राहत से अपराध बढ़ने की आशंका है।
— विकास शर्मा, सचिव, अंबाला बार एसोसिएशन
पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की विभिन्न बार एसोसिएशनों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर यह चरणबद्ध प्रदर्शन चल रहा है। इस गतिरोध को सुलझाने के लिए वीरवार को हाईकोर्ट में एक अहम बैठक बुलाई गई है। वीरवार को भी भूख हड़ताल जारी रहेगी। जब तक सुप्रीम कोर्ट की कमेटी और हाईकोर्ट स्तर पर चल रही बातचीत में कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।
- सतपाल सिंह, प्रधान, अंबाला बार एसोसिएशन
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के विरोध में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के वकीलों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। वकीलों की भूख हड़ताल बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रही जिसका व्यापक असर अंबाला शहर बार एसोसिएशन में देखने को मिला। यहां अधिवक्ताओं ने नई व्यवस्था के खिलाफ जमकर रोष जताया और भूख हड़ताल जारी रखी।
इस हड़ताल के कारण 2300 से अधिक मामले 26 कोर्ट में लंबित हो गए हैं। कुछ अधिवक्ता कम समय चैंबरों में दिख रहे हैं। इसके साथ ही न्यायिक परिसर में टाइपराइटरों के लिए रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बुधवार को अधिवक्ता अखिल गुप्ता, राजेंद्र कुमार, बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अरबिंद गोयल, कविता आहलूवालिया और अभिलाष सांकेतिक भूख हड़ताल पर बैठे।
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वकीलों का कहना है कि नई व्यवस्था से न केवल कानून और न्याय प्रणाली में अनियमिताएं बढ़ रही हैं बल्कि युवा और आम वकीलों का कामकाज भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। वकीलों ने साफ किया कि वे मुफ्त कानूनी सहायता के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन नई व्यवस्था में जिस तरह चुनिंदा सरकारी वकील नियुक्त किए जा रहे हैं, वह प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी नहीं है।
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जेलों पर भी बढ़ रहा दबाव
न्यायिक कार्य बंद होने के कारण जमानत के कार्य भी रुक गए हैं। ऐसे में जेलों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। लोगों को जमानत कराने के लिए वकील नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में लोगों अब न्यायालय के चक्कर काटना भी कम कर दिया है। बुधवार को कोर्ट परिसर में कम ही लोग दिखाई दिए।
अधिवक्ता बोले-
स्वतंत्र वकालत ही न्याय प्रणाली की नींव है। यदि शिकायतकर्ता, पुलिस और बचाव पक्ष तीनों स्तरों पर सरकार की ही भूमिका होगी, तो पीड़ित को निष्पक्ष न्याय मिलना असंभव है। इसके अलावा बिना शर्त दी जा रही राहत से अपराध बढ़ने की आशंका है।
— विकास शर्मा, सचिव, अंबाला बार एसोसिएशन
पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की विभिन्न बार एसोसिएशनों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर यह चरणबद्ध प्रदर्शन चल रहा है। इस गतिरोध को सुलझाने के लिए वीरवार को हाईकोर्ट में एक अहम बैठक बुलाई गई है। वीरवार को भी भूख हड़ताल जारी रहेगी। जब तक सुप्रीम कोर्ट की कमेटी और हाईकोर्ट स्तर पर चल रही बातचीत में कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।
- सतपाल सिंह, प्रधान, अंबाला बार एसोसिएशन