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Fatehabad News: तकनीक से खेती करने, खेल के मैदान तक युवाओं ने लिखा सफलता का अध्याय
Tue, 11 Aug 2026 11:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 11 Aug 2026 11:25 PM IST
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सुरेंद्र जाखड़ साइकिलिंग कोच।
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फतेहाबाद। जिले के युवाओं ने तकनीकी खेती से लेकर खेल के मैदान तक अपनी प्रतिभा, मेहनत और नई सोच के दम पर सफलता की मिसाल कायम की है। सीमित संसाधनों के बावजूद आधुनिक तकनीक और हुनर को ताकत बनाकर इन युवाओं ने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि दूसरे युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बने हैं।
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पांच फीट तक लंबी घीया उगाकर कमा रहे लाखों
गांव भूथन खुर्द के युवा किसान रवि पुनिया ने पारंपरिक खेती से हटकर तकनीकी खेती अपनाई है। उन्होंने शिवानी किस्म की घीया की खेती शुरू की, जिसकी लंबाई करीब पांच फीट तक पहुंच रही है। इससे उन्हें बेहतर उत्पादन के साथ अच्छा मुनाफा मिल रहा है। रवि ने बताया कि पहले पारंपरिक फसलों में लागत और मेहनत के मुकाबले आमदनी सीमित थी। इसके बाद उन्होंने उन्नत किस्म और आधुनिक तकनीक अपनाई। पौधों की देखभाल, सिंचाई, खाद और रोग नियंत्रण पर ध्यान देने से उत्पादन व गुणवत्ता में सुधार हुआ। वह घीया की खेती से सालाना लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं।
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14 वातानुकूलित कक्षों में मशरूम उत्पादन
आकांवाली गांव के किसान अवतार सिंह ने करीब आठ वर्ष पहले छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू किया था। अब आधुनिक तकनीक और अनुभव के बल पर उन्होंने इसे बड़े व्यवसाय का रूप दे दिया है। दो एकड़ जमीन में 14 वातानुकूलित कक्ष स्थापित किए हैं जहां तापमान और नमी नियंत्रित कर मौसम के अनुसार मशरूम उत्पादन किया जाता है। बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए सोलर सिस्टम भी लगाया है। इससे खर्च कम होने के साथ पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल रही है। अवतार सिंह सालाना करीब आठ लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। उनका कहना है कि कम जमीन में मशरूम उत्पादन अच्छी आमदनी का जरिया बन सकता है।
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भारतीय साइकिलिंग टीम के प्रशिक्षक बने सुरेंद्र
बनगांव के सुरेंद्र जाखड़ ने साइकिलिंग में गांव से विश्वस्तर तक पहचान बनाई है। वर्ष 2017 में पटियाला स्थित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान से एक वर्षीय डिप्लोमा करने के बाद उनका चयन एशियन साइकिलिंग चैंपियनशिप में प्रशिक्षक के रूप में हुआ। वर्ष 2021 तक कर्नाटक में प्रशिक्षक रहने के बाद पिछले तीन वर्षों से भारतीय साइकिलिंग टीम के साथ कार्य कर रहे हैं। फिलहाल वह तमिलनाडु में तैनात हैं। वह भारतीय टीम को लगातार पदक दिलाने में योगदान दे रहे हैं और अब तक 100 से अधिक युवाओं को पदक दिला चुके हैं। छुट्टियों में गांव व आसपास की निजी अकादमियों में युवाओं को साइकिलिंग के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके पास विशेष साइकिल तक नहीं थी और कई वर्षों की मेहनत के बाद अपनी साइकिल खरीदी।
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एक एकड़ में गेंदा उगाकर तीन लाख का मुनाफा
