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Chandigarh-Haryana News: डिप्टी डायरेक्टर पद पर नियुक्ति विवाद पहुंचा हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन पद पर नियुक्ति से जुड़े नियमों में किए गए संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिका पर हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने नियमों में बदलाव कर 15 वर्ष का अनुभव रखने वाले योग्य अधिवक्ताओं को इन पदों से वंचित कर दिया है।
याचिका एडवोकेट प्रदीप कुमार रापड़िया ने दायर की है जो 18 वर्षों से अधिक समय से अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस कर रहे हैं और राष्ट्रीय एजेंसियों में विधि अधिकारी के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।
याचिका में 18 दिसंबर 2025 को अधिसूचित हरियाणा स्टेट प्रॉसिक्यूशन लीगल सर्विसेज (ग्रुप-ए) संशोधन नियम, 2025 को चुनौती दी गई है। इसके साथ ही 31 दिसंबर 2025 को जारी उस पदोन्नति आदेश को भी सवालों के घेरे में रखा गया है, जिसके तहत कई सेवारत अधिकारियों को डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन पद पर पदोन्नत किया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि ये संशोधित नियम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 20 के विपरीत हैं। केंद्रीय कानून के अनुसार, डायरेक्टर या डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन के पद पर नियुक्ति उसी व्यक्ति की हो सकती है, जिसने कम से कम 15 वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस की हो या जो सत्र न्यायाधीश रह चुका हो। वहीं असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन के लिए न्यूनतम सात वर्ष की अधिवक्ता प्रैक्टिस या प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट का अनुभव अनिवार्य है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि संशोधित राज्य नियमों के तहत वरिष्ठ पदों को केवल विभागीय पदोन्नति या अन्य सरकारों से प्रतिनियुक्ति अथवा स्थानांतरण के माध्यम से भरा जा रहा है।
इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि 31 दिसंबर 2025 को जारी पदोन्नति आदेश बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन या योग्य अधिवक्ताओं से आवेदन आमंत्रित किए जारी किया गया। इससे पूरी चयन प्रक्रिया अपारदर्शी और मनमानी बन गई है। ब्यूरो
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याचिका एडवोकेट प्रदीप कुमार रापड़िया ने दायर की है जो 18 वर्षों से अधिक समय से अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस कर रहे हैं और राष्ट्रीय एजेंसियों में विधि अधिकारी के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।
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याचिका में 18 दिसंबर 2025 को अधिसूचित हरियाणा स्टेट प्रॉसिक्यूशन लीगल सर्विसेज (ग्रुप-ए) संशोधन नियम, 2025 को चुनौती दी गई है। इसके साथ ही 31 दिसंबर 2025 को जारी उस पदोन्नति आदेश को भी सवालों के घेरे में रखा गया है, जिसके तहत कई सेवारत अधिकारियों को डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन पद पर पदोन्नत किया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि ये संशोधित नियम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 20 के विपरीत हैं। केंद्रीय कानून के अनुसार, डायरेक्टर या डिप्टी डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन के पद पर नियुक्ति उसी व्यक्ति की हो सकती है, जिसने कम से कम 15 वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस की हो या जो सत्र न्यायाधीश रह चुका हो। वहीं असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन के लिए न्यूनतम सात वर्ष की अधिवक्ता प्रैक्टिस या प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट का अनुभव अनिवार्य है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि संशोधित राज्य नियमों के तहत वरिष्ठ पदों को केवल विभागीय पदोन्नति या अन्य सरकारों से प्रतिनियुक्ति अथवा स्थानांतरण के माध्यम से भरा जा रहा है।
इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि 31 दिसंबर 2025 को जारी पदोन्नति आदेश बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन या योग्य अधिवक्ताओं से आवेदन आमंत्रित किए जारी किया गया। इससे पूरी चयन प्रक्रिया अपारदर्शी और मनमानी बन गई है। ब्यूरो