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Jind News: ठेकेदार की सुस्ती से लटकी एसएनसीयू शिफ्टिंग, नवजातों की यूनिट अभी पुराने भवन में
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31जेएनडी31: नागरिक अस्पताल के पुराने भवन में चल रहा एसएनसीयू। संवाद
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जींद। नागरिक अस्पताल में नवजात शिशुओं के इलाज के लिए बनाए जा रहे स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) को नए भवन में शिफ्ट करने की योजना ठेकेदार की ओर से निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार के कारण अधर में लटकी हुई है। अस्पताल प्रशासन ने करीब तीन माह पहले नए भवन में आवश्यक केबिन और अन्य कार्य शुरू कराए थे लेकिन अब तक यह काम पूरा नहीं हो पाया है।
इसके चलते एसएनसीयू अभी भी पुराने भवन में ही संचालित हो रहा है, जबकि नए भवन में गायनी वार्ड पहले से शुरू हो चुका है। अस्पताल के नए भवन में गायनी वार्ड के ठीक ऊपर एसएनसीयू बनाया जा रहा है। भवन का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन कुछ जरूरी कार्य अभी बाकी हैं। इन्हीं कार्यों के पूरा नहीं होने से यूनिट को नए भवन में शिफ्ट नहीं किया जा सका है।
इसका सबसे अधिक असर प्रसूता महिलाओं और उनके परिजनों पर पड़ रहा है। बच्चे के जन्म के बाद यदि नवजात को विशेष देखभाल या उपचार की आवश्यकता होती है तो उसे पुराने भवन में स्थित एसएनसीयू में भर्ती करना पड़ता है, जबकि मां को नए भवन के गायनी वार्ड में ही रखा जाता है। ऐसे में मां और नवजात अलग-अलग भवनों में रहने को मजबूर हैं।
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दोनों भवनों के बीच दूरी होने के कारण परिजनों को लगातार एक भवन से दूसरे भवन तक आना-जाना पड़ता है। नवजात की स्थिति की जानकारी लेने, चिकित्सकों से मिलने और आवश्यक सामान पहुंचाने में काफी परेशानी होती है। कई बार रात के समय भी परिजनों को दोनों भवनों के बीच दौड़ लगानी पड़ती है। वहीं प्रसूता मां भी अपने नवजात से तुरंत नहीं मिल पाती, जिससे मानसिक तनाव बढ़ जाता है। चिकित्सकों का भी मानना है कि जन्म के तुरंत बाद मां और बच्चे का एक ही परिसर में रहना उपचार और देखभाल की दृष्टि से अधिक बेहतर होता है।
बॉक्स
नए भवन में एसएनसीयू के लिए आवश्यक केबिन और अन्य शेष कार्य पूरे होते ही यूनिट को शिफ्ट कर दिया जाएगा। इसके बाद नवजात शिशुओं का उपचार और प्रसूताओं की देखभाल एक ही भवन में हो सकेगी, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके लिए लोकनिर्माण विभाग को वह पत्र लिख चुके हैं, ताकि काम को जल्दी पूरा किया जा सके।- डॉ. रघुवीर पूनिया, (पीएमओ) प्रमुख चिकित्सा अधिकारी नागरिक अस्पताल जींद
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इसके चलते एसएनसीयू अभी भी पुराने भवन में ही संचालित हो रहा है, जबकि नए भवन में गायनी वार्ड पहले से शुरू हो चुका है। अस्पताल के नए भवन में गायनी वार्ड के ठीक ऊपर एसएनसीयू बनाया जा रहा है। भवन का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन कुछ जरूरी कार्य अभी बाकी हैं। इन्हीं कार्यों के पूरा नहीं होने से यूनिट को नए भवन में शिफ्ट नहीं किया जा सका है।
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इसका सबसे अधिक असर प्रसूता महिलाओं और उनके परिजनों पर पड़ रहा है। बच्चे के जन्म के बाद यदि नवजात को विशेष देखभाल या उपचार की आवश्यकता होती है तो उसे पुराने भवन में स्थित एसएनसीयू में भर्ती करना पड़ता है, जबकि मां को नए भवन के गायनी वार्ड में ही रखा जाता है। ऐसे में मां और नवजात अलग-अलग भवनों में रहने को मजबूर हैं।
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दोनों भवनों के बीच दूरी होने के कारण परिजनों को लगातार एक भवन से दूसरे भवन तक आना-जाना पड़ता है। नवजात की स्थिति की जानकारी लेने, चिकित्सकों से मिलने और आवश्यक सामान पहुंचाने में काफी परेशानी होती है। कई बार रात के समय भी परिजनों को दोनों भवनों के बीच दौड़ लगानी पड़ती है। वहीं प्रसूता मां भी अपने नवजात से तुरंत नहीं मिल पाती, जिससे मानसिक तनाव बढ़ जाता है। चिकित्सकों का भी मानना है कि जन्म के तुरंत बाद मां और बच्चे का एक ही परिसर में रहना उपचार और देखभाल की दृष्टि से अधिक बेहतर होता है।
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नए भवन में एसएनसीयू के लिए आवश्यक केबिन और अन्य शेष कार्य पूरे होते ही यूनिट को शिफ्ट कर दिया जाएगा। इसके बाद नवजात शिशुओं का उपचार और प्रसूताओं की देखभाल एक ही भवन में हो सकेगी, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके लिए लोकनिर्माण विभाग को वह पत्र लिख चुके हैं, ताकि काम को जल्दी पूरा किया जा सके।- डॉ. रघुवीर पूनिया, (पीएमओ) प्रमुख चिकित्सा अधिकारी नागरिक अस्पताल जींद