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Ambala News: साहब, 10 साल से भटक रहा हूं... झूठी प्राथमिकी नहीं हुई खत्म

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jun 2026 02:51 AM IST
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Sir, I have been running from pillar to post for 10 years... the false FIR has not been quashed.
साहब, 10 साल से भटक रहा हूं... झूठी प्राथमिकी नहीं हुई खत्म - फोटो : साहब, 10 साल से भटक रहा हूं... झूठी प्राथमिकी नहीं हुई खत्म
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- कैंट निवासी शिकायतकर्ता नवीन आनंद ने एसीबी महानिदेशक के सामने सुनाया दुखड़ा, तलब किया रिकॉर्ड

माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। साहब, 100 गज के प्लाॅट को हथियाने का झूठा मुकदमा खत्म कराने के लिए 10 साल से अधिकारियों के चक्कर काट रहा हूं लेकिन अब तक निराशा ही हाथ लगी है। इस बार भी कार्रवाई नहीं हुई तो फिर किस के पास जाएं। यह बात कैंट निवासी शिकायतकर्ता नवीन आनंद ने महानिदेशक (डीजी) अर्शिंदर सिंह चावला से कही। नवीन ने अंबाला सतर्कता ब्यूरो की कमियों को बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार पर दर्ज झूठे मुकदमे के खिलाफ मुख्य सचिव को भेजी गई शिकायत और हाईकोर्ट के आदेश को अधिकारियों ने लेकर रिकॉर्ड से गायब कर दिया।
वहीं, उपायुक्त द्वारा जाली रजिस्ट्रियां रद्द करने के बावजूद इंस्पेक्टर और अन्य अधिकारियों ने गलत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी। प्रार्थी ने इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच करवाने, दोषियों पर कार्रवाई तथा नया मुकदमा दर्ज करने की मांग की। डीजी ने केस की समयवार जानकारी तलब की है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के महानिदेशक बुधवार को सेक्टर 10 स्थित एसीबी के कार्यालय पहुंचे। यहां लोगों की उन्होंने शिकायत सुनी। इसके साथ ही विभागीय कार्यों की समीक्षा की।
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केस 1-
खाद्य आपूर्ति विभाग के गोदाम की कराई जाए जांच

शिकायतकर्ता करनाल के खराजपुर निवासी विकास शर्मा ने बताया कि उनकी शिकायत पर 12 मई को विजिलेंस अंबाला ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, कुंजपुरा में छापा मारा था। वहां एसआई एफएस मनीष कुमार को 15,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था। इस मामले में एएफएसओ राजीव कुमार के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज हुई थी। आरोप है कि राजीव कुमार को अब तक गिरफ्तार या निलंबित नहीं किया गया है और वह करनाल में नौकरी कर रहे हैं। वह अपनी ऊंची पहुंच की धौंस दे रहे हैं। डीजी ने शिकायतकर्ता से संबंधित अधिकारी की संलिप्ता को जाहिर करने वाले सबूत मांगे। इस पर शिकायतकर्ता ने बताया कि अधिकारी ने विभाग में ज्वाइनिंग से पहले ही ग्रुप में चेकिंग का संदेश डलवा दिया था। इसके साक्ष्य लिए गए हैं। वहीं शिकायतकर्ता ने बताया कि इस खाद्य आपूर्ति विभाग में इतनी गड़बड़ी है कि आज भी एसीबी के अधिकारी जांच कर लें तो खाद्यान्न के कट्टे गोदाम में काफी कम मिलेंगे।
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केस 2-------
कोर्ट का फैसला आया, ड्यूटी नहीं मिली

