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Bhiwani News: हाई टेंशन लाइनों के मुआवजे पर किसानों ने जताया रोष
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बैठक में मौजूद भारतीय किसान कामगार अधिकार मोर्चा के सदस्य व अन्य।
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बवानीखेड़ा। बिजली की हाई टेंशन लाइनों के लिए तय किए गए मुआवजे को लेकर किसानों में रोष है। इसी को लेकर भारतीय किसान कामगार अधिकार मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतेंद्र लोहचब की अध्यक्षता में किसानों की बैठक हुई जिसमें मार्केट मूल्य कम तय करने का आरोप लगाते हुए विरोध जताया गया।
बैठक में किसानों ने बताया कि बलियाली, जाटू लोहारी और सुमड़ाखेड़ा गांवों के लिए प्रशासन द्वारा तय किए गए बाजार मूल्य खेतों की वास्तविक कीमत के एक चौथाई के बराबर भी नहीं हैं। एक ही गांव में 4 से 5 तरह की कीमतें निर्धारित की गई हैं और खंभों तथा तारों के नीचे की जमीन के मूल्य में भी अंतर रखा गया है जो हरियाणा के किसी भी जिले में नहीं हुआ है। किसानों ने इन तीनों गांवों के लिए तय किए गए मूल्य को अस्वीकार कर दिया है।
किसानों ने बताया कि धनाना, मंढाना और बडेसरा गांवों के लिए जिला प्रशासन 22 अप्रैल को बाजार मूल्य तय करना चाहता है लेकिन उन्हें आशंका है कि वहां भी कीमत कम रखी जाएगी। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उन्हें वास्तविक मार्केट मूल्य के अनुसार मुआवजा नहीं दिया गया तो वे अपने खेतों में पावर ग्रिड को काम नहीं करने देंगे।
बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष सतेंद्र लोहचब के साथ रमेश, सोमबीर, रामेहर, गौरव और महेंद्र ने कहा कि जिले की मार्केट रेट कमेटी के अध्ययन से प्रतीत होता है कि या तो पावर ग्रिड ने जिला प्रशासन को गुमराह किया है या फिर प्रशासन और पावर ग्रिड के बीच मिलीभगत से किसानों को उनके वास्तविक हक से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मार्केट रेट कमेटी के चेयरमैन द्वारा किसानों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दे दी गई है। यदि जिला प्रशासन ने जल्द उचित कार्रवाई नहीं की तो किसान अपनी लड़ाई लड़ने को मजबूर होंगे।
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बैठक में किसानों ने बताया कि बलियाली, जाटू लोहारी और सुमड़ाखेड़ा गांवों के लिए प्रशासन द्वारा तय किए गए बाजार मूल्य खेतों की वास्तविक कीमत के एक चौथाई के बराबर भी नहीं हैं। एक ही गांव में 4 से 5 तरह की कीमतें निर्धारित की गई हैं और खंभों तथा तारों के नीचे की जमीन के मूल्य में भी अंतर रखा गया है जो हरियाणा के किसी भी जिले में नहीं हुआ है। किसानों ने इन तीनों गांवों के लिए तय किए गए मूल्य को अस्वीकार कर दिया है।
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किसानों ने बताया कि धनाना, मंढाना और बडेसरा गांवों के लिए जिला प्रशासन 22 अप्रैल को बाजार मूल्य तय करना चाहता है लेकिन उन्हें आशंका है कि वहां भी कीमत कम रखी जाएगी। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उन्हें वास्तविक मार्केट मूल्य के अनुसार मुआवजा नहीं दिया गया तो वे अपने खेतों में पावर ग्रिड को काम नहीं करने देंगे।
बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष सतेंद्र लोहचब के साथ रमेश, सोमबीर, रामेहर, गौरव और महेंद्र ने कहा कि जिले की मार्केट रेट कमेटी के अध्ययन से प्रतीत होता है कि या तो पावर ग्रिड ने जिला प्रशासन को गुमराह किया है या फिर प्रशासन और पावर ग्रिड के बीच मिलीभगत से किसानों को उनके वास्तविक हक से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मार्केट रेट कमेटी के चेयरमैन द्वारा किसानों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दे दी गई है। यदि जिला प्रशासन ने जल्द उचित कार्रवाई नहीं की तो किसान अपनी लड़ाई लड़ने को मजबूर होंगे।

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