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Kaithal News: बारिश से मौसम सुहाना लेकिन फसलों पर संकट
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 08 Apr 2026 02:12 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मंगलवार को बदले मौसम ने जहां आमजन को गर्मी से राहत दी, वहीं किसानों के लिए यह बारिश चिंता का कारण बन गई। सुबह से छाए बादलों के बीच दोपहर बाद हुई झमाझम बारिश और ठंडी हवाओं ने मौसम को सुहाना बना दिया, लेकिन खेतों में तैयार खड़ी फसलों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा है।
दोपहर होते-होते बादलों ने डेरा डाल लिया और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। इसके चलते अधिकतम तापमान गिरकर 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। धूल भरी हवाओं से राहत मिली और वातावरण में ठंडक घुल गई। शहरों में लोग इस मौसम का आनंद लेते नजर आए, जबकि ग्रामीण इलाकों में हालात इसके विपरीत रहे।
किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें : बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गेहूं और सरसों की फसलें इस समय या तो कटने की कगार पर हैं या काटकर सुखाने के लिए खेतों में रखी गई हैं। बारिश और तेज हवाओं के कारण खड़ी फसल गिरने से दाना काला पड़ने और सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
किसानों का कहना है कि साल भर की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। यदि मौसम का यही मिजाज बना रहा, तो पैदावार और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रमेश चंद्र के अनुसार, अगले 24 घंटे में मौसम में खास सुधार की संभावना कम है। बुधवार को भी गरज-चमक के साथ बारिश होने की आशंका है। इस पूर्वानुमान से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। मंडियों में खुले में रखा अनाज भी भीगने की कगार पर है, जिससे किसानों के साथ-साथ व्यापारियों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान पर ढककर रखें और जल निकासी का समुचित प्रबंध करें।
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कैथल। मंगलवार को बदले मौसम ने जहां आमजन को गर्मी से राहत दी, वहीं किसानों के लिए यह बारिश चिंता का कारण बन गई। सुबह से छाए बादलों के बीच दोपहर बाद हुई झमाझम बारिश और ठंडी हवाओं ने मौसम को सुहाना बना दिया, लेकिन खेतों में तैयार खड़ी फसलों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा है।
दोपहर होते-होते बादलों ने डेरा डाल लिया और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। इसके चलते अधिकतम तापमान गिरकर 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। धूल भरी हवाओं से राहत मिली और वातावरण में ठंडक घुल गई। शहरों में लोग इस मौसम का आनंद लेते नजर आए, जबकि ग्रामीण इलाकों में हालात इसके विपरीत रहे।
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किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें : बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गेहूं और सरसों की फसलें इस समय या तो कटने की कगार पर हैं या काटकर सुखाने के लिए खेतों में रखी गई हैं। बारिश और तेज हवाओं के कारण खड़ी फसल गिरने से दाना काला पड़ने और सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
किसानों का कहना है कि साल भर की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। यदि मौसम का यही मिजाज बना रहा, तो पैदावार और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रमेश चंद्र के अनुसार, अगले 24 घंटे में मौसम में खास सुधार की संभावना कम है। बुधवार को भी गरज-चमक के साथ बारिश होने की आशंका है। इस पूर्वानुमान से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। मंडियों में खुले में रखा अनाज भी भीगने की कगार पर है, जिससे किसानों के साथ-साथ व्यापारियों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान पर ढककर रखें और जल निकासी का समुचित प्रबंध करें।