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Hisar News: श्रीराम के अयोध्या पहुंचने और रावण के वध का प्रसंग सुनाया
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नागोरी गेट के हनुमान मंदिर में रामायण पाठ का उच्चारण करते पं. गिरधर गोपाल आसोपा और पं. सुशील आस
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हिसार। नागोरी गेट स्थित हरियाणा कुरुक्षेत्र सनातन धर्म हनुमान मंदिर में नवाह्नपारायण रामायण पाठ के आठवें दिन शुक्रवार को श्रीराम के अयोध्या पहुंचने और रावण वध का प्रसंग सुनाया गया। कार्तिक मित्तल ने सपरिवार हनुमानजी का पूजन किया इसके बाद संगीतमयी चौपाइयों के साथ पाठ का आयोजन किया गया।
पं. गिरधर गोपाल आसोपा और पं. सुशील आसोपा (जोधपुर) ने रावण के वध और श्रीराम के अयोध्या लौटने की कथा सुनाई। पंडाल में जय श्रीराम के जयकारे गूंज उठे। कथा के दौरान नल-नील द्वारा समुद्र पर सेतु निर्माण, रामेश्वर भगवान की पूजा, और लंका में प्रवेश का प्रसंग सुनाया गया।
इसके बाद मंदोदरी द्वारा रावण के सामने श्रीराम के बल का बखान, सीता की वापसी, रावण के खिलाफ युद्ध के प्रसंग, लक्ष्मण के मूर्छित होने और हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी लाने की घटना भी सुनाई गई। पं. गिरधर गोपाल ने रावण वध, विभीषण को राज सिंहासन सौंपने और श्रीराम के अयोध्या लौटने के समय के स्वागत की कथा भी प्रस्तुत की।
कथा के अंत में लखन भैय्या ने भजन सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया। आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। बृजमोहन डालमिया और संजय अग्रवाल ने बताया कि नवाह्नपारायण रामायण पाठ 11 अप्रैल तक हर रोज सुबह 9:30 से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 से 7 बजे तक मंदिर प्रांगण में जारी रहेगा।
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पं. गिरधर गोपाल आसोपा और पं. सुशील आसोपा (जोधपुर) ने रावण के वध और श्रीराम के अयोध्या लौटने की कथा सुनाई। पंडाल में जय श्रीराम के जयकारे गूंज उठे। कथा के दौरान नल-नील द्वारा समुद्र पर सेतु निर्माण, रामेश्वर भगवान की पूजा, और लंका में प्रवेश का प्रसंग सुनाया गया।
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इसके बाद मंदोदरी द्वारा रावण के सामने श्रीराम के बल का बखान, सीता की वापसी, रावण के खिलाफ युद्ध के प्रसंग, लक्ष्मण के मूर्छित होने और हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी लाने की घटना भी सुनाई गई। पं. गिरधर गोपाल ने रावण वध, विभीषण को राज सिंहासन सौंपने और श्रीराम के अयोध्या लौटने के समय के स्वागत की कथा भी प्रस्तुत की।
कथा के अंत में लखन भैय्या ने भजन सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया। आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। बृजमोहन डालमिया और संजय अग्रवाल ने बताया कि नवाह्नपारायण रामायण पाठ 11 अप्रैल तक हर रोज सुबह 9:30 से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 से 7 बजे तक मंदिर प्रांगण में जारी रहेगा।