{"_id":"6a5fd1bff339820c080f5f8f","slug":"farmers-unique-ids-stalled-due-to-glitches-in-the-online-land-portal-charkhi-dadri-news-c-126-1-shsr1012-158007-2026-07-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: जमीन के ऑनलाइन पोर्टल में खामियों की वजह से अटकी किसानों की यूनिक आईडी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: जमीन के ऑनलाइन पोर्टल में खामियों की वजह से अटकी किसानों की यूनिक आईडी
Wed, 22 Jul 2026 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 22 Jul 2026 01:38 AM IST
विज्ञापन
गांव ढाणी फोगाट का क्षेत्र।
- फोटो : 1
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चरखी दादरी। एग्री स्टैक यानी किसानों की जमीन की यूनिक आईडी छह माह बीतने के बाद कई गांवों में नहीं बन सकी है। इन गांवों के जमीनी ऑनलाइन रिकॉर्ड में खामियां हैं। इस संबंध में कृषि विभाग की ओर से मुख्यालय को लिखे गए पत्र का अब तक जवाब नहीं मिला है। अब कृषि विभाग मुख्यालय को स्मरण-पत्र लिखने जा रहा है। करीब छह माह से यूनिक आईडी बनाने की प्रक्रिया जारी है।
जिले में करीब 67 हजार किसान हैं। कई गांवों में चकबंदी न होने से किसान जमीन की यूनिक आईडी बनवाने के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। आने वाले समय में यूनिक आईडी से ही किसानों को सरकारी योजनाओं की सुविधाएं मिलनी हैं। वहीं यूनिक आईडी बनाने के लिए 92 नए व 36 पुराने पटवारियों को दायित्व सौंप रखा है। सरकार ने गत दिनों पंचायत विभाग से वापस लेकर राजस्व विभाग को यह काम सौंपा है। गांव स्तर पर पटवारी किसानों से संपर्क कर यूनिक आईडी बना रहे हैं। भविष्य में यूनिक आईडी किसान की पहचान बनेगी। सरकारी योजनाओं का लाभ यूनिक आईडी के आधार ही दिए जाने की योजना प्रस्तावित है।
जिले में छह माह से यूनिक आईडी बनाने का काम जारी है लेकिन जिले के काफी गांवों में किसानों की एग्री स्टैक यानी जमीन की यूनिक आईडी नहीं बनी है। जिन गांवों में चकबंदी नहीं हुई है वहां रिकॉर्ड में नाम, पिता का नाम व अन्य विवरण का आधार कार्ड से मिलान न होने से यूनिक आईडी नहीं बन पा रही है। सरकार की योजना है कि किसान को सभी प्रकार की सरकारी योजनाओं के लाभ यूनिक आईडी से दिए जाए। इस पर चिंतन किया जा रहा है। ऐसे में किसान परेशान एवं दुविधा में हैं।
विज्ञापन
जनवरी माह में शुरू किया गया था यूनिक आईडी बनाने का काम शुरू
गत जनवरी माह में कृषि विभाग ने किसानों की एग्री यूनिक आईडी बनाने का काम शुरू किया था जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है। जिन गांवों में चकबंदी नहीं हुई है वहां जमीन के रिकॉर्ड में नाम व पिता के नाम आधार कार्ड के अनुरूप नहीं हैं। किसी किसान के नाम के आगे सिंह नहीं हैं तो किसी के आगे कुमार नहीं है। ऐसे में आधार कार्ड से जमीन के विवरण का मिलान नहीं हो पा रहा है। गांव ढाणी फोगाट की कृषि जमीन के ऑनलाइन पोर्टल में अनेक खामियां हैं। इसी प्रकार गांव गुडाना सहित अन्य कई गांवों में भी चकबंदी न होने से यूनिक आईडी बनने में दिक्कतें आ रही हैं। अब तक 67 हजार में से करीब 50 हजार किसानों की यूनिक आईडी बन चुकी हैं।
