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Kaithal News: स्टेडियम के अभाव में जुगाड़ के मैदान पर खेल रहे प्यौदा के युवा
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 02 May 2026 01:31 AM IST
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गांव प्यौदा की 4 एकड़ खाली जमीन पर बना अस्थाई स्टेडियम
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संवाद न्यूज एजेंसी
कसान। प्यौदा गांव के युवाओं को बेहतर और स्थायी स्टेडियम की सख्त जरूरत महसूस हो रही है। गांव में खेलों के लिए पक्का मैदान या स्टेडियम न होने के कारण युवा अपने स्तर पर जुगाड़ से अस्थायी मैदान तैयार कर खेल गतिविधियां जारी रखे हुए हैं।
युवाओं का यह प्रयास सराहनीय जरूर है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उनकी प्रतिभा निखर नहीं पा रही। गांव के युवा परमिंद्र के अनुसार, खेल न केवल शारीरिक और मानसिक विकास का माध्यम है, बल्कि नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने का प्रभावी साधन भी है।
स्टेडियम की कमी के कारण कई युवाओं के गलत दिशा में भटकने का खतरा बना रहता है। फिलहाल युवा गांव की करीब 4 एकड़ खाली जमीन को समतल कर कबड्डी, क्रिकेट और दौड़ जैसी गतिविधियां करते हैं। हालांकि बारिश के मौसम में यह
अस्थायी मैदान खेलने योग्य नहीं रहता, जिससे अभ्यास बाधित हो जाता है। मैदान पर शौचालय, पीने के पानी, रनिंग ट्रैक और बैठने जैसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
पंचायत ने पहले भी उठाई मांग : गांव की सरपंच रेखा देवी ने बताया कि करीब डेढ़ वर्ष पहले तत्कालीन पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली से गांव की 4 एकड़ जमीन पर स्टेडियम बनाने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत लगातार इस मांग को लेकर प्रयासरत है और जिला प्रशासन व खेल विभाग से स्थायी स्टेडियम निर्माण की मांग दोहराई जा रही है।
स्टेडियम बने तो निखरेगी प्रतिभा
युवाओं और ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में एक पक्का स्टेडियम बन जाए तो न केवल युवा नियमित रूप से खेलों से जुड़ेंगे, बल्कि जिला और राज्य स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकेंगे। इससे खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और नशामुक्त, स्वस्थ समाज की दिशा में सकारात्मक बदलाव आएगा। ग्रामीण केसा राम ने पंचायत और जिला प्रशासन से मांग की है कि प्यौदा में जल्द से जल्द खेल स्टेडियम का निर्माण कराया जाए, ताकि गांव के युवाओं को सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य मिल सके।
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कसान। प्यौदा गांव के युवाओं को बेहतर और स्थायी स्टेडियम की सख्त जरूरत महसूस हो रही है। गांव में खेलों के लिए पक्का मैदान या स्टेडियम न होने के कारण युवा अपने स्तर पर जुगाड़ से अस्थायी मैदान तैयार कर खेल गतिविधियां जारी रखे हुए हैं।
युवाओं का यह प्रयास सराहनीय जरूर है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उनकी प्रतिभा निखर नहीं पा रही। गांव के युवा परमिंद्र के अनुसार, खेल न केवल शारीरिक और मानसिक विकास का माध्यम है, बल्कि नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने का प्रभावी साधन भी है।
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स्टेडियम की कमी के कारण कई युवाओं के गलत दिशा में भटकने का खतरा बना रहता है। फिलहाल युवा गांव की करीब 4 एकड़ खाली जमीन को समतल कर कबड्डी, क्रिकेट और दौड़ जैसी गतिविधियां करते हैं। हालांकि बारिश के मौसम में यह
अस्थायी मैदान खेलने योग्य नहीं रहता, जिससे अभ्यास बाधित हो जाता है। मैदान पर शौचालय, पीने के पानी, रनिंग ट्रैक और बैठने जैसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
पंचायत ने पहले भी उठाई मांग : गांव की सरपंच रेखा देवी ने बताया कि करीब डेढ़ वर्ष पहले तत्कालीन पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली से गांव की 4 एकड़ जमीन पर स्टेडियम बनाने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत लगातार इस मांग को लेकर प्रयासरत है और जिला प्रशासन व खेल विभाग से स्थायी स्टेडियम निर्माण की मांग दोहराई जा रही है।
स्टेडियम बने तो निखरेगी प्रतिभा
युवाओं और ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में एक पक्का स्टेडियम बन जाए तो न केवल युवा नियमित रूप से खेलों से जुड़ेंगे, बल्कि जिला और राज्य स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकेंगे। इससे खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और नशामुक्त, स्वस्थ समाज की दिशा में सकारात्मक बदलाव आएगा। ग्रामीण केसा राम ने पंचायत और जिला प्रशासन से मांग की है कि प्यौदा में जल्द से जल्द खेल स्टेडियम का निर्माण कराया जाए, ताकि गांव के युवाओं को सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य मिल सके।
