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Hisar News: काबरेल हत्याकांड में आरोपी को जमानत, नौ माह से था जेल में बंद
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sat, 21 Mar 2026 12:54 AM IST
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आदमपुर/हिसार। आदमपुर क्षेत्र के चर्चित काबरेल मारपीट व हत्या मामले में सेशन जज अलका मलिक की अदालत ने शुक्रवार को आरोपी अरुण कुमार को जमानत दे दी। गांव काबरेल निवासी अरुण कुमार पिछले करीब नौ माह से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद था। अदालत ने मामले की परिस्थितियों और आरोपी की भूमिका को देखते हुए उसे जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।
मामला 29 नवंबर 2024 का है। रूपक नामक युवक को गंभीर हालत में आदमपुर के सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया जहां 30 नवंबर को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक के पिता के बयान के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गांव काबरेल में कुछ युवकों ने रूपक को बोलेरो गाड़ी में अगवा कर लिया और लोहे की रॉड, गंडासी व अन्य हथियारों से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। पुलिस जांच के बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया गया।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील प्रवीन सिवाच ने दलील दी कि अरुण कुमार का नाम एफआईआर में नहीं है और उसकी संलिप्तता केवल सह-आरोपियों के बयान के आधार पर सामने आई है। साथ ही जांच पूरी हो चुकी है और ट्रायल लंबा चल सकता है। सरकारी पक्ष ने आरोपी को साजिश में शामिल बताते हुए जमानत का विरोध किया, लेकिन अदालत ने सीमित भूमिका और लंबी हिरासत को देखते हुए जमानत मंजूर कर ली।
मामला 29 नवंबर 2024 का है। रूपक नामक युवक को गंभीर हालत में आदमपुर के सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया जहां 30 नवंबर को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक के पिता के बयान के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
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शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गांव काबरेल में कुछ युवकों ने रूपक को बोलेरो गाड़ी में अगवा कर लिया और लोहे की रॉड, गंडासी व अन्य हथियारों से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। पुलिस जांच के बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया गया।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील प्रवीन सिवाच ने दलील दी कि अरुण कुमार का नाम एफआईआर में नहीं है और उसकी संलिप्तता केवल सह-आरोपियों के बयान के आधार पर सामने आई है। साथ ही जांच पूरी हो चुकी है और ट्रायल लंबा चल सकता है। सरकारी पक्ष ने आरोपी को साजिश में शामिल बताते हुए जमानत का विरोध किया, लेकिन अदालत ने सीमित भूमिका और लंबी हिरासत को देखते हुए जमानत मंजूर कर ली।