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ग्वार बिजाई का उपयुक्त समय शुरू : डॉ. बीडी यादव
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शिविर में किसानों को जागरूक करते डॉ. मदन सिंह
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भिवानी। ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने कहा कि ग्वार की बिजाई का उपयुक्त समय शुरू हो चुका है और किसान 10 से 25 जून के बीच प्री-मानसून की अच्छी बारिश होने पर इसकी बिजाई कर अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को जड़ गलन रोग की रोकथाम के लिए बीज उपचार अपनाने की भी सलाह दी।
कृषि विभाग बहल के एटीएम डॉ. मदन सिंह के तत्वावधान में गांव सोरड़ा जदीद में ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव के साथ प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. मदन सिंह ने किसानों को सलाह दी कि किसी भी फसल की बिजाई से पहले अपने खेत की मिट्टी एवं पानी की जांच अवश्य करवाएं तथा उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर करें। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने और इसे बढ़ावा देने के लिए भी प्रेरित किया।
गोष्ठी में ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने किसानों से संवाद किया। इस दौरान किसानों ने बताया कि क्षेत्र में ग्वार की फसल में जड़ गलन रोग का प्रकोप 40 से 60 प्रतिशत तक हो जाता है जिससे जानकारी के अभाव में उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि हल्की भूमि होने के कारण इस क्षेत्र में यह रोग अधिक फैलता है। ऐसे में इस प्रकार की गोष्ठियों का आयोजन किसानों के हित में है।
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डॉ. बीडी यादव ने जड़ गलन रोग की रोकथाम और उपचार के बारे में किसानों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए तीन ग्राम कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत (बेविस्टीन) प्रति किलोग्राम बीज की दर से सूखा बीज उपचार कर ही बिजाई करनी चाहिए। इससे 80 से 95 प्रतिशत तक इस रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मात्र 15 रुपये की लागत से बीज उपचार कर जड़ गलन रोग की रोकथाम संभव है,0 जिससे प्रति एकड़ करीब 1.5 से 2 क्विंटल तक ग्वार की पैदावार बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने बीज उपचार को इस बीमारी की रोकथाम का सबसे सरल और सस्ता उपाय बताया।
बिजाई का उचित समय शुरू
बहल क्षेत्र में पिछले पांच से सात दिनों के दौरान कई गांवों में अच्छी बारिश हुई है। ऐसे में किसान इस बारिश का लाभ उठाते हुए ग्वार की बिजाई कर सकते हैं। अब ग्वार की बिजाई का उपयुक्त समय आ गया है। ग्वार की बिजाई के लिए जून का दूसरा पखवाड़ा सबसे उपयुक्त माना जाता है। बारिश आधारित खेती करने वाले किसान मानसून की अच्छी वर्षा होने पर बिजाई करें। यदि किसी कारणवश इस अवधि में बिजाई नहीं हो पाती है तो 5 जुलाई तक बिजाई अवश्य कर लेनी चाहिए। इसके बाद बिजाई करने पर ग्वार की पैदावार में कमी आने लगती है। ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने अच्छी पैदावार के लिए प्रति एकड़ 100 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट तथा 15 किलोग्राम यूरिया अथवा 35 किलोग्राम डीएपी बिजाई के समय प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ग्वार की बेहतर पैदावार के लिए खेत में गोबर की खाद का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। शिविर में अजय कुमार, आनंद, राणधीर, जगबीर, अनिल, जयबीर और सोमबीर सहित अनेक किसान मौजूद रहे।
कृषि विभाग बहल के एटीएम डॉ. मदन सिंह के तत्वावधान में गांव सोरड़ा जदीद में ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव के साथ प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. मदन सिंह ने किसानों को सलाह दी कि किसी भी फसल की बिजाई से पहले अपने खेत की मिट्टी एवं पानी की जांच अवश्य करवाएं तथा उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर करें। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने और इसे बढ़ावा देने के लिए भी प्रेरित किया।
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गोष्ठी में ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने किसानों से संवाद किया। इस दौरान किसानों ने बताया कि क्षेत्र में ग्वार की फसल में जड़ गलन रोग का प्रकोप 40 से 60 प्रतिशत तक हो जाता है जिससे जानकारी के अभाव में उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि हल्की भूमि होने के कारण इस क्षेत्र में यह रोग अधिक फैलता है। ऐसे में इस प्रकार की गोष्ठियों का आयोजन किसानों के हित में है।
डॉ. बीडी यादव ने जड़ गलन रोग की रोकथाम और उपचार के बारे में किसानों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए तीन ग्राम कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत (बेविस्टीन) प्रति किलोग्राम बीज की दर से सूखा बीज उपचार कर ही बिजाई करनी चाहिए। इससे 80 से 95 प्रतिशत तक इस रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मात्र 15 रुपये की लागत से बीज उपचार कर जड़ गलन रोग की रोकथाम संभव है,0 जिससे प्रति एकड़ करीब 1.5 से 2 क्विंटल तक ग्वार की पैदावार बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने बीज उपचार को इस बीमारी की रोकथाम का सबसे सरल और सस्ता उपाय बताया।
बिजाई का उचित समय शुरू
बहल क्षेत्र में पिछले पांच से सात दिनों के दौरान कई गांवों में अच्छी बारिश हुई है। ऐसे में किसान इस बारिश का लाभ उठाते हुए ग्वार की बिजाई कर सकते हैं। अब ग्वार की बिजाई का उपयुक्त समय आ गया है। ग्वार की बिजाई के लिए जून का दूसरा पखवाड़ा सबसे उपयुक्त माना जाता है। बारिश आधारित खेती करने वाले किसान मानसून की अच्छी वर्षा होने पर बिजाई करें। यदि किसी कारणवश इस अवधि में बिजाई नहीं हो पाती है तो 5 जुलाई तक बिजाई अवश्य कर लेनी चाहिए। इसके बाद बिजाई करने पर ग्वार की पैदावार में कमी आने लगती है। ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने अच्छी पैदावार के लिए प्रति एकड़ 100 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट तथा 15 किलोग्राम यूरिया अथवा 35 किलोग्राम डीएपी बिजाई के समय प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ग्वार की बेहतर पैदावार के लिए खेत में गोबर की खाद का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। शिविर में अजय कुमार, आनंद, राणधीर, जगबीर, अनिल, जयबीर और सोमबीर सहित अनेक किसान मौजूद रहे।