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सत्संग और प्रभु के स्मरण से जीवन का कल्याण संभव : गौर दास
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 16 Mar 2026 01:09 AM IST
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15जेएनडी12: हिंदू कन्या कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु। स्रोत : आयोजक
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जींद। हिंदू कन्या महाविद्यालय में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से आए गौर दास महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति, सत्संग और प्रभु स्मरण का महत्व बताया। कहा कि मनुष्य को गृहस्थ धर्म का पालन करते हुए नित्य कर्मों के साथ प्रभु की सेवा, सत्संग और भगवान के नाम का सुमिरन अवश्य करना चाहिए। कहा कि सत्संग और प्रभु के स्मरण से जीवन का कल्याण संभव है।
महाराज जी ने बताया कि भक्ति मार्ग में श्रवण, कीर्तन और स्मरण का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि कथा का श्रवण इस भाव से करना चाहिए कि मन में यह स्थिर हो जाए कि हम संसार के नहीं, बल्कि प्रभु के हैं और प्रभु ही हमारे हैं। इसके साथ ही प्रतिदिन कुछ समय परिवार के साथ बैठकर भगवान का कीर्तन करना चाहिए तथा गुरु से दीक्षा लेकर प्रभु नाम का जप और स्मरण करना चाहिए।
महाराज ने राजा परीक्षित और शुकदेव जी के संवाद का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब राजा परीक्षित ने पूछा कि सात दिन में मृत्यु होने वाले व्यक्ति को क्या करना चाहिए तब शुकदेव ने कहा कि यह प्रश्न केवल परीक्षित के लिए नहीं बल्कि पूरे संसार के लिए है। संसार में आने और जाने वाला हर व्यक्ति समय की सीमाओं में ही बंधा होता है। इसलिए उसे प्रभु भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए। इस अवसर पर राधेश्याम चिलाना, रमेश चंद्र, राजन चिलाना, मोहित मेहता, जतिन नागपाल, विनोद, नरेश शर्मा, वासुदेव गुलशन मौजूद रहे।
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महाराज जी ने बताया कि भक्ति मार्ग में श्रवण, कीर्तन और स्मरण का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि कथा का श्रवण इस भाव से करना चाहिए कि मन में यह स्थिर हो जाए कि हम संसार के नहीं, बल्कि प्रभु के हैं और प्रभु ही हमारे हैं। इसके साथ ही प्रतिदिन कुछ समय परिवार के साथ बैठकर भगवान का कीर्तन करना चाहिए तथा गुरु से दीक्षा लेकर प्रभु नाम का जप और स्मरण करना चाहिए।
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महाराज ने राजा परीक्षित और शुकदेव जी के संवाद का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब राजा परीक्षित ने पूछा कि सात दिन में मृत्यु होने वाले व्यक्ति को क्या करना चाहिए तब शुकदेव ने कहा कि यह प्रश्न केवल परीक्षित के लिए नहीं बल्कि पूरे संसार के लिए है। संसार में आने और जाने वाला हर व्यक्ति समय की सीमाओं में ही बंधा होता है। इसलिए उसे प्रभु भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए। इस अवसर पर राधेश्याम चिलाना, रमेश चंद्र, राजन चिलाना, मोहित मेहता, जतिन नागपाल, विनोद, नरेश शर्मा, वासुदेव गुलशन मौजूद रहे।