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Ambala News: पीडब्ल्यूडी ने नई निविदा निकाली तो पुराने ठेकेदार ने ली ईआईसी की शरण
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टीबी अस्पताल का अधूरा निर्माण। संवाद
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अंबाला सिटी। अंबाला शहर में बनने वाले 100 बेड के स्टेट टीबी और छाती रोग संस्थान के बचे हुए निर्माण कार्य को जल्द पूरा किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग ने इस अधूरे काम को पूरा करने के लिए 15 जून को ऑनलाइन निविदाएं आमंत्रित की हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 24.58 करोड़ रुपये आंकी गई है।
विभाग ने काम पूरा करने के लिए 24 महीने की समय सीमा तय की है। वहीं दूसरी तरफ टीबी अस्पताल को बनाने वाले पुराने ठेकेदार ने विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पुराने ठेके को मनमाने तरीके से रद्द का आरोप लगाते हुए विभाग के चंडीगढ़ स्थित मुख्य अभियंता को साक्ष्यों सहित शिकायत की है।
मुख्य अभियंता ने अधिकारियों को मामले को देखने के निर्देश दिए हैं। जबकि इस निर्देश से एक दिन पहले ही विभाग ने आनन-फानन में बचे हुए कार्य की निविदा लगा दी। ऐसे में अब यह विवाद कोर्ट में जा सकता है।
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जनवरी 2026 में लोक निर्माण विभाग द्वारा ठेका रद्द किए जाने के बाद, संबंधित निर्माण एजेंसी श्री रामजी दास बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड ने विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ को एक विस्तृत पत्र भेजकर अपना पक्ष रखा है। एजेंसी ने साफ कहा है कि परियोजना में हुई देरी के लिए सिर्फ वे अकेले जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि विभाग की ढिलाई और नियमों के उल्लंघन ने भी काम की रफ्तार पर ब्रेक लगाया।
ठेकेदार धर्मेश सूद ने बताया कि उनकी कंपनी को काम का अलॉटमेंट 18 अगस्त 2023 को हुआ था। लेकिन साइट पर एक पुरानी बिल्डिंग खड़ी थी, जिसे खाली कराकर गिराया जाना था। संबंधित विभाग ने नवंबर 2023 में बिल्डिंग खाली की, जिससे शुरुआत में ही करीब 3 महीने की देरी हो गई। साइट पर मौजूद पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग से मंजूरी मिलने में लंबा समय लगा। 15 फरवरी 2024 को वन विभाग से क्लीयरेंस मिलने के बाद ही पेड़ हटाए जा सके, जिससे अगले 3 महीने का काम प्रभावित हुआ। अनुबंध के नियम 21.1 के तहत विभाग को शुरुआत में कम से कम 75 प्रतिशत बाधा-मुक्त साइट देनी थी, जो नहीं दी गई। ब्यूरो
विभाग ने काम पूरा करने के लिए 24 महीने की समय सीमा तय की है। वहीं दूसरी तरफ टीबी अस्पताल को बनाने वाले पुराने ठेकेदार ने विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पुराने ठेके को मनमाने तरीके से रद्द का आरोप लगाते हुए विभाग के चंडीगढ़ स्थित मुख्य अभियंता को साक्ष्यों सहित शिकायत की है।
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मुख्य अभियंता ने अधिकारियों को मामले को देखने के निर्देश दिए हैं। जबकि इस निर्देश से एक दिन पहले ही विभाग ने आनन-फानन में बचे हुए कार्य की निविदा लगा दी। ऐसे में अब यह विवाद कोर्ट में जा सकता है।
जनवरी 2026 में लोक निर्माण विभाग द्वारा ठेका रद्द किए जाने के बाद, संबंधित निर्माण एजेंसी श्री रामजी दास बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड ने विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ को एक विस्तृत पत्र भेजकर अपना पक्ष रखा है। एजेंसी ने साफ कहा है कि परियोजना में हुई देरी के लिए सिर्फ वे अकेले जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि विभाग की ढिलाई और नियमों के उल्लंघन ने भी काम की रफ्तार पर ब्रेक लगाया।
ठेकेदार धर्मेश सूद ने बताया कि उनकी कंपनी को काम का अलॉटमेंट 18 अगस्त 2023 को हुआ था। लेकिन साइट पर एक पुरानी बिल्डिंग खड़ी थी, जिसे खाली कराकर गिराया जाना था। संबंधित विभाग ने नवंबर 2023 में बिल्डिंग खाली की, जिससे शुरुआत में ही करीब 3 महीने की देरी हो गई। साइट पर मौजूद पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग से मंजूरी मिलने में लंबा समय लगा। 15 फरवरी 2024 को वन विभाग से क्लीयरेंस मिलने के बाद ही पेड़ हटाए जा सके, जिससे अगले 3 महीने का काम प्रभावित हुआ। अनुबंध के नियम 21.1 के तहत विभाग को शुरुआत में कम से कम 75 प्रतिशत बाधा-मुक्त साइट देनी थी, जो नहीं दी गई। ब्यूरो