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Fatehabad News: नम आंखों से दी यशवी और खुशी को अंतिम विदाई
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 16 Jun 2026 10:53 PM IST
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भूना।यशवी और खुशी का फाइल फोटो
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भूना। राजस्थान में हुए भीषण सड़क हादसे ने भूना के शिक्षक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। गर्मी की छुट्टियां बिताने ननिहाल गईं दो मासूम बहनें, 10 वर्षीय यशवी और 6 वर्षीय खुशी, अब कभी अपने घर नहीं लौटेंगी। हादसे में दोनों बच्चियों समेत परिवार के छह सदस्यों की मौत हो गई। मंगलवार को सैकड़ों नम आंखों के बीच दोनों बहनों का अंतिम संस्कार किया गया। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
यशवी डीएवी पब्लिक स्कूल, फतेहाबाद में कक्षा पांचवीं तथा खुशी पहली कक्षा की छात्रा थी। दोनों अपनी मां बाला देवी के साथ 5 जून को छुट्टियां मनाने गांव मताना स्थित ननिहाल गई थीं। स्कूल का गृहकार्य पूरा करने के बाद वे उत्साह के साथ नानी के घर पहुंची थीं, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सड़क हादसे ने परिवार की सारी खुशियां छीन लीं।
बच्चियों के पिता संदीप कुमार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मोची चौबारा में टीजीटी साइंस शिक्षक हैं। उनका परिवार शिक्षा जगत से जुड़ा हुआ है। बड़े भाई राजकुमार सुथार और विजय कुमार भी सरकारी स्कूलों में गणित प्रवक्ता हैं। तीनों भाई संयुक्त परिवार में रहते हैं। हादसे की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
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मंगलवार को अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा। परिजनों की चीख-पुकार और महिलाओं के विलाप से हर आंख नम हो गई। बच्चियों को अंतिम विदाई देने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और ग्रामीण पहुंचे।
यशवी डीएवी पब्लिक स्कूल, फतेहाबाद में कक्षा पांचवीं तथा खुशी पहली कक्षा की छात्रा थी। दोनों अपनी मां बाला देवी के साथ 5 जून को छुट्टियां मनाने गांव मताना स्थित ननिहाल गई थीं। स्कूल का गृहकार्य पूरा करने के बाद वे उत्साह के साथ नानी के घर पहुंची थीं, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सड़क हादसे ने परिवार की सारी खुशियां छीन लीं।
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बच्चियों के पिता संदीप कुमार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मोची चौबारा में टीजीटी साइंस शिक्षक हैं। उनका परिवार शिक्षा जगत से जुड़ा हुआ है। बड़े भाई राजकुमार सुथार और विजय कुमार भी सरकारी स्कूलों में गणित प्रवक्ता हैं। तीनों भाई संयुक्त परिवार में रहते हैं। हादसे की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
मंगलवार को अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा। परिजनों की चीख-पुकार और महिलाओं के विलाप से हर आंख नम हो गई। बच्चियों को अंतिम विदाई देने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और ग्रामीण पहुंचे।