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Bhiwani News: डेढ़ दशक बाद कंक्रीट लाइनिंग से पक्की होगी जूई नहर, 30 से 40 क्यूसेक बढ़ेगी क्षमता
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भिवानी की जूई नहर को पक्का करते श्रमिक।
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भिवानी। करीब डेढ़ दशक बाद लोहानी पंप हाउस से लेकर जूई नहर तक एक लाख 10 हजार फीट लंबाई में नहर को कंक्रीट लाइनिंग से पक्का किया जाएगा। जूई वाटर डिविजन की ओर से करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से नहर सुदृढ़ीकरण का कार्य कराया जा रहा है। इस कार्य के पूरा होने के बाद जूई नहर की जल वहन क्षमता 30 से 40 क्यूसेक तक बढ़ जाएगी जिससे टेल तक बिना किसी रुकावट के नहरी पानी पहुंच सकेगा।
फिलहाल नहरों में पानी बंद है और मजदूर नहर में उतरकर सुदृढ़ीकरण कार्य में जुटे हुए हैं। पहले जूई नहर ईंटों से पक्की की गई थी लेकिन समय के साथ यह कई स्थानों पर कमजोर हो चुकी थी। नहर के भीतर उगी झाड़ियों के कारण पानी के प्रवाह में रुकावट पैदा हो रही थी। वहीं तलहटी में गाद जमने से इसकी क्षमता भी काफी कम हो गई थी।
सिंचाई विभाग की जूई वाटर डिविजन के तहत जूई नहर को अब ईंटों के बजाय कंक्रीट लाइनिंग से पक्का किया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के प्रयासों से जूई नहर का निर्माण वर्ष 1969 के आसपास आरंभ हुआ था। उठान सिंचाई परियोजना की इस महत्वाकांक्षी नहर के कारण ऊंचे रेतीले टीलों और मरुस्थलीय क्षेत्रों तक पानी पहुंचाना संभव हो पाया था।
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लोहानी पंप हाउस भी इस परियोजना की विशेष उपलब्धियों में शामिल है। नहर के बीचोंबीच बने पंप हाउस चैंबर में लगी बड़ी मोटरों के माध्यम से पानी को लिफ्ट कर ऊंचे टीलों की ओर पहुंचाया जाता है। जूई नहर के माध्यम से करीब 170 किलोमीटर दूर स्थित मरुस्थलीय क्षेत्रों तक नहरी पानी पहुंचता है। जूई कैनाल भी इसी परियोजना का हिस्सा है जिसे करीब चार-पांच वर्ष पहले कंक्रीट लाइनिंग से पक्का किया जा चुका है।
इस नहर से करीब 32 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है। साथ ही शहरी क्षेत्र के जलघरों के अलावा जिले के अधिकांश गांवों में पेयजल आपूर्ति की जरूरतें भी इसी के माध्यम से पूरी होती हैं। सिंचाई विभाग मुख्य नहरों के सुदृढ़ीकरण के जरिए उनकी क्षमता बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। इसी योजना के तहत जूई नहर का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। नहर के किनारों को पहले की तुलना में करीब चार से पांच फीट तक चौड़ा किया गया है जबकि तलहटी में जमी गाद को हटाकर उसे भी पक्का किया जा रहा है। कार्य पूरा होने के बाद नहर की जल वहन क्षमता में 30 से 40 क्यूसेक की वृद्धि होगी। संवाद
रिमॉडलिंग से जूई नहर की कई बार बढ़ाई क्षमता
जूई नहर को कई बार रिमॉडलिंग कर इसकी क्षमता और पानी के प्रवाह को बढ़ाने के लिए कदम उठाए गए हैं। यह नहर बारिश के मौसम में अधिकतम क्षमता करीब 1200 क्यूसेक तक पहुंचा सकती है। वहीं सामान्य दिनों में पानी की मांग और उपलब्धता के अनुसार इसमें 500 से 650 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है।
