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अनजान कॉलर पर भरोसा न करें : राजेश वशिष्ठ
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 16 Mar 2026 01:08 AM IST
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15जेएनडी02: विश्व उपभोक्ता दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम के दौरान मौजूद बच्चे और आयोजक। स्रोत संगठ
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जींद। विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस पर रविवार को अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत और पहला कदम फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का आयोजन संगठन के कार्यालय में किया। इसमें सामाजिक कार्यकर्ता और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के जिला अध्यक्ष राजेश वशिष्ठ ने कहा कि आज के डिजिटल युग में उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा केवल कानूनी प्रावधानों तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि डिजिटल सुरक्षा और साइबर जागरूकता भी इसका अहम हिस्सा बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता अब केवल बाजार में वस्तुएं खरीदने वाला व्यक्ति नहीं रहा बल्कि वह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय है जहां उसकी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी लगातार जोखिम में रहती है। राजेश वशिष्ठ ने बताया कि हाल के दिनों में एक नई और खतरनाक साइबर ठगी की तकनीक सामने आई है जिसे कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम कहा जाता है।
यह स्कैम मोबाइल फोन, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और व्यक्तिगत पहचान से सीधे जुड़ा हुआ है। जैसे ही व्यक्ति यह कोड डायल करता है, उसके मोबाइल की कॉल फॉरवर्डिंग अपने आप एक्टिव हो जाती है। इसके बाद बैंक से आने वाले ओटीपी, ट्रांजेक्शन अलर्ट और सोशल मीडिया वेरिफिकेशन कॉल सीधे ठगों के नंबर पर पहुंचने लगते हैं।
इस तरह ठग बिना किसी तकनीकी बाधा के पीड़ित के बैंक खाते, यूपीआई, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच बना लेते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी अनजान कॉलर पर भरोसा न करें, कूरिअर या डिलीवरी के नाम पर कोई भी कोड डायल न करें और किसी भी परिस्थिति में ओटीपी या बैंक से जुड़ी जानकारी किसी से साझा न करें।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के जिला अध्यक्ष राजेश वशिष्ठ ने कहा कि आज के डिजिटल युग में उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा केवल कानूनी प्रावधानों तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि डिजिटल सुरक्षा और साइबर जागरूकता भी इसका अहम हिस्सा बन चुकी है।
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उन्होंने कहा कि उपभोक्ता अब केवल बाजार में वस्तुएं खरीदने वाला व्यक्ति नहीं रहा बल्कि वह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय है जहां उसकी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी लगातार जोखिम में रहती है। राजेश वशिष्ठ ने बताया कि हाल के दिनों में एक नई और खतरनाक साइबर ठगी की तकनीक सामने आई है जिसे कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम कहा जाता है।
यह स्कैम मोबाइल फोन, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और व्यक्तिगत पहचान से सीधे जुड़ा हुआ है। जैसे ही व्यक्ति यह कोड डायल करता है, उसके मोबाइल की कॉल फॉरवर्डिंग अपने आप एक्टिव हो जाती है। इसके बाद बैंक से आने वाले ओटीपी, ट्रांजेक्शन अलर्ट और सोशल मीडिया वेरिफिकेशन कॉल सीधे ठगों के नंबर पर पहुंचने लगते हैं।
इस तरह ठग बिना किसी तकनीकी बाधा के पीड़ित के बैंक खाते, यूपीआई, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच बना लेते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी अनजान कॉलर पर भरोसा न करें, कूरिअर या डिलीवरी के नाम पर कोई भी कोड डायल न करें और किसी भी परिस्थिति में ओटीपी या बैंक से जुड़ी जानकारी किसी से साझा न करें।