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Jind News: पुलिस साबित नहीं कर सकी मुठभेड़, पांच आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी
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रोहतक। आठ साल पुरानी मुठभेड़ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में साबित नहीं हो सकी। आमने-सामने फायरिंग के बावजूद पुलिस एक भी खोल बरामद कर अदालत के सामने नहीं रख सकी और न कोई स्वतंत्र गवाह पेश कर सकी।
साक्ष्य के अभाव में बुधवार को एएसजे रजनी यादव की अदालत ने पांच आरोपियों जींद के गांव करसौला निवासी अमित, मुरादपुर टेकना निवासी अभिषेक उर्फ आशु व सोमबीर बहुअकबरपुर निवासी राहुल उर्फ दादा व गुरुग्राम के गांव बिस्वा निवासी विनीत उर्फ तिरची को बरी कर दिया। दूसरे केस में गिरफ्तारी के चलते सोमबीर गुरुग्राम तो राहुल भिवानी जेल में हैं।
सीआईए (अपराध जांच शाखा) द्वितीय के प्रभारी एसआई मंजीत सिंह ने जुलाई 2018 में सांपला थाने में एफआईआर दर्ज कराई। कहा कि कई मामलों में वांछित सोमबीर, अमित, अभिषेक, राहुल व अन्य के दो गाड़ियों में सवार होकर भैंसरू कलां से समचाना गांव जाने की सूचना मिली।
पुलिस ने योजना के तहत दबिश देकर दोनों गाड़ियों को घेर लिया। इसके बाद आरोपियों की तरफ से पुलिस पर फायरिंग की गई। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की। हालांकि किसी को गोली नहीं लगी। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने आरोपियों को हथियारों सहित दबोच लिया और पुलिस पर जानलेवा हमला करने, सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने का मामला दर्ज किया।
बाक्स
बचाव पक्ष ने कहा-फायरिंग के बावजूद गोलियों के खोल नहीं मिले
अदालत में बचाव पक्ष ने कहा कि आरोप पत्र में कहा गया है कि आरोपियों ने पुलिस की टीम पर गोलियां चलाईं। पुलिस ने भी जवाब में गोली चलाई। इसके बावजूद एक भी खोल बरामद नहीं दिखाया गया। दूसरा वारदात में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है। तीसरा गुप्त सूचना में पुलिस को दोनों गाड़ियों का नंबर या रंग नहीं बताया गया। ऐसे में पुलिस ने गाड़ियों की पहचान किस आधार पर की। चौथा फायरिंग के बावजूद किसी को गोली नहीं लगी। पुलिस ने पूरी कहानी फर्जी तरीके से बनाई है। इसके बाद कोर्ट ने साक्ष्य की कमी को देखते हुए आरोपियों को बरी कर दिया।
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साक्ष्य के अभाव में बुधवार को एएसजे रजनी यादव की अदालत ने पांच आरोपियों जींद के गांव करसौला निवासी अमित, मुरादपुर टेकना निवासी अभिषेक उर्फ आशु व सोमबीर बहुअकबरपुर निवासी राहुल उर्फ दादा व गुरुग्राम के गांव बिस्वा निवासी विनीत उर्फ तिरची को बरी कर दिया। दूसरे केस में गिरफ्तारी के चलते सोमबीर गुरुग्राम तो राहुल भिवानी जेल में हैं।
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सीआईए (अपराध जांच शाखा) द्वितीय के प्रभारी एसआई मंजीत सिंह ने जुलाई 2018 में सांपला थाने में एफआईआर दर्ज कराई। कहा कि कई मामलों में वांछित सोमबीर, अमित, अभिषेक, राहुल व अन्य के दो गाड़ियों में सवार होकर भैंसरू कलां से समचाना गांव जाने की सूचना मिली।
पुलिस ने योजना के तहत दबिश देकर दोनों गाड़ियों को घेर लिया। इसके बाद आरोपियों की तरफ से पुलिस पर फायरिंग की गई। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की। हालांकि किसी को गोली नहीं लगी। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने आरोपियों को हथियारों सहित दबोच लिया और पुलिस पर जानलेवा हमला करने, सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने का मामला दर्ज किया।
बाक्स
बचाव पक्ष ने कहा-फायरिंग के बावजूद गोलियों के खोल नहीं मिले
अदालत में बचाव पक्ष ने कहा कि आरोप पत्र में कहा गया है कि आरोपियों ने पुलिस की टीम पर गोलियां चलाईं। पुलिस ने भी जवाब में गोली चलाई। इसके बावजूद एक भी खोल बरामद नहीं दिखाया गया। दूसरा वारदात में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है। तीसरा गुप्त सूचना में पुलिस को दोनों गाड़ियों का नंबर या रंग नहीं बताया गया। ऐसे में पुलिस ने गाड़ियों की पहचान किस आधार पर की। चौथा फायरिंग के बावजूद किसी को गोली नहीं लगी। पुलिस ने पूरी कहानी फर्जी तरीके से बनाई है। इसके बाद कोर्ट ने साक्ष्य की कमी को देखते हुए आरोपियों को बरी कर दिया।