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मनरेगा का नाम बदलना गांधी के सिद्धांतों को खत्म करने का प्रयास : सांसद जेपी
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 11 Jan 2026 12:37 AM IST
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हिसार सांसद जयप्रकाश व जिला शहरी अध्यक्ष बजरंग गर्ग पत्रकार वार्ता करते हुए।
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हिसार। कांग्रेस सांसद जयप्रकाश उर्फ जेपी ने मनरेगा योजना का नाम बदलने के प्रस्ताव को महात्मा गांधी के सिद्धांतों, संघर्ष और उनकी आत्मा को मिटाने का प्रयास बताया है। शनिवार को हिसार के विश्रामगृह में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से लोकसभा में पेश किए गए विकसित भारत रोजगार जी, राम जी नामक बिल का कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस श्रीराम के खिलाफ नहीं है, बल्कि जनहितकारी योजनाओं के नाम बदलने की राजनीति के खिलाफ है।
सांसद जेपी ने कहा कि जिन योजनाओं को पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे नेताओं के नाम से जाना जाता था, उनके नाम बदलकर भाजपा अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में इस बिल के खिलाफ गांव से लेकर संसद तक लड़ाई लड़ी जाएगी, जब तक इसे वापस नहीं लिया जाता।
उन्होंने कहा कि 2005 में मनरेगा कानून सोनिया गांधी की सोच पर आधारित था, जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लागू कर ग्रामीण मजदूरों को रोजगार का अधिकार दिया। उस समय केंद्र सरकार 100 प्रतिशत श्रम और 90 प्रतिशत सामग्री लागत वहन करती थी, जबकि राज्यों का हिस्सा मात्र 10 प्रतिशत था। अब इसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। सांसद ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि जब राज्य पहले 10 प्रतिशत भी नहीं दे पा रहा था, तो 40 प्रतिशत कहां से देगा। हिसार जिला शहरी प्रधान बजरंग गर्ग ने बताया कि 11 जनवरी को सुबह 11 बजे गांधी चौक पर कांग्रेस कार्यकर्ता उपवास कर विरोध दर्ज कराएंगे। इस अवसर पर विधायक चंद्र प्रकाश, नरेश सेलवाल, जस्सी पेटवाड़, नरेश मलिक, संतोष जून आदि मौजूद रहे।
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सांसद जेपी ने कहा कि जिन योजनाओं को पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे नेताओं के नाम से जाना जाता था, उनके नाम बदलकर भाजपा अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में इस बिल के खिलाफ गांव से लेकर संसद तक लड़ाई लड़ी जाएगी, जब तक इसे वापस नहीं लिया जाता।
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उन्होंने कहा कि 2005 में मनरेगा कानून सोनिया गांधी की सोच पर आधारित था, जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लागू कर ग्रामीण मजदूरों को रोजगार का अधिकार दिया। उस समय केंद्र सरकार 100 प्रतिशत श्रम और 90 प्रतिशत सामग्री लागत वहन करती थी, जबकि राज्यों का हिस्सा मात्र 10 प्रतिशत था। अब इसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। सांसद ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि जब राज्य पहले 10 प्रतिशत भी नहीं दे पा रहा था, तो 40 प्रतिशत कहां से देगा। हिसार जिला शहरी प्रधान बजरंग गर्ग ने बताया कि 11 जनवरी को सुबह 11 बजे गांधी चौक पर कांग्रेस कार्यकर्ता उपवास कर विरोध दर्ज कराएंगे। इस अवसर पर विधायक चंद्र प्रकाश, नरेश सेलवाल, जस्सी पेटवाड़, नरेश मलिक, संतोष जून आदि मौजूद रहे।