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Hisar News: धुंधले आसमान ने बदली सोच... घर-घर से निकले हरियाली की डगर
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हिसार।पौधों की देखभाल करतीं निधि सहगल। संवाद
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हिसार। मैं पिछले पांच वर्ष से पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी मानकर लगातार कार्य कर रही हूं। आज के समय में बढ़ता प्रदूषण, बदलता मौसम और असहनीय गर्मी हमें साफ संकेत दे रहे हैं कि अब समय आ गया है कि हम सब जागरूक बनें और खुद से पहल करें। मेरा मानना है कि अगर हर व्यक्ति अपने घर से छोटे-छोटे प्रयास शुरू करे तो बड़ा बदलाव संभव है।
करीब पांच साल पहले मुझे पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति का एहसास तब हुआ जब मैं दिल्ली गई। वहां की भीषण गर्मी और धुंधले आसमान ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। ऐसा लगा जैसे वातावरण में ताजगी खत्म हो चुकी हो। तभी मुझे समझ आया कि यह सब बढ़ते प्रदूषण का परिणाम है जो न केवल पर्यावरण बल्कि हमारे स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है।
मैंने सबसे पहले अपने घर से ही बदलाव की शुरुआत की। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करना अपनी दिनचर्या में शामिल किया। इससे प्लास्टिक और अन्य हानिकारक कचरे को अलग करके सही तरीके से निपटाया जा सकता है। मैं पॉलिथीन का इस्तेमाल बंद कर चुकी हूं और उसकी जगह कपड़े के थैले का उपयोग करती हूं। घर में जो भी प्लास्टिक निकलता है उसे अलग इकट्ठा कर कचरा एकत्र करने वाले को देती हूं ताकि उसे पुनः चक्रण किया जा सके।
घर में आरओ से निकलने वाले वेस्ट पानी को मैं कभी बेकार नहीं जाने देती। एक अलग बाल्टी में उस पानी को एकत्र करती हूं और उसका उपयोग सफाई और पौधों को पानी देने में करती हूं। मेरा मानना है कि यदि हर घर में ऐसा किया जाए तो पानी की बड़ी मात्रा को बचाया जा सकता है। - जैसा कि सेक्टर-14 निवासी निधि सहगल ने बताया।
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पौधरोपण और हरियाली पर जोर
निधि सहगल ने बताया कि मेरे लिए पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए पौधारोपण बेहद जरूरी है। मैंने अब तक 100 से अधिक पौधे लगाए हैं जिनमें अधिकतर ऑक्सीजन देने वाले पौधे हैं। मैं बीजों से पौध तैयार करती हूं, उन्हें गमलों में विकसित करती हूं और फिर उन्हें अलग-अलग स्थानों पर लगाती हूं। शहर के डिवाइडर्स, खाली स्थानों और सार्वजनिक जगहों पर टीम के साथ मिलकर पौधरोपण करती हूं।
किचन वेस्ट से जैविक खाद बनाई
उन्होंने बताया कि मैं अपने घर के किचन वेस्ट का भी सदुपयोग करती हूँं। उससे जैविक खाद तैयार करती हूं जो पौधों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इससे कचरे की मात्रा भी कम होती है और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता।
संस्थाओं के साथ मिलकर पौधरोपण किया
साल 2019 में मैं हरी-भरी वसुंधरा संस्था से जुड़ीं जहां से मुझे सही दिशा और प्रेरणा मिली। अब मैं विभिन्न पौधरोपण अभियानों में सक्रिय भाग लेती हूं और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का काम भी कर रही हूं। प्रकृति ने हमें जो कुछ भी दिया है उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
करीब पांच साल पहले मुझे पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति का एहसास तब हुआ जब मैं दिल्ली गई। वहां की भीषण गर्मी और धुंधले आसमान ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। ऐसा लगा जैसे वातावरण में ताजगी खत्म हो चुकी हो। तभी मुझे समझ आया कि यह सब बढ़ते प्रदूषण का परिणाम है जो न केवल पर्यावरण बल्कि हमारे स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है।
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मैंने सबसे पहले अपने घर से ही बदलाव की शुरुआत की। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करना अपनी दिनचर्या में शामिल किया। इससे प्लास्टिक और अन्य हानिकारक कचरे को अलग करके सही तरीके से निपटाया जा सकता है। मैं पॉलिथीन का इस्तेमाल बंद कर चुकी हूं और उसकी जगह कपड़े के थैले का उपयोग करती हूं। घर में जो भी प्लास्टिक निकलता है उसे अलग इकट्ठा कर कचरा एकत्र करने वाले को देती हूं ताकि उसे पुनः चक्रण किया जा सके।
घर में आरओ से निकलने वाले वेस्ट पानी को मैं कभी बेकार नहीं जाने देती। एक अलग बाल्टी में उस पानी को एकत्र करती हूं और उसका उपयोग सफाई और पौधों को पानी देने में करती हूं। मेरा मानना है कि यदि हर घर में ऐसा किया जाए तो पानी की बड़ी मात्रा को बचाया जा सकता है। - जैसा कि सेक्टर-14 निवासी निधि सहगल ने बताया।
पौधरोपण और हरियाली पर जोर
निधि सहगल ने बताया कि मेरे लिए पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए पौधारोपण बेहद जरूरी है। मैंने अब तक 100 से अधिक पौधे लगाए हैं जिनमें अधिकतर ऑक्सीजन देने वाले पौधे हैं। मैं बीजों से पौध तैयार करती हूं, उन्हें गमलों में विकसित करती हूं और फिर उन्हें अलग-अलग स्थानों पर लगाती हूं। शहर के डिवाइडर्स, खाली स्थानों और सार्वजनिक जगहों पर टीम के साथ मिलकर पौधरोपण करती हूं।
किचन वेस्ट से जैविक खाद बनाई
उन्होंने बताया कि मैं अपने घर के किचन वेस्ट का भी सदुपयोग करती हूँं। उससे जैविक खाद तैयार करती हूं जो पौधों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इससे कचरे की मात्रा भी कम होती है और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता।
संस्थाओं के साथ मिलकर पौधरोपण किया
साल 2019 में मैं हरी-भरी वसुंधरा संस्था से जुड़ीं जहां से मुझे सही दिशा और प्रेरणा मिली। अब मैं विभिन्न पौधरोपण अभियानों में सक्रिय भाग लेती हूं और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का काम भी कर रही हूं। प्रकृति ने हमें जो कुछ भी दिया है उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।