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Hisar News: शाैक बना चुनाैती...छोटी उम्र में धूम्रपान की लत, 40 के बाद कैंसर का खतरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 Mar 2026 12:35 AM IST
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Hobby becomes a challenge smoking addiction at a young age, risk of cancer after 40
नागरिक अस्पताल के डॉक्टर अजित सिंह लाठर
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हिसार। अब धूम्रपान की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। चिंता की बात यह है कि यह आदत केवल बड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि किशोर उम्र के बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कम उम्र में शुरू हुई स्मोकिंग आगे चलकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है और 40 वर्ष की उम्र के बाद फेफड़ों के कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हर साल 11 मार्च को नो स्मोकिंग डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर असर जैसे फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और अस्थमा के बारे में लोगों को सचेत करना है।
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जिला नागरिक अस्पताल के डॉ. अजित सिंह लाठर ने बताया कि आजकल नाबालिग बच्चे भी सिगरेट, वेप और हुक्का पीते हुए देखे जा रहे हैं। दोस्तों की संगत, सोशल मीडिया का प्रभाव और दिखावे की प्रवृत्ति के कारण कई किशोर इस आदत को अपना रहे हैं। शुरुआत में इसे फैशन या शौक के रूप में लिया जाता है लेकिन धीरे-धीरे यह निकोटिन की लत में बदल जाती है जिससे छुटकारा पाना मुश्किल हो जाता है।
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उन्होंने बताया कि धूम्रपान का सबसे अधिक असर फेफड़ों पर पड़ता है। लगातार स्मोकिंग करने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के संक्रमण जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसके अलावा हार्ट अटैक, स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के साथ रहने वाले लोग भी पैसिव स्मोकिंग के कारण इन बीमारियों के जोखिम में आ जाते हैं।
यह है पैसिव स्मोकिंग
डॉ. अजित सिंह लाठर ने बताया कि पैसिव स्मोकिंग या सेकंड-हैंड स्मोक तब होती है, जब किसी व्यक्ति द्वारा किए गए धूम्रपान का धुआं आसपास मौजूद दूसरे व्यक्ति की सांस के साथ उसके फेफड़ों में चला जाता है। यह धुआं फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और अस्थमा जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। यह बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धूम्रपान न करने वालों के लिए विशेष रूप से हानिकारक है।
जिला नागरिक अस्पताल में मिलती है काउंसिलिंग
जिला नागरिक अस्पताल में धूम्रपान की लत छोड़ने के लिए विशेष काउंसिलिंग की सुविधा उपलब्ध है। यहां डॉक्टर और काउंसलर लोगों को धूम्रपान के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करते हैं और नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके साथ ही मरीजों को एंटी-निकोटिन पैच भी दिए जाते हैं, जो धीरे-धीरे शरीर में निकोटिन की जरूरत को कम करते हैं और धूम्रपान छोड़ने में मदद करते हैं।
युवाओं को जागरूक करना जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस आदत पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में फेफड़ों और कैंसर से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या और बढ़ सकती है। इसलिए माता-पिता, शिक्षक और समाज को मिलकर बच्चों और युवाओं को धूम्रपान से दूर रहने के लिए जागरूक करना होगा।
धूम्रपान से छुटकारे के लिए इन बातों का रखें ध्यान
डॉक्टर की सलाह से निकोटिन गम, पैच या इनहेलर का इस्तेमाल करें।
सिगरेट पीने की तीव्र इच्छा होने पर 3-5 मिनट तक ध्यान भटकाने की कोशिश करें।
परिवार और दोस्तों को अपनी कोशिश के बारे में बताएं ताकि वे सहयोग कर सकें।
सुबह-शाम टहलना, योग, ध्यान या व्यायाम करें जिससे तनाव कम होता है।
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