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मकर संक्रांति पर्व के दिन तिल का दान होगा श्रेष्ठ : डॉ. मनोज
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 12 Jan 2026 02:07 AM IST
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झोझू कलां। मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को पूरे देश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन मकर राशि में सूर्य का आना बड़ा शुभ होता है और धनु राशि की मंद गति को छोड़कर सूर्य दोबारा अपनी सामान्य गति में प्रवेश करता है। शास्त्रों में इसे उत्तरायण का नाम भी दिया जाता है। आचार्य डॉ. मनोज शास्त्री बलाली ने बताया कि इस बार संयोग से इस दिन एकादशी भी है और मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान किया जाता है। ऐसे में एकादशी होने के कारण इस दिन खिचड़ी दान करने को लेकर संशय की स्थिति बन जाती है। शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार तिल का दान श्रेष्ठ है। ऐसे में मकर संक्रांति पर तिल व इससे बने हुए लड्डू, रेवड़ी, मूंगफली या कोई भी ऋतु अनुसार फल का दान कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि जरूरतमंदों को गर्म वस्त्र दान किए जा सकते हैं। साथ ही अन्न का भी दान करना चाहते हैं तो 14 जनवरी को संकल्प कर रख लें और अगले दिन द्वादशी 15 जनवरी को दान करें। मकर संक्रांति पर्व पर सूर्य की प्रसन्नता के लिए सूर्य यज्ञ किया जा सकता है।
डॉ. मनोज शास्त्री बलाली ने बताया कि एकादशी बुधवार को अनुराधा नक्षत्र होने के चलते आने वाला वर्ष काफी उत्तम होगा। किसानों के लिए यह बड़ा लाभदायी रहेगा। रबी व खरीफ दोनों ही फसलें उत्तम होंगी।
डा. मनोज ने बताया कि यह एक प्राकृतिक घटना है और पौराणिक काल से ही इस दिन को शास्त्रों में विशेष महत्व दिया जाता है। ऋषि-मुनि इस दिन त्रिवेणी व संगम या बड़ी नदियों में स्नान करते थे और गृहस्थजन अनेक प्रकार का दान कर पुण्य प्राप्त करते थे। इस दिन किए गए दान का विशेष महत्व है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने सामर्थ्य के अनुसार कुछ न कुछ दान करें। साथ ही युवाओं को भी संस्कृति से जोड़ने के लिए जागरूक किया जाए।
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उन्होंने बताया कि जरूरतमंदों को गर्म वस्त्र दान किए जा सकते हैं। साथ ही अन्न का भी दान करना चाहते हैं तो 14 जनवरी को संकल्प कर रख लें और अगले दिन द्वादशी 15 जनवरी को दान करें। मकर संक्रांति पर्व पर सूर्य की प्रसन्नता के लिए सूर्य यज्ञ किया जा सकता है।
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डॉ. मनोज शास्त्री बलाली ने बताया कि एकादशी बुधवार को अनुराधा नक्षत्र होने के चलते आने वाला वर्ष काफी उत्तम होगा। किसानों के लिए यह बड़ा लाभदायी रहेगा। रबी व खरीफ दोनों ही फसलें उत्तम होंगी।
डा. मनोज ने बताया कि यह एक प्राकृतिक घटना है और पौराणिक काल से ही इस दिन को शास्त्रों में विशेष महत्व दिया जाता है। ऋषि-मुनि इस दिन त्रिवेणी व संगम या बड़ी नदियों में स्नान करते थे और गृहस्थजन अनेक प्रकार का दान कर पुण्य प्राप्त करते थे। इस दिन किए गए दान का विशेष महत्व है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने सामर्थ्य के अनुसार कुछ न कुछ दान करें। साथ ही युवाओं को भी संस्कृति से जोड़ने के लिए जागरूक किया जाए।