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Chandigarh-Haryana News: सरकार-अडानी के बीच बिजली समझाैते की 6 माह में होगी जांच, हाईपावर कमेटी गठित
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- तीन सदस्यीय जांच समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी होंगे
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के पूर्व चेयरमैन एसएस दुबे व हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के सेवानिवृत्त चेयरमैन टीसी गुप्ता सदस्य होंगे
- साल 2008 में 1424 मेगावाट बिजली आपूर्ति का 25 साल के लिए गुजरात स्थित मुंद्रा थर्मल पावर प्लांट से समझौता हुआ था
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने अडानी पावर लिमिटेड के गुजरात स्थित मुंद्रा थर्मल पावर प्लांट से जुड़े बिजली खरीद समझौते (पीपीए) को लेकर विवादों की जांच के लिए तीन सदस्यीय एक उच्च स्तरीय समिति (हाईपावर कमेटी) का गठन किया है। इस संबंध में प्रदेश के ऊर्जा विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी की है जिसके तहत कमेटी को आगामी छह माह में समस्या के समाधान की विस्तृत रिपोर्ट देनी है।
अधिसूचना के अनुसार जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी होंगे। इसके अतिरिक्त केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के पूर्व चेयरमैन एसएस दुबे और हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के सेवानिवृत्त चेयरमैन टीसी गुप्ता सदस्य होंगे। सरकार ने इन्हें इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष और व्यावहारिक समाधान सुझाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
सरकार का अधिकार सुरक्षित
इस प्रक्रिया के लिए हरियाणा पावर यूटिलिटी के मुख्य अभियंता को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार इस जांच प्रक्रिया के बावजूद किसी भी समय आगे की कार्रवाई करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखती है। अधिसूचना के मुताबिक कमेटी अडानी पावर और हरियाणा डिस्कॉम के बीच हुए पीपीए से जुड़े सभी दस्तावेजों और तथ्यों की गहन जांच करेगी। आवश्यकतानुसार दोनों पक्षों से अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण मांगने का अधिकार भी कमेटी को दिया गया है। कमेटी विशेष रूप से अडानी पावर को वास्तव में क्या आर्थिक नुकसान हुआ, बिजली उत्पादन व आपूर्ति की वास्तविक लागत कितनी रही, भुगतान सुरक्षा तंत्र से जुड़े विवाद, दोनों पक्षों के लंबित दावे और प्रतिदावे, मौजूदा टैरिफ पर पीपीए की दीर्घकालिक व्यवहारिकता आदि की जांच-पड़ताल करेगी।
2008 का समझौता और विवाद की जड़
अडानी पावर और हरियाणा सरकार के बीच 2008 में 1424 मेगावाट बिजली आपूर्ति का समझौता हुआ था। इसमें 25 वर्षों के लिए 2.94 रुपये प्रति यूनिट की दर तय की गई थी। यह विवाद उस समय गहराया जब अडानी पावर ने 2017-18 के दौरान यह दलील दी कि इंडोनेशिया से आयात होने वाले कोयले की कीमतों में अचानक भारी वृद्धि होने के कारण बिजली उत्पादन लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई और तय दर पर बिजली आपूर्ति करना कंपनी के लिए घाटे का सौदा बन गया। इसके बाद अडानी पावर ने अतिरिक्त भुगतान और टैरिफ राहत की मांग शुरू की हालांकि 11 अप्रैल 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि इंडोनेशिया के कोयला नियमों के कारण समझाैते में बदलाव नहीं किया जा सकता है।
हरियाणा सरकार की दलील
हरियाणा सरकार और उसकी डिस्कॉम ने अलग रुख अपनाते हुए वर्ष 2019 से लगातार यह कहा कि पीपीए तय शर्तों पर हुआ था और किसी भी सूरत में बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जा सकता। सरकार का स्पष्ट मत रहा है कि अगर अतिरिक्त भुगतान किया गया तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की बिजली दरों पर पड़ेगा।
वर्तमान में बिजली उत्पादन व खपत की स्थिति