यूनिक आईडी बनने के बाद दिखेगा जमीन का पूरा विवरण ऑनलाइन
सरकार ने मकानों एवं प्लॉट की प्रॉपर्टी आईडी बनाने के बाद अब खेती की जमीन की भी प्रत्येक किसान की यूनिक आईडी बनाने का काम शुरू कर रखा है। यूनिक आईडी के माध्यम से किसान को उसकी जमीन का पूरा विवरण ऑनलाइन देखने को मिलेगा। किसान को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी। आईडी बनने से किसान के हिस्से में मौजूद पूरी जमीन दर्शाई जाएगी। जमीन की रजिस्ट्री बनवाने, खरीद एवं फरोख्त करने में सुगमता हो सकेगी। किसान का अपना अलग हिस्सा दिखाई देगा।
किसानों की खतूनी इकट्ठी होने से बन रहा है विवाद का कारण
अधिकतर गांवों में किसानों की खतूनी इकट्ठी हैं ऐसे में उन परिवारों को काफी दिक्कतें आ रही है। खतूनी इकट्ठी होने की वजह से कई बार आपसी विवाद भी होते रहते हैं। सरकार की ओर से जब इस जमीन का अधिग्रहण किया जाता है तो मिलने वाले मुआवजा के बंटवारे की वजह से भी जमीन के हिस्सेदारों में विवाद होते रहे हैं। अब यूनिक आईडी बनने से यह दिक्कत काफी हद तक दूर हो जाएगी। कृषि व राजस्व विभाग के कर्मचारी गांवों में जाकर किसानों की आईडी बना रहे हैं। आईडी बनवाने के लिए आधार कार्ड, मोबाइल नंबर की जरूरत होती है। कई गांवों में जमाबंदी और आधार कार्ड में किसान का नाम एक जैसा नहीं होने की वजह से भी दिक्कत बन रही है। किसानों ने इस समस्या का विकल्प तलाशने की मांग की है।
वर्सन :::
हमारे गांव में एक भी किसान की यूनिक आईडी नहीं बनी है। उम्मीद है कि विभाग जल्द ही किसानों की तकनीकी दिक्कतों को दूर करवा आईडी बनाने का काम करेगा। ताकि किसानों को विभाग की योजनाओं का लाभ मिल सके।-- डिंपल देवी, सरपंच ग्राम पंचायत ढाणी फोगाट।
वर्सन ::::
किसानों की यूनिक आईडी पोर्टल संबंधी समस्या को दूर करवाने के लिए विभाग के निदेशक को दोबारा पत्र लिखा जा रहा है। जल्द इस समस्या का समाधान होगा। किसानों को यूनिक आईडी बनवाने में दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। जल्द ही इस काम को सिरे चढ़ाया जाएगा।-- कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग।
विज्ञापन
जिले में करीब 67 हजार किसान हैं। कई गांवों में चकबंदी न होने से किसान जमीन की यूनिक आईडी बनवाने के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। आने वाले समय में यूनिक आईडी से ही किसानों को सरकारी योजनाओं की सुविधाएं मिलनी हैं। वहीं यूनिक आईडी बनाने के लिए 92 नए व 36 पुराने पटवारियों को दायित्व सौंप रखा है। सरकार ने गत दिनों पंचायत विभाग से वापस लेकर राजस्व विभाग को यह काम सौंपा है। गांव स्तर पर पटवारी किसानों से संपर्क कर यूनिक आईडी बना रहे हैं। भविष्य में यूनिक आईडी किसान की पहचान बनेगी। सरकारी योजनाओं का लाभ यूनिक आईडी के आधार ही दिए जाने की योजना प्रस्तावित है।
विज्ञापन
