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Fatehabad News: मलेरिया व डेंगू से बचाव के लिए तालाबों में छोड़ी गंबुजिया मछली
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 10 Apr 2026 11:39 PM IST
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गांव पिरथला के तालाब में मछली छोड़ते हुए स्वास्थ्य कर्मी। कर्मचारी
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समैन। उपमंडल के 4 गांवों के तालाबों में स्वास्थ्यकर्मियों ने गंबुजिया मछली छोड़ी है। इसके छोड़ने का उद्देश्य डेंगू व मलेरिया के लारवा को पनपने से पहले ही पूरी तरह से खत्म करना है। मलेरिया आमतौर पर ज्यादा पानी वाले क्षेत्रों में होता है जहां ये मच्छर रहते हैं। गंदगी और रुके हुए पानी से भी खतरा बढ़ जाता है क्योंकि इन जगहों पर मच्छर पनपते हैं।
गांव पिरथला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत बहुउद्देशीय स्वास्थ्यकर्मी डॉक्टर दीपक मेहरा ने बताया कि इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से चार स्वास्थ्यकर्मियों की टीम गठित की गई है। स्वास्थ्य निरीक्षक सज्जन कुमार मील के नेतृत्व में टीम ने पीएचसी पिरथला के अंतर्गत आने वाले गांवों में सनियाना, ठरवा, ठरवी व बोस्ती शामिल है।
स्वास्थ्य निरीक्षक सज्जन कुमार ने बताया कि यह मछलियां मलेरिया व डेंगू मच्छर के लारवा को खाती है। इससे मच्छरों के पनपने का खतरा नहीं रहता। तालाब के पानी में इस मछली का कोई नुकसान नहीं है। बारिश के सीजन में सभी लोग अपने घरों के छत पर कोई फालतू सामान न छोड़े ताकि बारिश का पानी उनमें एकत्रित न हो। इन मच्छरों से बचाव के लिए रात को सोते समय पूरी बाजू के कपड़े पहने या मच्छरदानी का प्रयोग करें। घरों में अपने पानी के स्रोतों को ढक कर रखें ताकि उसमें मच्छर अपने अंडे न दे सके।
जिला महामारी रोकथाम विशेषज्ञ डॉ. विष्णु मित्तल ने बताया कि मलेरिया, प्लाज्मोडियम नामक छोटे परजीवी के कारण होता है। ये परजीवी संक्रमित एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलते हैं। जब मच्छर काटता है, तो परजीवी खून में चले जाते हैं। ये लीवर या फिर लाल रक्त कोशिकाओं में चले जाते हैं जहां इनकी संख्या तेजी से बढ़ती है। यह प्रक्रिया लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है, जिससे कुछ लक्षण पैदा होते हैं।
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गांव पिरथला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत बहुउद्देशीय स्वास्थ्यकर्मी डॉक्टर दीपक मेहरा ने बताया कि इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से चार स्वास्थ्यकर्मियों की टीम गठित की गई है। स्वास्थ्य निरीक्षक सज्जन कुमार मील के नेतृत्व में टीम ने पीएचसी पिरथला के अंतर्गत आने वाले गांवों में सनियाना, ठरवा, ठरवी व बोस्ती शामिल है।
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स्वास्थ्य निरीक्षक सज्जन कुमार ने बताया कि यह मछलियां मलेरिया व डेंगू मच्छर के लारवा को खाती है। इससे मच्छरों के पनपने का खतरा नहीं रहता। तालाब के पानी में इस मछली का कोई नुकसान नहीं है। बारिश के सीजन में सभी लोग अपने घरों के छत पर कोई फालतू सामान न छोड़े ताकि बारिश का पानी उनमें एकत्रित न हो। इन मच्छरों से बचाव के लिए रात को सोते समय पूरी बाजू के कपड़े पहने या मच्छरदानी का प्रयोग करें। घरों में अपने पानी के स्रोतों को ढक कर रखें ताकि उसमें मच्छर अपने अंडे न दे सके।
जिला महामारी रोकथाम विशेषज्ञ डॉ. विष्णु मित्तल ने बताया कि मलेरिया, प्लाज्मोडियम नामक छोटे परजीवी के कारण होता है। ये परजीवी संक्रमित एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलते हैं। जब मच्छर काटता है, तो परजीवी खून में चले जाते हैं। ये लीवर या फिर लाल रक्त कोशिकाओं में चले जाते हैं जहां इनकी संख्या तेजी से बढ़ती है। यह प्रक्रिया लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है, जिससे कुछ लक्षण पैदा होते हैं।