गांव खजूरी के युवा प्रगतिशील किसान अनूप ने परंपरागत फसलों के बजाय फूलों की खेती को अपनाया है। वह एक एकड़ में गेंदा उगाकर सालाना करीब तीन लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। शादी-विवाह, धार्मिक आयोजनों और स्वागत समारोहों में गेंदा की मांग अधिक रहती है। अनूप अपनी फसल दिल्ली, गुरुग्राम और रेवाड़ी की मंडियों में बेचते हैं। इन युवाओं की उपलब्धियां साबित करती हैं कि नई सोच, तकनीक और निरंतर मेहनत से कृषि और खेल दोनों क्षेत्रों में बेहतर अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
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पांच फीट तक लंबी घीया उगाकर कमा रहे लाखों
गांव भूथन खुर्द के युवा किसान रवि पुनिया ने पारंपरिक खेती से हटकर तकनीकी खेती अपनाई है। उन्होंने शिवानी किस्म की घीया की खेती शुरू की, जिसकी लंबाई करीब पांच फीट तक पहुंच रही है। इससे उन्हें बेहतर उत्पादन के साथ अच्छा मुनाफा मिल रहा है। रवि ने बताया कि पहले पारंपरिक फसलों में लागत और मेहनत के मुकाबले आमदनी सीमित थी। इसके बाद उन्होंने उन्नत किस्म और आधुनिक तकनीक अपनाई। पौधों की देखभाल, सिंचाई, खाद और रोग नियंत्रण पर ध्यान देने से उत्पादन व गुणवत्ता में सुधार हुआ। वह घीया की खेती से सालाना लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं।
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14 वातानुकूलित कक्षों में मशरूम उत्पादन
आकांवाली गांव के किसान अवतार सिंह ने करीब आठ वर्ष पहले छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू किया था। अब आधुनिक तकनीक और अनुभव के बल पर उन्होंने इसे बड़े व्यवसाय का रूप दे दिया है। दो एकड़ जमीन में 14 वातानुकूलित कक्ष स्थापित किए हैं जहां तापमान और नमी नियंत्रित कर मौसम के अनुसार मशरूम उत्पादन किया जाता है। बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए सोलर सिस्टम भी लगाया है। इससे खर्च कम होने के साथ पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल रही है। अवतार सिंह सालाना करीब आठ लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। उनका कहना है कि कम जमीन में मशरूम उत्पादन अच्छी आमदनी का जरिया बन सकता है।
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भारतीय साइकिलिंग टीम के प्रशिक्षक बने सुरेंद्र
बनगांव के सुरेंद्र जाखड़ ने साइकिलिंग में गांव से विश्वस्तर तक पहचान बनाई है। वर्ष 2017 में पटियाला स्थित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान से एक वर्षीय डिप्लोमा करने के बाद उनका चयन एशियन साइकिलिंग चैंपियनशिप में प्रशिक्षक के रूप में हुआ। वर्ष 2021 तक कर्नाटक में प्रशिक्षक रहने के बाद पिछले तीन वर्षों से भारतीय साइकिलिंग टीम के साथ कार्य कर रहे हैं। फिलहाल वह तमिलनाडु में तैनात हैं। वह भारतीय टीम को लगातार पदक दिलाने में योगदान दे रहे हैं और अब तक 100 से अधिक युवाओं को पदक दिला चुके हैं। छुट्टियों में गांव व आसपास की निजी अकादमियों में युवाओं को साइकिलिंग के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके पास विशेष साइकिल तक नहीं थी और कई वर्षों की मेहनत के बाद अपनी साइकिल खरीदी।
एक एकड़ में गेंदा उगाकर तीन लाख का मुनाफा
गांव खजूरी के युवा प्रगतिशील किसान अनूप ने परंपरागत फसलों के बजाय फूलों की खेती को अपनाया है। वह एक एकड़ में गेंदा उगाकर सालाना करीब तीन लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। शादी-विवाह, धार्मिक आयोजनों और स्वागत समारोहों में गेंदा की मांग अधिक रहती है। अनूप अपनी फसल दिल्ली, गुरुग्राम और रेवाड़ी की मंडियों में बेचते हैं। इन युवाओं की उपलब्धियां साबित करती हैं कि नई सोच, तकनीक और निरंतर मेहनत से कृषि और खेल दोनों क्षेत्रों में बेहतर अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

सुरेंद्र जाखड़ साइकिलिंग कोच।

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