यह शिकायत सिविल रिट पिटीशन 1826/2026 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा 23 जनवरी को पारित आदेश के अनुपालन के संबंध में थी। इसमें प्रार्थी घरौंडा निवासी जितेंद्र वर्मा ने बताया कि तत्कालीन आदेश के पत्र के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसका फैसला उनके हक में आया है। प्रार्थी ने महानिदेशक से प्रार्थना की है कि उच्च न्यायालय के आदेशानुसार उनका डेटा होमगार्ड रोस्टर पर जल्द से जल्द अपलोड करके उन्हें दोबारा ड्यूटी प्रदान करने की कृपा करें। इस शिकायत को उचित कार्यवाही के लिए रख लिया गया।

केस 3----
फाइल तैयार कराई, वर्दी भी सिलवाई मगर ड्यूटी नहीं दी

कुरुक्षेत्र के बारना निवासी राजकुमार ने बताया कि डीजी के आदेशानुसार उन्हें 19 मई 2025 को कुरुक्षेत्र होमगार्ड ऑफिस बुलाकर उनकी भर्ती फाइल तैयार करवाई गई, बैंक खाता खुलवाया गया और वर्दी भी सिलवा दी गई थी। उन्होंने पहले 2014 से 2016 तक पूरी निष्ठा से चुनाव और कानून व्यवस्था की ड्यूटी की थी लेकिन बाद में उनकी ड्यूटी रोक दी गई। प्रार्थी ने निवेदन किया है कि उनकी भर्ती फाइल और पहले के आदेशों को ध्यान में रखते हुए, उन्हें पुराने भर्ती नियमों के तहत रोस्टर में शामिल कर पुनः ड्यूटी दी जाए। इस मामले पर डीजी चावला ने सरकार के संज्ञान में लाने की बात कही है।
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केस 4------
बेटा बरसाती पानी में डूब गया, अफसरों ने मुआवजे की फाइल गुम कर दी

शिकायतकर्ता नहोनी निवासी सुभाष चंद्र का पुत्र अजय थुआ 13 अगस्त 2024 को मारकंडा नदी (मुलाना) गया था, जहां अचानक बरसाती पानी आने के कारण वह डूब गया। पीड़ित पिता अपने बेटे के मुआवजे के लिए 22 महीनों से एसडीएम बराड़ा और तहसीलदार मुलाना के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। लापरवाही के कारण उनके बेटे के मुआवजे की फाइल दोनों दफ्तरों के बीच कहीं गुम हो गई है। उन्होंने 12 अप्रैल 2026 को दोबारा नई फाइल भी लगाई लेकिन अब फिर दो महीनों से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। डीजी एसीबी ने कहा कि यह एसीबी से संबंधित मामला नहीं है फिर भी वह फाइल गुम होने को लेकर विभाग से जानकारी लेंगे।

एसीबी के महानिदेशक से सीधी बात-
प्रश्न : अंबाला में आकर शिकायत सुनी गईं, ऐसा पहली बार हुआ।

डीजी : अंबाला में आने का मकसद दो तरफा था। पहला तो कर्मचारियों को दिए जाने वाले लक्ष्य की समीक्षा थी तो दूसरा कारण था कि कुछ लोग उम्र या दूसरे कारण से एसीबी के मुख्यालय तक नहीं पहुंच पाते हैं तो उनकी शिकायत सुनी जाए।

प्रश्न : लोग भ्रष्टाचार की जानकारी देना चाहते हैं मगर शिकायत में पार्टी नहीं बनना चाहते।

डीजी : हम एक एप भी बना रहे हैं। इसमें जनसामान्य लोग हेल्पलाइन नंबर या वीडियो अपलोड कर भ्रष्टाचार की जानकारी दे सकता है। इसमें शिकायतकर्ता सिर्फ गुप्त सूचना वाहक बन सकता है।

प्रश्न : एसीबी में जांच काफी लंबी चलती रहती है, इसमें तेजी लाने के लिए क्या किया जा रहा है।

डीजी : जांच में देरी हो रही है, इस बात को हम मानते हैं। उसका प्रमुख कारण कई स्थानों पर पर्याप्त जांच अधिकारी नहीं हैं। सरकार से मांग की है कि हमें अधिकारी दिए जाएं।
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