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Bhiwani News: स्क्रीन की चकाचौंध में धुंधला रहा बचपन का उजियारा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 30 Apr 2026 01:31 AM IST
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The brightness of childhood is blurred by the glare of the screen
मेडिकल कॉलेज में नेत्र जांच करता चिकित्सक।
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भिवानी। मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी और अन्य डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग बच्चों की आंखों पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल रहा है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत बच्चों की आंखों की कोशिकाओं को प्रभावित कर रही है जिससे आंखों में सूखापन, सिरदर्द, कम दिखाई देना, आंखों में दर्द और पानी आने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
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पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार उनकी ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 10 से 15 बच्चे आंखों की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना काल के बाद ऑनलाइन कक्षाएं, जूम मीटिंग, मोबाइल गेम और डिजिटल शिक्षा गतिविधियों में बढ़ोतरी के कारण बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है। यही बढ़ती निर्भरता उनकी आंखों की सेहत को नुकसान पहुंचा रही है। चिकित्सकों ने अभिभावकों को बच्चों के डिजिटल उपकरणों के उपयोग पर नियंत्रण रखने और नियमित नेत्र जांच कराने की सलाह दी है।
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ये है कारण
राजकीय मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एडविन ने बताया कि घरों में बच्चों का समय मोबाइल और लैपटॉप पर अधिक बीत रहा है। इन उपकरणों से निकलने वाली तेज रोशनी और लगातार स्क्रीन देखने से रेटिना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिससे आंखों के अंदर की कोशिकाएं सूखने लगती हैं। उन्होंने बताया कि इसके कारण बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) और हाइपरमेट्रोपिया (दूर दृष्टि दोष) जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन बीमारियों में आंखों और पुतलियों के आकार पर असर पड़ता है। समय रहते सावधानी न बरती जाए तो बच्चों की आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है और गंभीर स्थिति में दृष्टि पर स्थायी प्रभाव भी पड़ सकता है।

ऐसे करें बचाव
बच्चों को मोबाइल का उपयोग कम से कम करने दें।
कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल का प्रयोग करते समय आंखों और स्क्रीन के बीच उचित दूरी बनाए रखें।
दिन में तीन से चार बार आंखों को ठंडे पानी से अच्छी तरह धोएं।
धूप या धूल-मिट्टी वाली जगह पर जाते समय चश्मा पहनें।
भोजन में दूध, मक्खन, गाजर, अंडे, देसी घी और हरी सब्जियों जैसे पौष्टिक आहार शामिल करें।
आंखों की नियमित जांच करवाते रहें।
बिना चिकित्सकीय सलाह के आंखों में किसी भी प्रकार की दवा न डालें।
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