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अहंकार से बचकर विनम्र बनने वाला ही वास्तव में बड़ा बनता है : कंवर
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दिनोद के राधास्वामी आश्रम में प्रवचन देते कंवर महाराज
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भिवानी। राधा स्वामी दिनोद आश्रम में रविवार को आयोजित सत्संग में संत कंवर महाराज ने कहा कि अहंकार से बचकर विनम्र रहने वाला व्यक्ति ही वास्तव में बड़ा बनता है। उन्होंने कहा कि जब भक्ति, भजन या सुमिरन के लिए समय न मिल पाए तो खाली समय में महापुरुषों की वाणी पढ़नी, याद करनी, गानी या उसका चिंतन करना चाहिए।
इससे मन व्यर्थ के विचारों से बचता है, सकारात्मक रहता है और सही मार्ग पर चलता है। आश्रम जाना संभव न हो तो एकांत में बैठकर नाम-सिमरन और सत्संग किया जा सकता है। थोड़े-थोड़े समय का सुमिरन भी आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। कंवर महाराज ने कहा कि बताए गए नाम का अभ्यास करने से मन शांत, पवित्र और गुणवान बनता है। ईर्ष्या, निंदा, द्वेष और बुरे विचार धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।
अच्छा संग मनुष्य को ऊपर उठाता है जबकि कुसंग उसके पतन का कारण बनता है। इसलिए महापुरुषों की वाणी और सत्संग को अपना सच्चा साथी बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मन संसार की चमक-दमक और क्षणिक सुखों की ओर आकर्षित करता है लेकिन यही मार्ग अंततः दुख का कारण बनता है।
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मन के भटकने पर उसी समय गुरु नाम का स्मरण करना चाहिए और गुरु के वचनों का पालन करना चाहिए। गुरु का प्रत्येक उपदेश मनुष्य के कल्याण के लिए होता है और उसमें कोई स्वार्थ नहीं होता।
उन्होंने कहा कि जीवन में प्रेम, विनम्रता, धैर्य और मधुर वाणी को अपनाना चाहिए। दूसरों के दोष देखने के बजाय अपने अवगुणों को सुधारने का प्रयास करना चाहिए। जो व्यक्ति बड़ा बनता है उसमें अहंकार आ जाता है जबकि अहंकार से बचकर छोटा बनने वाला ही वास्तव में बड़ा बनता है। परिवार और समाज में प्रेम व अच्छे संस्कार फैलाना ही सच्ची भक्ति का लक्षण है।
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इससे मन व्यर्थ के विचारों से बचता है, सकारात्मक रहता है और सही मार्ग पर चलता है। आश्रम जाना संभव न हो तो एकांत में बैठकर नाम-सिमरन और सत्संग किया जा सकता है। थोड़े-थोड़े समय का सुमिरन भी आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। कंवर महाराज ने कहा कि बताए गए नाम का अभ्यास करने से मन शांत, पवित्र और गुणवान बनता है। ईर्ष्या, निंदा, द्वेष और बुरे विचार धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।
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अच्छा संग मनुष्य को ऊपर उठाता है जबकि कुसंग उसके पतन का कारण बनता है। इसलिए महापुरुषों की वाणी और सत्संग को अपना सच्चा साथी बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मन संसार की चमक-दमक और क्षणिक सुखों की ओर आकर्षित करता है लेकिन यही मार्ग अंततः दुख का कारण बनता है।
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मन के भटकने पर उसी समय गुरु नाम का स्मरण करना चाहिए और गुरु के वचनों का पालन करना चाहिए। गुरु का प्रत्येक उपदेश मनुष्य के कल्याण के लिए होता है और उसमें कोई स्वार्थ नहीं होता।
उन्होंने कहा कि जीवन में प्रेम, विनम्रता, धैर्य और मधुर वाणी को अपनाना चाहिए। दूसरों के दोष देखने के बजाय अपने अवगुणों को सुधारने का प्रयास करना चाहिए। जो व्यक्ति बड़ा बनता है उसमें अहंकार आ जाता है जबकि अहंकार से बचकर छोटा बनने वाला ही वास्तव में बड़ा बनता है। परिवार और समाज में प्रेम व अच्छे संस्कार फैलाना ही सच्ची भक्ति का लक्षण है।