जूई नहर का आरडी 88,000 से 1,78,800 तक कंक्रीट से पक्का किए जाने का काम किया जा रहा है। करीब 20 करोड़ की लागत वाली नहर सुदृढ़ीकरण की इस परियोजना का काम करीब छह माह में पूरा कर लिया जाएगा। पानी बंद रहने के दौरान नहर को पक्का किए जाने का काम तेजी से चल रहा है ताकि समय पर इसे पूरा किया जा सके। पहले यह नहर ईंटों से बनी थी मगर अब इस नहर को पहले से करीब चार से पांच फीट चौड़ा कर कंक्रीट लाइनिंग से पक्का किया जा रहा है। इससे इसकी 30 से 40 क्यूसेक पानी प्रवाह की क्षमता बढ़ जाएगी। -अनुराग गोयल, कार्यकारी अभियंता, जूई वाटर डिविजन, सिंचाई विभाग, भिवानी।
फिलहाल नहरों में पानी बंद है और मजदूर नहर में उतरकर सुदृढ़ीकरण कार्य में जुटे हुए हैं। पहले जूई नहर ईंटों से पक्की की गई थी लेकिन समय के साथ यह कई स्थानों पर कमजोर हो चुकी थी। नहर के भीतर उगी झाड़ियों के कारण पानी के प्रवाह में रुकावट पैदा हो रही थी। वहीं तलहटी में गाद जमने से इसकी क्षमता भी काफी कम हो गई थी।
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सिंचाई विभाग की जूई वाटर डिविजन के तहत जूई नहर को अब ईंटों के बजाय कंक्रीट लाइनिंग से पक्का किया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के प्रयासों से जूई नहर का निर्माण वर्ष 1969 के आसपास आरंभ हुआ था। उठान सिंचाई परियोजना की इस महत्वाकांक्षी नहर के कारण ऊंचे रेतीले टीलों और मरुस्थलीय क्षेत्रों तक पानी पहुंचाना संभव हो पाया था।
लोहानी पंप हाउस भी इस परियोजना की विशेष उपलब्धियों में शामिल है। नहर के बीचोंबीच बने पंप हाउस चैंबर में लगी बड़ी मोटरों के माध्यम से पानी को लिफ्ट कर ऊंचे टीलों की ओर पहुंचाया जाता है। जूई नहर के माध्यम से करीब 170 किलोमीटर दूर स्थित मरुस्थलीय क्षेत्रों तक नहरी पानी पहुंचता है। जूई कैनाल भी इसी परियोजना का हिस्सा है जिसे करीब चार-पांच वर्ष पहले कंक्रीट लाइनिंग से पक्का किया जा चुका है।
इस नहर से करीब 32 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है। साथ ही शहरी क्षेत्र के जलघरों के अलावा जिले के अधिकांश गांवों में पेयजल आपूर्ति की जरूरतें भी इसी के माध्यम से पूरी होती हैं। सिंचाई विभाग मुख्य नहरों के सुदृढ़ीकरण के जरिए उनकी क्षमता बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। इसी योजना के तहत जूई नहर का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। नहर के किनारों को पहले की तुलना में करीब चार से पांच फीट तक चौड़ा किया गया है जबकि तलहटी में जमी गाद को हटाकर उसे भी पक्का किया जा रहा है। कार्य पूरा होने के बाद नहर की जल वहन क्षमता में 30 से 40 क्यूसेक की वृद्धि होगी। संवाद
रिमॉडलिंग से जूई नहर की कई बार बढ़ाई क्षमता
जूई नहर को कई बार रिमॉडलिंग कर इसकी क्षमता और पानी के प्रवाह को बढ़ाने के लिए कदम उठाए गए हैं। यह नहर बारिश के मौसम में अधिकतम क्षमता करीब 1200 क्यूसेक तक पहुंचा सकती है। वहीं सामान्य दिनों में पानी की मांग और उपलब्धता के अनुसार इसमें 500 से 650 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है।
जूई नहर का आरडी 88,000 से 1,78,800 तक कंक्रीट से पक्का किए जाने का काम किया जा रहा है। करीब 20 करोड़ की लागत वाली नहर सुदृढ़ीकरण की इस परियोजना का काम करीब छह माह में पूरा कर लिया जाएगा। पानी बंद रहने के दौरान नहर को पक्का किए जाने का काम तेजी से चल रहा है ताकि समय पर इसे पूरा किया जा सके। पहले यह नहर ईंटों से बनी थी मगर अब इस नहर को पहले से करीब चार से पांच फीट चौड़ा कर कंक्रीट लाइनिंग से पक्का किया जा रहा है। इससे इसकी 30 से 40 क्यूसेक पानी प्रवाह की क्षमता बढ़ जाएगी। -अनुराग गोयल, कार्यकारी अभियंता, जूई वाटर डिविजन, सिंचाई विभाग, भिवानी।