प्रदेश में अभी 17 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। गर्मियों में 15,500 मेगावाट बिजली की डिमांड पहुंच जाती है। वर्तमान में 8 से 9 हजार मेगावाट बिजली की डिमांड चल रही है। इसमें गुजरात स्थित मुंद्रा थर्मल पावर प्लांट से 1424 मेगावाट बिजली आपूर्ति शामिल है।
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- साल 2008 में 1424 मेगावाट बिजली आपूर्ति का 25 साल के लिए गुजरात स्थित मुंद्रा थर्मल पावर प्लांट से समझौता हुआ था
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने अडानी पावर लिमिटेड के गुजरात स्थित मुंद्रा थर्मल पावर प्लांट से जुड़े बिजली खरीद समझौते (पीपीए) को लेकर विवादों की जांच के लिए तीन सदस्यीय एक उच्च स्तरीय समिति (हाईपावर कमेटी) का गठन किया है। इस संबंध में प्रदेश के ऊर्जा विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी की है जिसके तहत कमेटी को आगामी छह माह में समस्या के समाधान की विस्तृत रिपोर्ट देनी है।
अधिसूचना के अनुसार जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी होंगे। इसके अतिरिक्त केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के पूर्व चेयरमैन एसएस दुबे और हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के सेवानिवृत्त चेयरमैन टीसी गुप्ता सदस्य होंगे। सरकार ने इन्हें इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष और व्यावहारिक समाधान सुझाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
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सरकार का अधिकार सुरक्षित
इस प्रक्रिया के लिए हरियाणा पावर यूटिलिटी के मुख्य अभियंता को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार इस जांच प्रक्रिया के बावजूद किसी भी समय आगे की कार्रवाई करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखती है। अधिसूचना के मुताबिक कमेटी अडानी पावर और हरियाणा डिस्कॉम के बीच हुए पीपीए से जुड़े सभी दस्तावेजों और तथ्यों की गहन जांच करेगी। आवश्यकतानुसार दोनों पक्षों से अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण मांगने का अधिकार भी कमेटी को दिया गया है। कमेटी विशेष रूप से अडानी पावर को वास्तव में क्या आर्थिक नुकसान हुआ, बिजली उत्पादन व आपूर्ति की वास्तविक लागत कितनी रही, भुगतान सुरक्षा तंत्र से जुड़े विवाद, दोनों पक्षों के लंबित दावे और प्रतिदावे, मौजूदा टैरिफ पर पीपीए की दीर्घकालिक व्यवहारिकता आदि की जांच-पड़ताल करेगी।
2008 का समझौता और विवाद की जड़
अडानी पावर और हरियाणा सरकार के बीच 2008 में 1424 मेगावाट बिजली आपूर्ति का समझौता हुआ था। इसमें 25 वर्षों के लिए 2.94 रुपये प्रति यूनिट की दर तय की गई थी। यह विवाद उस समय गहराया जब अडानी पावर ने 2017-18 के दौरान यह दलील दी कि इंडोनेशिया से आयात होने वाले कोयले की कीमतों में अचानक भारी वृद्धि होने के कारण बिजली उत्पादन लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई और तय दर पर बिजली आपूर्ति करना कंपनी के लिए घाटे का सौदा बन गया। इसके बाद अडानी पावर ने अतिरिक्त भुगतान और टैरिफ राहत की मांग शुरू की हालांकि 11 अप्रैल 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि इंडोनेशिया के कोयला नियमों के कारण समझाैते में बदलाव नहीं किया जा सकता है।
हरियाणा सरकार की दलील
हरियाणा सरकार और उसकी डिस्कॉम ने अलग रुख अपनाते हुए वर्ष 2019 से लगातार यह कहा कि पीपीए तय शर्तों पर हुआ था और किसी भी सूरत में बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जा सकता। सरकार का स्पष्ट मत रहा है कि अगर अतिरिक्त भुगतान किया गया तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की बिजली दरों पर पड़ेगा।
वर्तमान में बिजली उत्पादन व खपत की स्थिति
प्रदेश में अभी 17 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। गर्मियों में 15,500 मेगावाट बिजली की डिमांड पहुंच जाती है। वर्तमान में 8 से 9 हजार मेगावाट बिजली की डिमांड चल रही है। इसमें गुजरात स्थित मुंद्रा थर्मल पावर प्लांट से 1424 मेगावाट बिजली आपूर्ति शामिल है।
