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Hisar News: ड्रोन उड़ा...हसरतों ने छू लिया आसमान
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सीमा के ड्रोन में रसायन भरते ग्रामीण।
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प्रिया पंवार
हिसार। उसने डर को हराकर उड़ान भरना सीख लिया, खुद के पैरों पर खड़े होकर जीना सीख लिया...फतेहाबाद के रत्ताखेड़ा गांव की सीमा पर यह पंक्तियां सटीक बैठती हैं। सीमा ने साबित कर दिया कि मन में कुछ करने का जुनून हो तो क्षेत्र कोई सा भी हो मुश्किलें बाधा नहीं बनती। सीमा क्षेत्र में ड्रोन दीदी के नाम से ख्यात हैं और किसानों को जैविक खेती, पराली प्रबंधन व धान की सीधी बिजाई के लिए प्रेरित कर रही हैं।
सीमा बीए पास हैं और प्रधानमंत्री से सम्मानित ड्रोन पायलट आजीविका मिशन की सीआरपी स्वयं सहायता समूह की लीडर हैं। पिछले तीन वर्षों से वह ड्रोन दीदी के रूप में कार्य कर रही हैं। सीमा को हाल ही हिसार में आयोजित कृषि दर्शन एक्सपो में उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। सीमा उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो ड्रोन दीदी बनकर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं।
2018 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं
सीमा ने बताया कि एक दिसंबर 2018 को उनके गांव में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की टीम आई थी और महिलाओं को समूह से जोड़ने का काम किया। इसी प्रेरणा से वह एकता स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और वर्ष 2020 में किसानों को जैविक खेती के लिए जागरूक करना शुरू किया। नवंबर 2023 में सीमा ने ड्रोन दीदी प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इसके बाद उन्हें निशुल्क ड्रोन मिला। इससे खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव कर आय बढ़ा रही हैं। हाल ही में उन्हें नया ड्रोन भी मिला है जिससे वह किसानों को और बेहतर सेवाएं प्रदान करेंगी।
2015 में पिता की हो गई थी मौत
सीमा रानी ने बताया कि 2015 में उनके पिता की मौत हो गई थी। घर में बहन-भाईयों में वह सबसे बड़ी है। ऐसे में घर का खर्च उठाने के लिए उन्होंने मजदूरी की और परिवार का खर्च उठाया।
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हिसार। उसने डर को हराकर उड़ान भरना सीख लिया, खुद के पैरों पर खड़े होकर जीना सीख लिया...फतेहाबाद के रत्ताखेड़ा गांव की सीमा पर यह पंक्तियां सटीक बैठती हैं। सीमा ने साबित कर दिया कि मन में कुछ करने का जुनून हो तो क्षेत्र कोई सा भी हो मुश्किलें बाधा नहीं बनती। सीमा क्षेत्र में ड्रोन दीदी के नाम से ख्यात हैं और किसानों को जैविक खेती, पराली प्रबंधन व धान की सीधी बिजाई के लिए प्रेरित कर रही हैं।
सीमा बीए पास हैं और प्रधानमंत्री से सम्मानित ड्रोन पायलट आजीविका मिशन की सीआरपी स्वयं सहायता समूह की लीडर हैं। पिछले तीन वर्षों से वह ड्रोन दीदी के रूप में कार्य कर रही हैं। सीमा को हाल ही हिसार में आयोजित कृषि दर्शन एक्सपो में उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। सीमा उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो ड्रोन दीदी बनकर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं।
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2018 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं
सीमा ने बताया कि एक दिसंबर 2018 को उनके गांव में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की टीम आई थी और महिलाओं को समूह से जोड़ने का काम किया। इसी प्रेरणा से वह एकता स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और वर्ष 2020 में किसानों को जैविक खेती के लिए जागरूक करना शुरू किया। नवंबर 2023 में सीमा ने ड्रोन दीदी प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इसके बाद उन्हें निशुल्क ड्रोन मिला। इससे खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव कर आय बढ़ा रही हैं। हाल ही में उन्हें नया ड्रोन भी मिला है जिससे वह किसानों को और बेहतर सेवाएं प्रदान करेंगी।
2015 में पिता की हो गई थी मौत
सीमा रानी ने बताया कि 2015 में उनके पिता की मौत हो गई थी। घर में बहन-भाईयों में वह सबसे बड़ी है। ऐसे में घर का खर्च उठाने के लिए उन्होंने मजदूरी की और परिवार का खर्च उठाया।