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Bhiwani News: निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
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हांसी रोड स्थित एससी कार्यालय में धरना पर बैठे बिजली कर्मचारी।
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भिवानी। हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड वर्कर्स यूनियन, हेड ऑफिस संबद्ध हरियाणा कर्मचारी महासंघ के केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर मंगलवार को सर्कल स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया गया। इसी कड़ी में भिवानी में कर्मचारियों ने हांसी रोड स्थित एससी कार्यालय पर धरना देकर सरकार की निजीकरण और दमनकारी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन की अध्यक्षता यूनियन के सर्कल सचिव मनोज बल्लू बामला ने की जबकि मंच संचालन सिटी यूनिट के सचिव राजकुमार जटासरा ने किया।
इस दौरान यूनियन के सह सचिव राकेश बलौदा ने भी कर्मचारियों को संबोधित किया। मनोज बल्लू बामला ने कहा कि सरकार सुनियोजित तरीके से पूरे बिजली बोर्ड को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजीकरण और दमनकारी नीतियां न केवल कर्मचारियों के हितों पर चोट करेंगी बल्कि आम जनता को भी प्रभावित करेंगी। उनका कहना था कि यदि बिजली क्षेत्र का निजीकरण इसी तरह जारी रहा तो भविष्य में उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का सामना करना पड़ेगा। सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए जनता के इस बुनियादी अधिकार का सौदा कर रही है जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मनोज बल्लू बामला, राकेश बलौदा, राजकुमार जटासरा और सोमबीर श्योराण ने सरकार की नई एक्सग्रेशिया पॉलिसी का विरोध करते हुए कहा कि सरकार ने शर्त लगा दी है कि जिन कर्मचारियों की सेवा पांच वर्ष से कम है अथवा जिनकी आयु 52 वर्ष से अधिक है, उनके निधन की स्थिति में आश्रितों को एक्सग्रेशिया का लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने इस नीति को तुरंत रद्द करने की मांग की।
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उन्होंने कहा कि यूनियन की 14 सूत्री मांगें हैं। कर्मचारी इन मांगों को लेकर कई बार शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के समक्ष अपनी बात रख चुके हैं लेकिन सरकार हर बार मामले को टाल देती है। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों का सब्र टूट चुका है। यूनियन नेताओं ने घोषणा की कि यदि सरकार ने जल्द सम्मानजनक वार्ता के लिए नहीं बुलाया तो आंदोलन के अगले चरण में दो जुलाई को अंबाला में कैबिनेट मंत्री अनिल विज के आवास का घेराव किया जाएगा।
इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो 29 और 30 सितंबर को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने या अन्य परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की होगी। इस अवसर पर संदीप जेवली, नरेंद्र कस्वां, रमेश यादव, मोंटी कुमार, रामपाल संडवा, प्रवीण झोझू और सुनील बेरला मौजूद रहे।
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इस दौरान यूनियन के सह सचिव राकेश बलौदा ने भी कर्मचारियों को संबोधित किया। मनोज बल्लू बामला ने कहा कि सरकार सुनियोजित तरीके से पूरे बिजली बोर्ड को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजीकरण और दमनकारी नीतियां न केवल कर्मचारियों के हितों पर चोट करेंगी बल्कि आम जनता को भी प्रभावित करेंगी। उनका कहना था कि यदि बिजली क्षेत्र का निजीकरण इसी तरह जारी रहा तो भविष्य में उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का सामना करना पड़ेगा। सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए जनता के इस बुनियादी अधिकार का सौदा कर रही है जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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मनोज बल्लू बामला, राकेश बलौदा, राजकुमार जटासरा और सोमबीर श्योराण ने सरकार की नई एक्सग्रेशिया पॉलिसी का विरोध करते हुए कहा कि सरकार ने शर्त लगा दी है कि जिन कर्मचारियों की सेवा पांच वर्ष से कम है अथवा जिनकी आयु 52 वर्ष से अधिक है, उनके निधन की स्थिति में आश्रितों को एक्सग्रेशिया का लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने इस नीति को तुरंत रद्द करने की मांग की।
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उन्होंने कहा कि यूनियन की 14 सूत्री मांगें हैं। कर्मचारी इन मांगों को लेकर कई बार शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के समक्ष अपनी बात रख चुके हैं लेकिन सरकार हर बार मामले को टाल देती है। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों का सब्र टूट चुका है। यूनियन नेताओं ने घोषणा की कि यदि सरकार ने जल्द सम्मानजनक वार्ता के लिए नहीं बुलाया तो आंदोलन के अगले चरण में दो जुलाई को अंबाला में कैबिनेट मंत्री अनिल विज के आवास का घेराव किया जाएगा।
इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो 29 और 30 सितंबर को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने या अन्य परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की होगी। इस अवसर पर संदीप जेवली, नरेंद्र कस्वां, रमेश यादव, मोंटी कुमार, रामपाल संडवा, प्रवीण झोझू और सुनील बेरला मौजूद रहे।