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Kaithal News: हुडा के सेक्टर 18 व 21 में आसमान छू रहे रेट, 16 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे निवासी
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सेक्टर 21 में ग्रीन बैल्ट वाली जगह पर सड़क के साथ उगी झाड़ियां व घास। संवाद
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कैथल। हुडा सेक्टर 18 व 21 में करोड़ों के प्लॉट और मकान होने के बाद भी लोग मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। 2010 में दोनों सेक्टर काटे गए थे। 16 वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो ये सेक्टर पूरी तरह विकसित हो सके हैं और न ही कागजों में दिखाई सुविधाएं अब तक लोगों को मिल पाई हैं। यहां प्लॉटों और मकानों की कीमत कुछ हजार और लाख से अब करोड़ों में जा चुकी है। हुडा की ओर से बोली के जरिये छोटे से छोटा प्लॉट भी करोड़ों में बेचा जा रहा है लेकिन उसके बावजूद लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।
हुडा सेक्टर 21 के हालात ज्यादा बुरे हैं। यहां कहने भर को ग्रीन बेल्ट क्षेत्र है। ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में न तो कागजों में मौजूद पार्क और जिम बन पाए हैं और न ही 100 प्रतिशत क्षेत्र में पौधरोपण हो पाया है। ज्यादातर क्षेत्रों पर लोगों ने निजी सामान डालकर कब्जे किए हुए हैं या फिर गंदगी का अंबार है। सेक्टर 18 में तो बीचों बीच निकली ड्रेन के कारण लोगों का जीवन नर्क बना हुआ है। मामला प्रशासन से लेकर सरकार तक पहुंचा लेकिन ड्रेन को कवर नहीं किया जा सका। दोनों ही सेक्टरों में खाली पड़े प्लॉटों में बेसहारा पशु चरते हैं और बारिश आने पर यही प्लॉट इनके लिए तालाब बने जाते हैं।
सेक्टर 21 के प्रधान की पीड़ा भी सुननी चाहिए...
सेक्टर-21 रेजिडेंट्स वेलफेयर सोसायटी के प्रधान बलवान छौत का कहना है कि 16 साल बाद भी अनगिनत समस्याएं हैं। ग्रीन बेल्ट और रिलीज लैंड पर अवैध कब्जे हैं, झुग्गियां बनी हुई हैं और अवैध बिजली-पानी कनेक्शन चल रहे हैं। खुले में पशु बांधे जाने और पूरे शहर के आवारा पशुओं के आने से गंदगी व असुविधा बढ़ रही है। बारिश के दौरान जलभराव, मच्छरों और बदबू की समस्या बनी रहती है। सेक्टर में मंदिर, कम्युनिटी सेंटर और मार्केट नहीं है। कई स्थानों पर अतिक्रमण भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। बिजली ट्रांसफार्मरों पर अधिक लोड होने से आधे सेक्टर में लोग एसी तक नहीं चला पाते। वे लोग पौधे लगाते हैं लेकिन पशु उन्हें खा जाते हैं। अधिकारी ट्री गार्ड तक उपलब्ध नहीं करवा सके हैं।
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सेक्टर 18 के प्रधान बोले- वर्षों पुरानी मांग अब भी अधूरी
सेक्टर 18 के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान सोहन ढुल का कहना है कि वर्षों पुरानी मांग ड्रेन को कवर करने की जो अब भी अधूरी है। लंबी लड़ाई लड़ने के बाद टेंडर लगा था और अब ठेकेदार भाग गया है। जो काम विभागों के हैं, वे लोगों को करने पड़ रहे हैं। दोनों साइड प्रवेश पर ग्रीन बेल्ट नहीं बनाई जा रही है। हाईटेंशन तार सेक्टर के बीचों बीच निकल रही हैं, उसका समाधान नहीं किया जा रहा है। खाली प्लॉटों में बारिश के बाद पानी भर जाता है जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। सड़कें टूट पड़ी हैं उनको नहीं बनाया जा रहा है।
बड़े शहरों में से भी ज्यादा हैं यहां रेट
हुडा सेक्टर 18 व 21 में रेट सुन लोग हैरान रह जाते हैं। कभी 9500 रुपये प्रति गज के हिसाब से यहां प्लॉट काटे गए थे लेकिन अब इन सेक्टरों में रेट 10 से 15 गुना बढ़ चुके हैं। सेक्टर 21 में तो रेट एक लाख से डेढ़ लाख रुपये प्रति गज हो चुके हैं। सेक्टर 18 भी अब पीछे नहीं है और यहां भी अब 70 हजार से लेकर एक लाख रुपये प्रति गज तक रेट हैं।
