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Hisar News: उम्मीद बनी सहारा...10 रुपये में जरूरतमंदों को भोजन
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 11 Jan 2026 12:25 AM IST
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बैठक करते उकलाना के एसएचजी के सदस्य।
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हिसार। उकलाना में उम्मीद स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) का उत्तम महिला ग्राम संगठन जरूरतमंदों के लिए सहारा बन रहा है। समूह की ओर से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत उकलाना की पुरानी अनाज मंडी में अंत्योदय कैंटीन संचालित की जा रही है, जहां मात्र 10 रुपये में ताजा और गर्मागर्म भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल से जहां जरूरतमंदों की भूख मिट रही है, वहीं महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह भी मिल रही है।
कैंटीन का संचालन गांव बुढ़ाखेड़ा निवासी आरजू ठाकन और बिमला देवी कर रही हैं, जो स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। उत्तम महिला ग्राम संगठन से कुल 12 स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं और प्रत्येक समूह में लगभग 10 सदस्य हैं। इस तरह संगठन से जुड़े करीब 120 महिलाओं के परिवारों के हित इससे प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।
समूह से जुड़ी महिलाएं नियमित बैठकें कर बचत और ऋण खातों का संचालन करती हैं। प्रत्येक नए समूह के गठन के तीन महीने बाद हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) के तहत 30 हजार रुपये चक्रीय कोष (आरएफ) के रूप में दिए जाते हैं। समूह की ओर से आंतरिक लेन-देन के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिस पर मासिक घटती दर से अधिकतम 12 प्रतिशत ब्याज लिया जाता है। जो सदस्य ब्याज चुकाने में सक्षम नहीं होती, उनसे ब्याज नहीं लिया जाता। इस तरह समूह और ग्राम संगठन की महिलाएं बचत के माध्यम से सालाना चार से पांच लाख रुपये तक की राशि एकत्र कर लेती हैं। प्रत्येक बैठक, प्रस्ताव और लेन-देन का पूरा विवरण समूह की पंजिका में दर्ज किया जाता है।
अंत्योदय कैंटीन में 10 रुपये में परोसी जाने वाली थाली पर सरकार की ओर से 25 रुपये प्रति थाली सब्सिडी दी जाती है। थाली में चावल, दाल, सब्जी और चार रोटियां शामिल होती हैं। कैंटीन संचालन के लिए किसी प्रकार का ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि प्रत्येक नए समूह को समय पर चक्रीय कोष उपलब्ध कराया जाता है।
हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीएम) वीरेंदर श्योराण और उकलाना के ब्लॉक प्रभारी सोहन कैंटीन और समूह के कार्यों की नियमित निगरानी करते हैं। कैंटीन संचालक ग्राहकों से भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था को लेकर फीडबैक भी लेते हैं, ताकि आवश्यक सुधार किए जा सकें। हाल ही में आईएएस अधिकारी कनिका गोयल ने भी इस कैंटीन का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था।
नई अनाज मंडी में भी खुले कैंटीन
नई अनाज मंडी हिसार में फिलहाल कोई कैंटीन या रेस्टोरेंट नहीं है, जबकि वहां प्रत्येक आढ़ती के पास पांच से अधिक मुंशी, सहायक और मजदूर कार्यरत रहते हैं। कैंटीन की सुविधा न होने के कारण कर्मचारियों को घर से टिफिन लाना पड़ता है, जो बरसात और गर्मी के मौसम में अक्सर खराब हो जाता है। ठंडा खाना न खा पाने की समस्या को देखते हुए मंडी से जुड़े लोगों ने स्थानीय प्रबंधन से नई अनाज मंडी में भी कैंटीन खोलने की मांग की है।
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कैंटीन का संचालन गांव बुढ़ाखेड़ा निवासी आरजू ठाकन और बिमला देवी कर रही हैं, जो स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। उत्तम महिला ग्राम संगठन से कुल 12 स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं और प्रत्येक समूह में लगभग 10 सदस्य हैं। इस तरह संगठन से जुड़े करीब 120 महिलाओं के परिवारों के हित इससे प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।
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समूह से जुड़ी महिलाएं नियमित बैठकें कर बचत और ऋण खातों का संचालन करती हैं। प्रत्येक नए समूह के गठन के तीन महीने बाद हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) के तहत 30 हजार रुपये चक्रीय कोष (आरएफ) के रूप में दिए जाते हैं। समूह की ओर से आंतरिक लेन-देन के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिस पर मासिक घटती दर से अधिकतम 12 प्रतिशत ब्याज लिया जाता है। जो सदस्य ब्याज चुकाने में सक्षम नहीं होती, उनसे ब्याज नहीं लिया जाता। इस तरह समूह और ग्राम संगठन की महिलाएं बचत के माध्यम से सालाना चार से पांच लाख रुपये तक की राशि एकत्र कर लेती हैं। प्रत्येक बैठक, प्रस्ताव और लेन-देन का पूरा विवरण समूह की पंजिका में दर्ज किया जाता है।
अंत्योदय कैंटीन में 10 रुपये में परोसी जाने वाली थाली पर सरकार की ओर से 25 रुपये प्रति थाली सब्सिडी दी जाती है। थाली में चावल, दाल, सब्जी और चार रोटियां शामिल होती हैं। कैंटीन संचालन के लिए किसी प्रकार का ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि प्रत्येक नए समूह को समय पर चक्रीय कोष उपलब्ध कराया जाता है।
हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीएम) वीरेंदर श्योराण और उकलाना के ब्लॉक प्रभारी सोहन कैंटीन और समूह के कार्यों की नियमित निगरानी करते हैं। कैंटीन संचालक ग्राहकों से भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था को लेकर फीडबैक भी लेते हैं, ताकि आवश्यक सुधार किए जा सकें। हाल ही में आईएएस अधिकारी कनिका गोयल ने भी इस कैंटीन का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था।
नई अनाज मंडी में भी खुले कैंटीन
नई अनाज मंडी हिसार में फिलहाल कोई कैंटीन या रेस्टोरेंट नहीं है, जबकि वहां प्रत्येक आढ़ती के पास पांच से अधिक मुंशी, सहायक और मजदूर कार्यरत रहते हैं। कैंटीन की सुविधा न होने के कारण कर्मचारियों को घर से टिफिन लाना पड़ता है, जो बरसात और गर्मी के मौसम में अक्सर खराब हो जाता है। ठंडा खाना न खा पाने की समस्या को देखते हुए मंडी से जुड़े लोगों ने स्थानीय प्रबंधन से नई अनाज मंडी में भी कैंटीन खोलने की मांग की है।