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Kaithal News: तीन लाख कट्टे और 15 हजार ट्रे की कमी, गेहूं खराब होने का खतरा

संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 08 Apr 2026 02:15 AM IST
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There is a shortage of 300,000 bags and 15,000 trays, and the risk of wheat spoilage increases.
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नरेंद्र पंडित
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कैथल। बेमौसम बारिश से जूझ रहे किसानों के सामने अब सरकारी अव्यवस्था भी बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। जिले की अनाज मंडियों में बारदाने (कट्टों), तिरपाल और लकड़ी की ट्रे की भारी कमी के चलते गेहूं की खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

स्थिति यह है कि एजेंसियों के पास करीब 3 लाख कट्टों की कमी बनी हुई है, जिससे मंडियों में तुलाई का कार्य कछुआ गति से चल रहा है। किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं, लेकिन बारदाने के अभाव में उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है।
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वहीं गेहूं को जमीन से ऊपर सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की ट्रे भी पर्याप्त नहीं हैं। वर्तमान स्टॉक के लिए जहां करीब 35 हजार ट्रे की जरूरत है, वहीं 15 हजार ट्रे की कमी बताई जा रही है। ऐसे में हजारों क्विंटल गेहूं को जमीन पर बोरियां बिछाकर रखने की नौबत आ गई है, जिससे नमी और सीलन के कारण दाना खराब होने और फफूंद लगने का खतरा बढ़ गया है।

एजेंसियों के पास गेहूं को ढकने के लिए पर्याप्त तिरपाल भी उपलब्ध नहीं हैं। गोदाम पहले से भरे होने और जगह की कमी के चलते लाखों क्विंटल गेहूं को खुले में स्टॉक करना मजबूरी बन गया है।

धूप और बारिश के बीच खुले में रखा गेहूं खराब होने की कगार पर है। खुले स्टॉक में चोरी, मवेशियों और मौसम से नुकसान का खतरा भी बना रहता है। विडंबना यह है कि आधुनिक भंडारण की बातों के बीच आज भी अनाज को ढकने के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। खुले में स्टॉक लगाने से न केवल चोरी का डर रहता है, बल्कि मवेशियों और बारिश से बचाव करना नामुमकिन हो जाता है।

समय पर बारदाना नहीं मिला तो लगेगा जाम : नई अनाज मंडी के प्रधान कृष्ण मित्तल का कहना है कि यदि जल्द कट्टों की आपूर्ति नहीं हुई तो मंडियों में जाम की स्थिति बन जाएगी। किसानों को मजबूरन अपनी फसल सड़कों पर डालनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि पहले सीजन शुरू होने से पहले ही पर्याप्त बारदाना उपलब्ध हो जाता था, लेकिन इस बार स्थिति बेहद खराब है और किसानों को कट्टों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। संवाद

जिले में बारदाने की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता अनुसार सभी को उपलब्ध कराया जा रहा है। तिरपाल, ट्रे आदि की भी व्यवस्था है। हालांकि अब की बार स्पेस थोड़ा कम है। -वरिंद्र कुमार, डीएफएससी कैथल
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