{"_id":"69bda6acd6ed89efc60f76d9","slug":"hindu-new-year-is-the-identity-of-indian-culture-anil-arya-kaithal-news-c-245-1-kht1002-146670-2026-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिंदू नववर्ष भारतीय संस्कृति की पहचान : अनिल आर्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिंदू नववर्ष भारतीय संस्कृति की पहचान : अनिल आर्य
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 21 Mar 2026 01:27 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। पर्यावरण एवं संस्कृति संरक्षण मंच की ओर से महर्षि दयानंद पार्क में 101 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के प्रधान अनिल आर्य ने की।
अनिल आर्य ने कहा कि हिंदू नववर्ष का भारतीय समाज में विशेष महत्व है और इसी दिन से नव संवत्सर की वास्तविक शुरुआत होती है। उन्होंने बताया कि इसी दिन से नवरात्र भी आरंभ होते हैं।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपनी भारतीय संस्कृति और परंपराओं को कभी न भूलें।
मुख्य वक्ता जसविंद्र आर्य ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में आकर लोग अपने हिंदू नववर्ष को भूलते जा रहे हैं, जबकि हमारा नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि इस दिन केवल वर्ष परिवर्तन ही नहीं होता, बल्कि प्रकृति भी नए रूप में नजर आती है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1875 में इसी दिन महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी।महायज्ञ आचार्य रविंद्र शास्त्री के ब्रह्मदेव में और जसविंद्र आर्य के सानिध्य में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में डीएवी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश, प्राचार्या साधना, जयपाल सैनी, अशोक सैनी, महेंद्र गोलन, अमित मित्तल, देवव्रत आर्य और भगवानदास उपस्थित रहे।
Trending Videos
पूंडरी। पर्यावरण एवं संस्कृति संरक्षण मंच की ओर से महर्षि दयानंद पार्क में 101 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के प्रधान अनिल आर्य ने की।
अनिल आर्य ने कहा कि हिंदू नववर्ष का भारतीय समाज में विशेष महत्व है और इसी दिन से नव संवत्सर की वास्तविक शुरुआत होती है। उन्होंने बताया कि इसी दिन से नवरात्र भी आरंभ होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपनी भारतीय संस्कृति और परंपराओं को कभी न भूलें।
मुख्य वक्ता जसविंद्र आर्य ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में आकर लोग अपने हिंदू नववर्ष को भूलते जा रहे हैं, जबकि हमारा नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि इस दिन केवल वर्ष परिवर्तन ही नहीं होता, बल्कि प्रकृति भी नए रूप में नजर आती है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1875 में इसी दिन महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी।महायज्ञ आचार्य रविंद्र शास्त्री के ब्रह्मदेव में और जसविंद्र आर्य के सानिध्य में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में डीएवी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश, प्राचार्या साधना, जयपाल सैनी, अशोक सैनी, महेंद्र गोलन, अमित मित्तल, देवव्रत आर्य और भगवानदास उपस्थित रहे।