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Chandigarh-Haryana News: शून्य विवाह वाली महिला पत्नी या विधवा मानी जा सकती है या नहीं, तय करेगा हाईकोर्ट
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सौतेले बेटे से ऐसी महिला के गुजारा भत्ता की मांग के हक पर भी होगा निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जिस महिला का विवाह कानूनी रूप से शून्य हो क्या उसे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण के लिए पत्नी या कानूनी रूप से विधवा माना जा सकता है और क्या वह अपने सौतेले बेटे से भरण-पोषण की मांग कर सकती है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अब इस मामले में यह अहम सवाल उठाते हुए सुनवाई का निर्णय लिया है। इस मामले में सौतेले बेटे की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने महिला को नोटिस जारी करते हुए फैमिली कोर्ट में याचिकाकर्ता के खिलाफ चल रही आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
विवाद 2021 में कैथल के एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद शुरू हुए भरण-पोषण मामले से जुड़ा है। मृतक के बेटे ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है जिसके तहत महिला को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में 15 हजार रुपये प्रतिमाह देने का निर्देश दिया गया था। महिला ने खुद को मृतक की विधवा और याचिकाकर्ता को अपना सौतेला बेटा बताया था। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि प्रारंभ से ही धारा 125 की याचिका की वैधता पर आपत्ति उठाई गई थी क्योंकि सौतेले बेटे पर सौतेली मां के भरण-पोषण की कोई व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी नहीं होती। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने जुलाई 2024 में इस आपत्ति को खारिज कर दिया था और अगस्त 2024 में हाईकोर्ट ने भी हस्तक्षेप से इन्कार किया था।
बाद मामला तब नया मोड़ ले गया, जब याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसे जानकारी मिली है कि महिला ने पहले दो विवाह किए थे जिनमें से किसी का भी तलाक न्यायालय से नहीं हुआ। ऐसे में वह याचिकाकर्ता के पिता की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी नहीं हो सकती।
महिला ने अपने जवाब में न तो पूर्व विवाहों से स्पष्ट इन्कार किया और न ही किसी तलाक डिक्री को पेश किया। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि महिला यह साबित नहीं कर सकी कि उसके पूर्व पति या उसके जैविक बच्चे उसका भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा संपत्ति को लेकर एक दीवानी विवाद भी पहले से लंबित है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जिस महिला का विवाह कानूनी रूप से शून्य हो क्या उसे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण के लिए पत्नी या कानूनी रूप से विधवा माना जा सकता है और क्या वह अपने सौतेले बेटे से भरण-पोषण की मांग कर सकती है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अब इस मामले में यह अहम सवाल उठाते हुए सुनवाई का निर्णय लिया है। इस मामले में सौतेले बेटे की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने महिला को नोटिस जारी करते हुए फैमिली कोर्ट में याचिकाकर्ता के खिलाफ चल रही आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
विवाद 2021 में कैथल के एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद शुरू हुए भरण-पोषण मामले से जुड़ा है। मृतक के बेटे ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है जिसके तहत महिला को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में 15 हजार रुपये प्रतिमाह देने का निर्देश दिया गया था। महिला ने खुद को मृतक की विधवा और याचिकाकर्ता को अपना सौतेला बेटा बताया था। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि प्रारंभ से ही धारा 125 की याचिका की वैधता पर आपत्ति उठाई गई थी क्योंकि सौतेले बेटे पर सौतेली मां के भरण-पोषण की कोई व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी नहीं होती। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने जुलाई 2024 में इस आपत्ति को खारिज कर दिया था और अगस्त 2024 में हाईकोर्ट ने भी हस्तक्षेप से इन्कार किया था।
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बाद मामला तब नया मोड़ ले गया, जब याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसे जानकारी मिली है कि महिला ने पहले दो विवाह किए थे जिनमें से किसी का भी तलाक न्यायालय से नहीं हुआ। ऐसे में वह याचिकाकर्ता के पिता की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी नहीं हो सकती।
महिला ने अपने जवाब में न तो पूर्व विवाहों से स्पष्ट इन्कार किया और न ही किसी तलाक डिक्री को पेश किया। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि महिला यह साबित नहीं कर सकी कि उसके पूर्व पति या उसके जैविक बच्चे उसका भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा संपत्ति को लेकर एक दीवानी विवाद भी पहले से लंबित है।