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Kaithal News: सैर के दौरान सांड़ के हमले में घायल हुए बुजुर्ग ने दम तोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 07 Mar 2026 01:39 AM IST
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मृतक बलविंद्र का फाइल फोटो
- फोटो : 1
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। माता गेट के मंदिर के पास सैर के लिए निकले सुभाष नगर निवासी 56 वर्षीय बलविंद्र पर एक लावारिस सांड़ ने हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। 28 फरवरी को हुए इस हादसे के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। छह दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद 5 मार्च को उपचार के दौरान मौत हो गई।
नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे परिजन अंग्रेज ने बताया कि बलविंद्र रोज़ाना की तरह शाम को सैर के लिए निकले थे। जब वह माता गेट के मंदिर के पास पहुंचे तो अचानक एक सांड ने उन पर हमला कर दिया। सांड़ ने उन्हें उछालकर जमीन पर पटक दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाकर सांड़ को वहां से भगाया और घायल अवस्था में उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। गंभीर चोटों के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद छह दिनों तक उन्हें एक बार भी होश नहीं आया और अंततः उपचार के दौरान मौत हो गई।
नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल : इस घटना के बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते आवारा पशुओं को पकड़ने और उनके लिए उचित व्यवस्था करने के ठोस कदम उठाए जाते, तो शायद ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता था।
शहरवासी रामेश्वर फौजी का कहना है कि सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं के कारण अक्सर हादसे होते रहते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे। लोगों की जान जोखिम में है और प्रशासन अब भी प्रभावी कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा।
अनियंत्रित होने से तालाब की दीवार पर चढ़ गई थी बस
दिसंबर 2025 में गुहला से कैथल आ रही रोडवेज की बस गांव पटटी अफगान में सुबह अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने तालाब की दीवार पर चढ़ गई थी। यह हादसा अचानक बेसहारा पशु सामने आने से हुआ था। गनीमत रही कि चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए बस को पलटने से बचा लिया था और सवारियों को चोट नहीं लगी थी।
नगर परिषद के कागजों में सिमटा पशु पकड़ने का अभियान
शहर की गलियों और मुख्य सड़कों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा आम होता जा रहा है। नगर परिषद का पशु पकड़ने का अभियान केवल कागजों और फाइलों तक ही सीमित नजर आता है। नंदी शालाओं और गौशालाओं के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात नहीं बदल पाए हैं। सेक्टरों, मॉडल टाउन, माता गेट और रेलवे रोड जैसे व्यस्त इलाकों में सांडों के झुंड अक्सर सड़कों पर घूमते और आपस में लड़ते दिखाई देते हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना रहता है। अनुमान के अनुसार शहर में करीब दो हजार से अधिक आवारा पशु सड़कों पर घूम रहे हैं।
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कैथल। माता गेट के मंदिर के पास सैर के लिए निकले सुभाष नगर निवासी 56 वर्षीय बलविंद्र पर एक लावारिस सांड़ ने हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। 28 फरवरी को हुए इस हादसे के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। छह दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद 5 मार्च को उपचार के दौरान मौत हो गई।
नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे परिजन अंग्रेज ने बताया कि बलविंद्र रोज़ाना की तरह शाम को सैर के लिए निकले थे। जब वह माता गेट के मंदिर के पास पहुंचे तो अचानक एक सांड ने उन पर हमला कर दिया। सांड़ ने उन्हें उछालकर जमीन पर पटक दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
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आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाकर सांड़ को वहां से भगाया और घायल अवस्था में उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। गंभीर चोटों के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद छह दिनों तक उन्हें एक बार भी होश नहीं आया और अंततः उपचार के दौरान मौत हो गई।
नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल : इस घटना के बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते आवारा पशुओं को पकड़ने और उनके लिए उचित व्यवस्था करने के ठोस कदम उठाए जाते, तो शायद ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता था।
शहरवासी रामेश्वर फौजी का कहना है कि सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं के कारण अक्सर हादसे होते रहते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे। लोगों की जान जोखिम में है और प्रशासन अब भी प्रभावी कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा।
अनियंत्रित होने से तालाब की दीवार पर चढ़ गई थी बस
दिसंबर 2025 में गुहला से कैथल आ रही रोडवेज की बस गांव पटटी अफगान में सुबह अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने तालाब की दीवार पर चढ़ गई थी। यह हादसा अचानक बेसहारा पशु सामने आने से हुआ था। गनीमत रही कि चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए बस को पलटने से बचा लिया था और सवारियों को चोट नहीं लगी थी।
नगर परिषद के कागजों में सिमटा पशु पकड़ने का अभियान
शहर की गलियों और मुख्य सड़कों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा आम होता जा रहा है। नगर परिषद का पशु पकड़ने का अभियान केवल कागजों और फाइलों तक ही सीमित नजर आता है। नंदी शालाओं और गौशालाओं के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात नहीं बदल पाए हैं। सेक्टरों, मॉडल टाउन, माता गेट और रेलवे रोड जैसे व्यस्त इलाकों में सांडों के झुंड अक्सर सड़कों पर घूमते और आपस में लड़ते दिखाई देते हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना रहता है। अनुमान के अनुसार शहर में करीब दो हजार से अधिक आवारा पशु सड़कों पर घूम रहे हैं।

मृतक बलविंद्र का फाइल फोटो- फोटो : 1