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संसार नश्वर और हरि नाम ही सत्य है : अजयगिरि

संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Wed, 04 Feb 2026 01:18 AM IST
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The world is mortal and Hari's name is the only truth: Ajaygiri
03जेएनडी10: कथावचन करते हुए कथावाचक। संवाद।
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नरवाना। बाबा गैबी साहब मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा स्थल पर भक्ति, वैराग्य और ज्ञान की अद्भुत छंटा बिखरी।
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दूसरे दिन की कथा में राजा परीक्षित के वैराग्य और ज्ञानी शुकदेव महाराज के आगमन के प्रसंगों का वर्णन किया गया।
कथावाचक धर्मपाल शास्त्री जी नाभा वाले महाराज ने बताया कि जब राजा परीक्षित को ऋषि शमीक के पुत्र शृंगी द्वारा सात दिनों में तक्षक नाग के डसने से मृत्यु का श्राप मिला तब वे विचलित नहीं हुए। उन्होंने राज-पाठ, ऐश्वर्य और सांसारिक मोह को त्याग कर गंगा तट पर प्रायोपवेश का व्रत लिया व प्रभु की शरण में चले गए।
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महाराज ने कहा कि राजा परीक्षित का जीवन यह संदेश देता है कि मृत्यु से भयभीत होने के बजाय मनुष्य को अंतिम समय को सुधारने के लिए सत्संग और भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए।
शुकदेव महाराज के दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हुए बताया गया कि जब समस्त ऋषि मुनि राजा परीक्षित की जिज्ञासाओं का समाधान करने में असमर्थ हो गए, तब स्वयं भगवान के साक्षात स्वरूप शुकदेव जी का प्राकट्य हुआ।
महंत अजयगिरि महाराज ने कहा कि भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं है बल्कि जीवन में उतारना ही सच्ची भक्ति है। कथा में भगवान के 24 अवतारों की संक्षिप्त चर्चा भी की गई।

03जेएनडी10: कथावचन करते हुए कथावाचक। संवाद।

03जेएनडी10: कथावचन करते हुए कथावाचक। संवाद।

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