हरियाणा राज्यसभा चुनाव: एक चूक से बिगड़ा भाजपा का खेल, कांग्रेस की फूट उजागर; बिंदी का निशान दे गया दर्द
हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा और कांग्रेस को एक एक सीट पर जीत मिली है। हालांकि कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्राॅस वोटिंग की जिससे पार्टी में रार छिड़ गई है।
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हरियाणा राज्यसभा की दो सीटों पर भाजपा व कांग्रेस के उम्मीदवार ने भले ही जीत दर्ज की हो, मगर खुले मन से दोनों ही दल इस जीत का जश्न नहीं बना पाए।
भाजपा अपनी तय मानी जा रही जीत एक छोटी सी चूक और गलत आकलन की वजह से गंवा बैठी जबकि कांग्रेस की जीत ने उसके भीतर की दरारों को खुलकर सामने ला दिया। इससे यह भी साबित हो गया है कि कांग्रेस के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा।
भाजपा ने शुरुआती रुझान को ही माना
राज्यसभा की दोनों सीटों पर भाजपा के लिए यह चुनाव लगभग तय जीत की तरह देखा जा रहा था। संजय भाटिया की जीत सुरक्षित मानी जा रही थी, जबकि दूसरी सीट पर भी पार्टी ने राजनीतिक समीकरण साध लिए थे। भाजपा की रणनीति काफी हद तक सफल रही थी, इसका प्रमाण कांग्रेस के पांच विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग है। यानी पार्टी ने विपक्ष में सेंध लगाने का काम कर लिया था। भाजपा ने यह मान लिया कि शुरुआती रुझान आगे भी उसी दिशा में जाएंगे। यह राजनीतिक गणित की सबसे बड़ी भूल मानी जाती है, जहां संभावनाओं को निश्चित मान लिया जाता है।
एक वोट बना निर्णायक
मतगणना के दौरान एक ऐसा मोड़ आया, जहां भाजपा की रणनीति लड़खड़ा गई। कांग्रेस के तीन वोट रद्द होने के बाद जब कांग्रेस के काउंटिंग एजेंट ने भाजपा के एक वोट पर भी सवाल उठाया, तो भाजपा के प्रतिनिधियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्हें लगा कि तीन के मुकाबले एक वोट का नुकसान कोई बड़ा फर्क नहीं डालेगा। जिस वोट को हल्के में लिया गया, वही अंततः निर्णायक साबित हुआ।
अगर वह वोट रद्द नहीं होता, तो परिणाम पूरी तरह बदल सकता था। वहीं, यह भी बताया जा रहा है कि भरत सिंह बेनीवाल के वोट को लेकर जो शिकायत दी गई थी, वह काफी कमजोर थी, जिसकी वजह से चुनाव आयोग ने वोट रद्द कर दिया। चुनावी प्रक्रिया में हर एक वोट की वैधता कितनी महत्वपूर्ण होती है। एक वोट का रद्द होना, पूरी रणनीति को ध्वस्त कर सकता है। इस हार के भाजपा नेतृत्व के लिए दूरगामी नतीजे होंगे। अब देखना होगा कि इस हार को हाईकमान किस तरह से लेता है और हार के लिए जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई करता है।
कांग्रेस के 25 फीसदी वोट खराब, पार्टी की रणनीति पर उठे सवाल
कांग्रेस भले ही एक सीट जीतने में सफल रही हो, लेकिन इस जीत के पीछे छिपी सच्चाई पार्टी के लिए ज्यादा चिंताजनक है। चार वोटों का रद्द होना और पांच विधायकों का क्रॉस वोट करना यह साफ संकेत देता है कि पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता की गंभीर कमी है। कांग्रेस के पास कुल 37 वोट थे। इनमें से नौ वोट खराब हो गए। एक पार्टी कुल वोटों में से 25 फीसदी वोट खराब व क्रास वोट जाए तो कहीं न कहीं कांग्रेस के अंदर की फूट व संगठनात्मक कमजोरी को दिखाता है।
यदि भाजपा का वोट रद्द नहीं होता या भरत सिंह बेनीवाल का वोट अमान्य घोषित हो जाता, तो समीकरण पूरी तरह बदल सकते थे। पार्टी ने अपने विधायकों को बचाने के लिए मजबूत बाड़ेबंदी की थी। मगर कांग्रेस को इस बात की भनक तक नहीं लग पाई कि सत्ता पक्ष ने उनके विधायकों से संपर्क कर लिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस नेतृत्व पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी लगातार एकजुटता का दावा करती रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर विधायकों का व्यवहार कुछ और ही कहानी कहता है।
मतपत्र पर लगे निशान ने बिगाड़ा खेल
राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के चार और भाजपा का एक वोट रद्द किया गया। इन वोटों के रद्द होने की वजह से भी कांग्रेस का समीकरण बिगड़ गया और बड़ी मुश्किल से सीट निकालने में कामयाब रही।
कांग्रेस का आरोप है कि जानबूझकर उनके वोट रद्द किए गए, जबकि वे मान्य वोट थे। कांग्रेस के नेताओं ने बताया, रिटर्निंग अधिकारी ने बताया, उनके तीन वोट इसलिए रद्द कर दिए गए, क्योंकि तीन वोटों के पीछे बिंदी का निशान बना हुआ था जबकि पीछे निशान लगाने का कोई औचित्य नहीं है। ऐसा लगता है कि जानबूझ कर या पहले से ही निशान लगाया हुआ होगा। चौथा वोट टोहाना विधायक परमवीर का हुआ था।
परमवीर पर आरोप था कि उन्होंने अपने मतपत्र की गोपनीयता भंग कर दी थी। इस पर भाजपा के अधिकृत चुनावी एजेंट गौरव गौतम ने आपत्ति जताई थी। चुनाव आयोग ने गौरव गौतम की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए परमवीर का वोट रद्द कर दिया था। वहीं, भाजपा का भी एक वोट इसलिए रद्द कर दिए गए क्योंकि उनके मतपत्र के पीछे निशान मिला था। एक तरह से मतपत्र पर बिंदी ने कांग्रेस व भाजपा का खेल बिगाड़ दिया।
यदि ये मतपत्र रद्द नहीं होते तो समीकरण कुछ और होता। इस पूरे मामले में कांग्रेस ने रिटर्निंग अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने अपने दायरे से बाहर जाते हुए एक पक्षीय कार्रवाई की है। कांग्रेस का कहना है कि उनके कुछ वैध वोटों को भी गलत तरीके से अमान्य घोषित किया गया, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकता है। पार्टी ने इस मुद्दे को आगे उठाने के संकेत दिए हैं।