जिले में छह माह से यूनिक आईडी बनाने का काम जारी है लेकिन जिले के काफी गांवों में किसानों की एग्री स्टैक यानी जमीन की यूनिक आईडी नहीं बनी है। जिन गांवों में चकबंदी नहीं हुई है वहां रिकॉर्ड में नाम, पिता का नाम व अन्य विवरण का आधार कार्ड से मिलान न होने से यूनिक आईडी नहीं बन पा रही है। सरकार की योजना है कि किसान को सभी प्रकार की सरकारी योजनाओं के लाभ यूनिक आईडी से दिए जाए। इस पर चिंतन किया जा रहा है। ऐसे में किसान परेशान एवं दुविधा में हैं।
विज्ञापन
जनवरी माह में शुरू किया गया था यूनिक आईडी बनाने का काम शुरू
गत जनवरी माह में कृषि विभाग ने किसानों की एग्री यूनिक आईडी बनाने का काम शुरू किया था जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है। जिन गांवों में चकबंदी नहीं हुई है वहां जमीन के रिकॉर्ड में नाम व पिता के नाम आधार कार्ड के अनुरूप नहीं हैं। किसी किसान के नाम के आगे सिंह नहीं हैं तो किसी के आगे कुमार नहीं है। ऐसे में आधार कार्ड से जमीन के विवरण का मिलान नहीं हो पा रहा है। गांव ढाणी फोगाट की कृषि जमीन के ऑनलाइन पोर्टल में अनेक खामियां हैं। इसी प्रकार गांव गुडाना सहित अन्य कई गांवों में भी चकबंदी न होने से यूनिक आईडी बनने में दिक्कतें आ रही हैं। अब तक 67 हजार में से करीब 50 हजार किसानों की यूनिक आईडी बन चुकी हैं।
यूनिक आईडी बनने के बाद दिखेगा जमीन का पूरा विवरण ऑनलाइन
सरकार ने मकानों एवं प्लॉट की प्रॉपर्टी आईडी बनाने के बाद अब खेती की जमीन की भी प्रत्येक किसान की यूनिक आईडी बनाने का काम शुरू कर रखा है। यूनिक आईडी के माध्यम से किसान को उसकी जमीन का पूरा विवरण ऑनलाइन देखने को मिलेगा। किसान को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी। आईडी बनने से किसान के हिस्से में मौजूद पूरी जमीन दर्शाई जाएगी। जमीन की रजिस्ट्री बनवाने, खरीद एवं फरोख्त करने में सुगमता हो सकेगी। किसान का अपना अलग हिस्सा दिखाई देगा।
किसानों की खतूनी इकट्ठी होने से बन रहा है विवाद का कारण
अधिकतर गांवों में किसानों की खतूनी इकट्ठी हैं ऐसे में उन परिवारों को काफी दिक्कतें आ रही है। खतूनी इकट्ठी होने की वजह से कई बार आपसी विवाद भी होते रहते हैं। सरकार की ओर से जब इस जमीन का अधिग्रहण किया जाता है तो मिलने वाले मुआवजा के बंटवारे की वजह से भी जमीन के हिस्सेदारों में विवाद होते रहे हैं। अब यूनिक आईडी बनने से यह दिक्कत काफी हद तक दूर हो जाएगी। कृषि व राजस्व विभाग के कर्मचारी गांवों में जाकर किसानों की आईडी बना रहे हैं। आईडी बनवाने के लिए आधार कार्ड, मोबाइल नंबर की जरूरत होती है। कई गांवों में जमाबंदी और आधार कार्ड में किसान का नाम एक जैसा नहीं होने की वजह से भी दिक्कत बन रही है। किसानों ने इस समस्या का विकल्प तलाशने की मांग की है।
वर्सन :::
हमारे गांव में एक भी किसान की यूनिक आईडी नहीं बनी है। उम्मीद है कि विभाग जल्द ही किसानों की तकनीकी दिक्कतों को दूर करवा आईडी बनाने का काम करेगा। ताकि किसानों को विभाग की योजनाओं का लाभ मिल सके।
वर्सन ::::
किसानों की यूनिक आईडी पोर्टल संबंधी समस्या को दूर करवाने के लिए विभाग के निदेशक को दोबारा पत्र लिखा जा रहा है। जल्द इस समस्या का समाधान होगा। किसानों को यूनिक आईडी बनवाने में दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। जल्द ही इस काम को सिरे चढ़ाया जाएगा।