अब दोनों ही सेक्टरों में अच्छे खासे मकान बन गए हैं और उनको देखते हुए लगातार सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है। सड़कें बन रही हैं और ग्रीन बैल्ट के लिए भी जल्द ही टेंडर ओपन हो जाएगा। उसके बाद भी लोगों की समस्याओं को देखते हुए लगातार समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं।
- निधि, कार्यकारी अधिकारी, एचएसवीपी, कैथल।
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हुडा सेक्टर 21 के हालात ज्यादा बुरे हैं। यहां कहने भर को ग्रीन बेल्ट क्षेत्र है। ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में न तो कागजों में मौजूद पार्क और जिम बन पाए हैं और न ही 100 प्रतिशत क्षेत्र में पौधरोपण हो पाया है। ज्यादातर क्षेत्रों पर लोगों ने निजी सामान डालकर कब्जे किए हुए हैं या फिर गंदगी का अंबार है। सेक्टर 18 में तो बीचों बीच निकली ड्रेन के कारण लोगों का जीवन नर्क बना हुआ है। मामला प्रशासन से लेकर सरकार तक पहुंचा लेकिन ड्रेन को कवर नहीं किया जा सका। दोनों ही सेक्टरों में खाली पड़े प्लॉटों में बेसहारा पशु चरते हैं और बारिश आने पर यही प्लॉट इनके लिए तालाब बने जाते हैं।
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सेक्टर 21 के प्रधान की पीड़ा भी सुननी चाहिए...
सेक्टर-21 रेजिडेंट्स वेलफेयर सोसायटी के प्रधान बलवान छौत का कहना है कि 16 साल बाद भी अनगिनत समस्याएं हैं। ग्रीन बेल्ट और रिलीज लैंड पर अवैध कब्जे हैं, झुग्गियां बनी हुई हैं और अवैध बिजली-पानी कनेक्शन चल रहे हैं। खुले में पशु बांधे जाने और पूरे शहर के आवारा पशुओं के आने से गंदगी व असुविधा बढ़ रही है। बारिश के दौरान जलभराव, मच्छरों और बदबू की समस्या बनी रहती है। सेक्टर में मंदिर, कम्युनिटी सेंटर और मार्केट नहीं है। कई स्थानों पर अतिक्रमण भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। बिजली ट्रांसफार्मरों पर अधिक लोड होने से आधे सेक्टर में लोग एसी तक नहीं चला पाते। वे लोग पौधे लगाते हैं लेकिन पशु उन्हें खा जाते हैं। अधिकारी ट्री गार्ड तक उपलब्ध नहीं करवा सके हैं।
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सेक्टर 18 के प्रधान बोले- वर्षों पुरानी मांग अब भी अधूरी
सेक्टर 18 के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान सोहन ढुल का कहना है कि वर्षों पुरानी मांग ड्रेन को कवर करने की जो अब भी अधूरी है। लंबी लड़ाई लड़ने के बाद टेंडर लगा था और अब ठेकेदार भाग गया है। जो काम विभागों के हैं, वे लोगों को करने पड़ रहे हैं। दोनों साइड प्रवेश पर ग्रीन बेल्ट नहीं बनाई जा रही है। हाईटेंशन तार सेक्टर के बीचों बीच निकल रही हैं, उसका समाधान नहीं किया जा रहा है। खाली प्लॉटों में बारिश के बाद पानी भर जाता है जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। सड़कें टूट पड़ी हैं उनको नहीं बनाया जा रहा है।
बड़े शहरों में से भी ज्यादा हैं यहां रेट
हुडा सेक्टर 18 व 21 में रेट सुन लोग हैरान रह जाते हैं। कभी 9500 रुपये प्रति गज के हिसाब से यहां प्लॉट काटे गए थे लेकिन अब इन सेक्टरों में रेट 10 से 15 गुना बढ़ चुके हैं। सेक्टर 21 में तो रेट एक लाख से डेढ़ लाख रुपये प्रति गज हो चुके हैं। सेक्टर 18 भी अब पीछे नहीं है और यहां भी अब 70 हजार से लेकर एक लाख रुपये प्रति गज तक रेट हैं।
अब दोनों ही सेक्टरों में अच्छे खासे मकान बन गए हैं और उनको देखते हुए लगातार सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है। सड़कें बन रही हैं और ग्रीन बैल्ट के लिए भी जल्द ही टेंडर ओपन हो जाएगा। उसके बाद भी लोगों की समस्याओं को देखते हुए लगातार समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं।
- निधि, कार्यकारी अधिकारी, एचएसवीपी, कैथल।

सेक्टर 21 में ग्रीन बैल्ट वाली जगह पर सड़क के साथ उगी झाड़ियां व घास। संवाद