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रेल ट्रैक हादसों में युवा गंवा रहे जान: रात 6 से सुबह 6 बजे के बीचअधिक एक्सीडेंट, रोहतक पीजीआई की स्टडी
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 17 Feb 2026 03:24 PM IST
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सार
आयु वर्ग के विश्लेषण से पता चला कि 21 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में सबसे अधिक 32 मौतें (52.45 प्रतिशत) हुईं। इसके बाद 41 से 60 वर्ष के 20 मामले (32.78 प्रतिशत) सामने आए। 0 से 20 वर्ष आयु वर्ग में 6 (9.83 प्रतिशत) और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में केवल 3 (4.91 प्रतिशत) मौतें दर्ज की गईं।
रेल ट्रैक हादसे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रेलवे ट्रैक हादसे में सबसे ज्यादा युवाओं की जानें जा रही हैं। ये युवा चलती ट्रेन से गिरने, चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश, अनधिकृत स्थानों पर ट्रैक पार करने या ट्रैक पर चलने के कारण रेल हादसों के शिकार हो रहे हैं।
आधे से अधिक हादसे रात 6 बजे से सुबह 6 बजे के बीच हुए हैं। यह खुलासा रोहतक पीजीआई के फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग की एक अध्ययन में हुआ है। यह अध्ययन दो वर्षों (1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2023) के दौरान किए गए पोस्टमार्टम मामलों के विश्लेषण पर आधारित है।
अध्ययन के अनुसार, इस अवधि में विभाग में कुल 2,983 मेडिकोलीगल पोस्टमार्टम किए गए, जिनमें से 61 मामले (लगभग 2.04 प्रतिशत) रेलवे ट्रैक से जुड़े हादसों के थे। साल 2022 में 30 और साल 2023 में 31 मौतें दर्ज की गईं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, दोनों वर्षों में रेलवे से संबंधित मौतों का अनुपात लगभग समान रहा, जो इस समस्या की निरंतरता को दर्शाता है।
आयु वर्ग के विश्लेषण से पता चला कि 21 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में सबसे अधिक 32 मौतें (52.45 प्रतिशत) हुईं। इसके बाद 41 से 60 वर्ष के 20 मामले (32.78 प्रतिशत) सामने आए। 0 से 20 वर्ष आयु वर्ग में 6 (9.83 प्रतिशत) और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में केवल 3 (4.91 प्रतिशत) मौतें दर्ज की गईं। शोधकर्ताओं के अनुसार, 21–40 वर्ष का वर्ग आर्थिक रूप से सक्रिय और अधिक यात्रा करने वाला होता है, जिससे रेलवे वातावरण में उनके संपर्क और जोखिम की संभावना बढ़ जाती है।
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आधे से अधिक हादसे रात 6 बजे से सुबह 6 बजे के बीच हुए हैं। यह खुलासा रोहतक पीजीआई के फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग की एक अध्ययन में हुआ है। यह अध्ययन दो वर्षों (1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2023) के दौरान किए गए पोस्टमार्टम मामलों के विश्लेषण पर आधारित है।
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अध्ययन के अनुसार, इस अवधि में विभाग में कुल 2,983 मेडिकोलीगल पोस्टमार्टम किए गए, जिनमें से 61 मामले (लगभग 2.04 प्रतिशत) रेलवे ट्रैक से जुड़े हादसों के थे। साल 2022 में 30 और साल 2023 में 31 मौतें दर्ज की गईं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, दोनों वर्षों में रेलवे से संबंधित मौतों का अनुपात लगभग समान रहा, जो इस समस्या की निरंतरता को दर्शाता है।
पुरुषों की मृत्यु दर अत्यधिक
अध्ययन में सबसे प्रमुख निष्कर्ष यह रहा कि रेलवे ट्रैक हादसों में पुरुषों की मृत्यु दर अत्यधिक अधिक है। कुल 61 मृतकों में से 59 पुरुष (96.72 प्रतिशत) और केवल 2 महिलाएं (3.28 प्रतिशत) थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुषों की अधिक आवाजाही, रोजगार संबंधी यात्रा, जोखिमपूर्ण व्यवहार तथा चलती ट्रेन में चढ़ने-उतरने जैसी प्रवृत्तियां इस अंतर का प्रमुख कारण हो सकती हैं।आयु वर्ग के विश्लेषण से पता चला कि 21 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में सबसे अधिक 32 मौतें (52.45 प्रतिशत) हुईं। इसके बाद 41 से 60 वर्ष के 20 मामले (32.78 प्रतिशत) सामने आए। 0 से 20 वर्ष आयु वर्ग में 6 (9.83 प्रतिशत) और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में केवल 3 (4.91 प्रतिशत) मौतें दर्ज की गईं। शोधकर्ताओं के अनुसार, 21–40 वर्ष का वर्ग आर्थिक रूप से सक्रिय और अधिक यात्रा करने वाला होता है, जिससे रेलवे वातावरण में उनके संपर्क और जोखिम की संभावना बढ़ जाती है।