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ओलंपिक-2036 व कॉमनवेल्थ-2030 खेलों में राज्य को सह मेजबान बनाएं : दीपेंद्र
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने लोकसभा में पूछा है कि क्या हरियाणा ओलंपिक-2036 और कॉमनवेल्थ-2030 खेलों के लिए मेजबान या सह मेजबान बनने के प्रयास कर रहा है। इस पर केंद्र सरकार ने जवाब दिया कि हरियाणा ने ओलंपिक-2036 की मेजबानी के लिए कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। हुड्डा ने ओलंपिक व कॉमनवेल्थ खेलों में राज्य को सह मेजबान बनाने की मांग उठाई है।
हुड्डा ने कहा कि हरियाणा अपने खिलाड़ियों के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन और पदकों के बावजूद खेल अवसंरचना में पिछड़ा हुआ है। उन्होंने याद दिलाया कि 1982 एशियन गेम्स और 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान दिल्ली में बड़े पैमाने पर विकास हुआ जिसका लाभ हरियाणा को भी मिला। अब जब गुजरात ने 2036 के ओलंपिक का प्रस्ताव दिया है तो प्रदेश के खिलाड़ी जर्जर ढांचों में अभ्यास करने को मजबूर हैं।
हुड्डा ने मांग की कि हरियाणा को तुरंत सह मेजबान या प्रमुख स्थल के रूप में प्रस्तावित किया जाए। साथ ही प्रदेश में विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना और ओलंपिकस्तरीय स्टेडियम के लिए विशेष पैकेज घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा खेलों में भारत के लिए सबसे बड़ा योगदान देता है लेकिन प्रदेश सरकार की चुप्पी और अक्षमता के कारण राज्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का मौका गंवाया जा रहा है। सांसद ने सरकार से पूछा कि क्या हरियाणा के उत्कृष्ट खेल रिकॉर्ड और पदकों को देखते हुए इसे किसी भी श्रेणी में मेजबान या सह मेजबान बनाने के लिए गंभीरता से विचार किया गया है।
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हुड्डा ने कहा कि हरियाणा अपने खिलाड़ियों के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन और पदकों के बावजूद खेल अवसंरचना में पिछड़ा हुआ है। उन्होंने याद दिलाया कि 1982 एशियन गेम्स और 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान दिल्ली में बड़े पैमाने पर विकास हुआ जिसका लाभ हरियाणा को भी मिला। अब जब गुजरात ने 2036 के ओलंपिक का प्रस्ताव दिया है तो प्रदेश के खिलाड़ी जर्जर ढांचों में अभ्यास करने को मजबूर हैं।
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हुड्डा ने मांग की कि हरियाणा को तुरंत सह मेजबान या प्रमुख स्थल के रूप में प्रस्तावित किया जाए। साथ ही प्रदेश में विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना और ओलंपिकस्तरीय स्टेडियम के लिए विशेष पैकेज घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा खेलों में भारत के लिए सबसे बड़ा योगदान देता है लेकिन प्रदेश सरकार की चुप्पी और अक्षमता के कारण राज्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का मौका गंवाया जा रहा है। सांसद ने सरकार से पूछा कि क्या हरियाणा के उत्कृष्ट खेल रिकॉर्ड और पदकों को देखते हुए इसे किसी भी श्रेणी में मेजबान या सह मेजबान बनाने के लिए गंभीरता से विचार किया गया है।