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Charkhi Dadri News: पिछले 7 दिनों में 80 प्रतिशत किसानों ने निजी तो 20% किसानों ने एमएसपी पर बेची सरसों

संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Mon, 06 Apr 2026 01:41 AM IST
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In the last 7 days, 80% of farmers sold mustard privately and 20% sold it at MSP.
मंडी में सूखते हुई सरसों की फसल।
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चरखी दादरी। 28 मार्च से जिले के चार खरीद केंद्रों पर सरसों की खरीद शुरू हो गई थी। मंडियों में इन दिनों सरसों की खरीद को लेकर स्पष्ट रूप से किसानों का रुझान निजी खरीद की ओर झुका हुआ नजर आ रहा है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो यह साफ हो जाता है कि सरकारी खरीद केंद्रों के बजाय किसान निजी व्यापारियों को सरसों बेचने में अधिक दिलचस्पी दिखा रहे हैं। किसानों के निजी खरीद की ओर झुकाव के पीछे सबसे बड़ा कारण बाजार में मिल रहा अधिक भाव है।
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वर्तमान में निजी व्यापारियों की ओर से सरसों का भाव करीब 6800 रुपये प्रति क्विंटल तक दिया जा रहा है जबकि सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य 6200 रुपये है। ऐसे में आढ़तियों को सरसों बेचने में खासा मूल्य मिल रहा है। ऐसे में किसान सीधे भुगतान और बेहतर दाम के कारण निजी खरीदारों को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सरकारी खरीद के लिए किसानों में एक तरह का भय भी देखने को मिल रहा है। कई किसानों का कहना है कि पहले जब फसल के भुगतान सीधे उनके खातों में आए तो उनकी पेंशन बंद हो जाने का डर है। इसी आशंका के चलते अब किसान सरकारी खरीद से दूरी बना रहे हैं।
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28 मार्च से 4 अप्रैल तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 982 किसानों ने निजी खरीद केंद्रों पर अपनी सरसों बेची जबकि सरकारी खरीद केंद्रों पर यह संख्या मात्र 232 किसानों तक सीमित रही। यानी करीब 80 प्रतिशत से अधिक किसान निजी खरीद को प्राथमिकता दे रहे हैं जबकि महज लगभग 20 प्रतिशत किसान ही सरकारी खरीद की ओर रुख कर रहे हैं।



30 हजार क्विंटल की निजी खरीद
दादरी जिले की विभिन्न मंंडियों में 28 मार्च से 4 अप्रैल के बीच 7 दिनों के खरीद की मात्रा के आधार पर तुलना करें तो अंतर और भी बड़ा नजर आता है। इस अवधि में निजी केंद्रों पर कुल 30,360 क्विंटल सरसों की खरीद हुई, जबकि सरकारी केंद्रों पर यह आंकड़ा करीब 14,636 क्विंटल ही रहा। इससे स्पष्ट है कि निजी बाजार में खरीद का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है।

28 मार्च से 4 अप्रैल के बीच 7 दिन की खरीद का आंकड़ा।

दिनांक निजी खरीद (किसान-खरीद) सरकारी खरीद(किसान-खरीद )
4 अप्रैल 155 किसान से 4159 क्विंटल 18 किसान से 458 क्विंटल
3 अप्रैल 90 किसान से 2657 क्विंटल 23 किसान से 5279 क्विंटल

2 अप्रैल 114 किसान से 2862 क्विंटल 32 किसान से 776 क्विंटल

1 अप्रैल 295 किसान से 7944 क्विंटल 24 किसान से 3946 क्विंटल

31 मार्च 172 किसान से 4822 क्विंटल 40 किसान से 908 क्विंटल

30 मार्च 57 किसान से 5589 क्विंटल 58 किसान से 2255 क्विंटल

28 मार्च 99 किसान से 2327 क्विंटल 37 किसान से 1014 क्विंटल
नोट: उपरोक्त आंकड़ा क्विंटल में हैं।



पिछले सीजन में जब फसल बेची ताे मेरी और मेरी पत्नी की पेंशन कट गई थी जिसके बाद काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इसलिए इस बार फसल निजी खरीदारों को बेची है, ताकि ऐसी समस्या न हो।
- उमराव सिंह, किसान, निवासी बेरला।


मंडी में सरकारी मूल्य पर 6200 रुपये का भाव मिल रहा है, जबकि 40 प्रतिशत गुणवत्ता की सरसों की फसल आढ़ती 6700 से 6800 रुपये प्रति क्विंटल खरीद रहे हैं। ऐसे में प्राइवेट फसल बेची है।
- पवन कुमार किसान, निवासी सांवड़।

3 अप्रैल को सरकारी खरीद हुई ज्यादा
दिनवार आंकड़ों में भी यही ट्रेंड देखने को मिलता है। 4 अप्रैल को जहां 155 किसानों ने 4159 क्विंटल सरसों निजी केंद्रों पर बेची, वहीं केवल 18 किसानों ने 458 क्विंटल सरसों सरकारी केंद्रों पर बेची। इसी तरह 3 अप्रैल को 90 किसानों ने 2657 क्विंटल निजी बिक्री की जबकि सरकारी खरीद में 23 किसानों की 5279 क्विंटल खरीद दर्ज हुई, जो अपवाद के तौर पर एक दिन अधिक रही। इसके पीछे कारण नमी और हल्की बरसात रही।
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