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Jind News: किसानों ने एमएसपी गारंटी व राहत पैकेज की उठाई मांग, उपराष्ट्रपति को भेजा मांगपत्र
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02जेएनडी15: लघु सचिवालय में मांग पत्र सौंपने के लिए पहुंचे किसान संगठन के सदस्य। संवाद
- फोटो : 1
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जींद। भारतीय किसान यूनियन एकता, सिंधपुर की तरफ से फसल खरीद के नए नियमों के विरोध में उपराष्ट्रपति के नाम मांगपत्र भेजा गया है। किसानों ने एमएसपी गारंटी व राहत पैकेज की मांग उठाई और केंद्र व राज्य सरकार से जल्द हस्तक्षेप करने की अपील की है।
भाकियू के जिला महासचिव अनिल ने बताया कि किसानों ने रबी सीजन की फसलों, विशेषकर गेहूं और सरसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करने की मांग उठाई। साथ ही हरियाणा सरकार की ओर से लागू किए गए नए नियमों को जटिल बताते हुए कहा कि इससे खरीद प्रक्रिया कठिन हो गई है।
किसानों को गेट पास, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और ट्रैक्टर-ट्रॉली के नंबर प्लेट अपलोड जैसी प्रक्रियाओं में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे मंडियों में लंबा जाम लगने की आशंका है। मांगपत्र में आलू के गिरते दामों पर भी चिंता जताई गई।
किसानों का कहना है कि उन्हें लागत मूल्य तक नहीं मिल पा रहा। इससे आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। हाल ही में कुछ किसानों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार से राहत पैकेज देने और उचित मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करने की मांग की गई।
इसके अलावा भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते में खेती, डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर को शामिल न करने की मांग की गई है। किसानों ने किसान आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने की भी मांग की है।
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भाकियू के जिला महासचिव अनिल ने बताया कि किसानों ने रबी सीजन की फसलों, विशेषकर गेहूं और सरसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करने की मांग उठाई। साथ ही हरियाणा सरकार की ओर से लागू किए गए नए नियमों को जटिल बताते हुए कहा कि इससे खरीद प्रक्रिया कठिन हो गई है।
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किसानों को गेट पास, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और ट्रैक्टर-ट्रॉली के नंबर प्लेट अपलोड जैसी प्रक्रियाओं में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे मंडियों में लंबा जाम लगने की आशंका है। मांगपत्र में आलू के गिरते दामों पर भी चिंता जताई गई।
किसानों का कहना है कि उन्हें लागत मूल्य तक नहीं मिल पा रहा। इससे आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। हाल ही में कुछ किसानों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार से राहत पैकेज देने और उचित मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करने की मांग की गई।
इसके अलावा भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते में खेती, डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर को शामिल न करने की मांग की गई है। किसानों ने किसान आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने की भी मांग की है।