हरियाणा राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस की रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की हलचल तेज, दो सीटों पर तीन उम्मीदवारों से मुकाबला रोचक
कांग्रेस की चिंता का एक कारण राज्यसभा उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध को लेकर पार्टी के भीतर बनी असहजता भी है। कई विधायकों के लिए यह नाम नया बताया जा रहा है। पार्टी के भीतर यह सवाल भी उठ रहा है कि जिस व्यक्ति को अधिकतर नेता ठीक से नहीं जानते, उसे अचानक राज्यसभा उम्मीदवार क्यों बनाया गया।
विस्तार
हरियाणा में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से चुनाव का गणित और भी रोचक हो गया है।
भाजपा ने पूर्व सांसद संजय भाटिया को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस बीच भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल का निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना रहा है। यही कारण है कि कांग्रेस खेमे में क्रॉस वोटिंग की आशंका को लेकर बेचैनी साफ दिखाई दे रही है।
दरअसल राज्यसभा चुनाव में जीत का गणित पूरी तरह विधायकों के वोट पर निर्भर करता है। भाजपा को दोनों सीटें जीतने के लिए 62 विधायकों के वोट की जरूरत है, जबकि उसके पास फिलहाल 48 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन है। एक सीट जीतने के बाद भाजपा के पास 20 वोट बचते हैं। दूसरी सीट जीतने के लिए उसे 11 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में भाजपा की रणनीति स्पष्ट रूप से विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की दिशा में केंद्रित दिखाई देती है।
नाै वोटों पर टिकी भाजपा की दोहरी जीत
संख्यात्मक स्थिति को देखें तो भाजपा के लिए रास्ता आसान नहीं है। इनेलो के दो विधायक अगर भाजपा का साथ दे भी देते हैं, तब भी पार्टी को लगभग नौ विधायकों के वोट की कमी रहेगी। इन नौ वोटों पर ही पूरा चुनाव टिका हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की रणनीति कांग्रेस के भीतर असंतोष या संभावित असहमति का लाभ उठाने की हो सकती है।
विधायकों को शिमला ले जाएगी कांग्रेस
इसी संभावना को देखते हुए कांग्रेस भी पूरी तरह सतर्क हो गई है। पार्टी को डर है कि यदि उसके कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर देते हैं तो राज्यसभा की दूसरी सीट का गणित पूरी तरह बदल सकता है। यही कारण है कि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए सक्रिय रणनीति बना रही है। पार्टी ने अपने सभी विधायकों को चंडीगढ़ में लंच मीटिंग के लिए बुलाया है। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद सभी विधायकों को बस के जरिए शिमला ले जाया जा सकता है। राजनीति में इसे आमतौर पर रिसॉर्ट पॉलिटिक्स कहा जाता है, जहां दल अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखकर किसी भी प्रकार की राजनीतिक संपर्क या दबाव की संभावना को कम करने की कोशिश करते हैं। शिमला की वादियों में विधायकों को शिफ्ट करने का उद्देश्य यही बताया जा रहा है कि भाजपा या अन्य राजनीतिक ताकतें किसी भी विधायक से व्यक्तिगत संपर्क न कर सकें।
हालांकि नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसे अफवाह बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर अफवाह फैला रही है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बी.के. हरिप्रसाद भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे। बताया जा रहा है कि वे आज रात चंडीगढ़ पहुंच जाएंगे और पूरी रणनीति की निगरानी करेंगे। कांग्रेस अपने विधायकों को मतदान की प्रक्रिया का अभ्यास भी कराएगी, ताकि राज्यसभा चुनाव के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी गलती की संभावना न रहे।
राजनीतिक शक्ति परीक्षण
हरियाणा का यह राज्यसभा चुनाव केवल दो सीटों का चुनाव नहीं बल्कि राजनीतिक शक्ति परीक्षण बनता जा रहा है।
भाजपा जहां अपने संख्याबल की कमी को रणनीतिक जोड़तोड़ से पूरा करने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस अपने विधायकों की एकजुटता बनाए रखने के लिए सतर्क और सक्रिय नजर आ रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा विपक्ष में सेंध लगाने में सफल होती है या कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखकर इस चुनौती का सामना कर लेती है।
हरियाणा में विधानसभा का गणित
भाजपा पक्ष
कुल वोट : 51 (तीन निर्दलीय वोट भी शामिल हैं)
जरूरी : 31
अतिरिक्त: 20 वोट
कांग्रेस पक्ष
कुल वोट : 37
जरूरी : 31
अतिरिक्त: 6 वोट
कांग्रेस भी 1 सीट निकाल सकती है, लेकिन सिर्फ तभी जब क्रॉस वोटिंग न हो।
इनेलो
दो वोट